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शुक्रवार, मई 14, 2021
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incab-industries-बंद बड़ी केबुल कंपनी के संपत्तियों के हस्तांतरण पर कोलकाता हाईकोर्ट में बहस, हाईकोर्ट में फैसले का इंतजार, बहस रह गयी अधूरी, फिर होगी बहस

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जमशेदपुर : वर्षों से बंद बड़ी केबुल कंपनी (इंकैब इंजस्ट्रीज) कोलकाता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. टाटा स्टील लिमिटेड द्वारा इन्कैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड की सुरक्षित देनदारियों (त्रृणों) को सरकारी बैंकों द्वारा गैरकानूनी तरीके से प्राईवेट कंपनियों (कमला मिल्स, फस्का इन्वेस्टमेंट, पेगाशस एसेट रिकन्सट्रक्शन) को हस्तांतरित करने के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय में 2018 में दायर रिट पिटीशन नंबर 14251, 14253 और 15541 में सुनवाई हुई. कमला मिल्स की तरफ से जिरह करते हुए अधिवक्ता रूद्रेश्वर सिंह ने कहा कि बैंकों ने कमला मिल्स, फस्का इनवेस्टमेंट और पेगासस एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों को इंकैब इन्डस्ट्रीज लिमिटेड की अपनी लेनदारियों (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां; एनपीए) को ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 130 (एक्शनेबल क्लेम्स) के तहत हस्तांतरित किया. न्यायाधीश ने तुरंत ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 130 (एक्शनेबल क्लेम्स) को पढ़कर अधिवक्ता के दावे को सुधारते हुए बताया कि बैंकों की सुरक्षित देनदारियां एक्सनेबल क्लेम्स में नहीं आती है. अतः आपका तर्क सही नहीं है. इसके बाद अधिवक्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पेगासस एसेट रिकंस्ट्रक्शन द्वारा कमला मिल्स के उपर दायर अदालत की अवमानना के एक मामले में दिये एक फैसले को उद्धृत करते हुए कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने उक्त लेनदारियों के हस्तनांतरण को सही ठहराया था, इस पर मजदूरों के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने आपत्ति करते हुए कहा कि ये अदालत को गुमराह कर रहे हैं क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष यह मसला था ही नहीं कि बैंक अपनी देनदारियों को प्राइवेट कंपनियां, जो बैंक या एनबीएफसी नहीं हैं, को हस्तांतरित कर सकती है या नहीं. चूंकि, कमला मिल्स के अधिवक्ता ने अपनी जिरह पूरी नहीं की थी, अतः उच्च न्यायालय ने मजदूरों के अधिवक्ता से अगली तारीख को कमला मिल्स की जिरह समाप्त होने के बाद प्रतिउत्तर देने को कहा. ज्ञातव्य है कि इंकैब के मजदूरों द्वारा उक्त कार्यवाही में हस्तक्षेप पर कोलकाता उच्च न्यायालय ने 5 मार्च 2020 को संज्ञान लिया था और इंकैब के मजदूरों के अधिवक्ताओं की जिरह के आधार पर 5 मार्च, 2020 की सुनवाई में आदेश पारित किया था. उच्च न्यायालय ने एनसीएलटी द्वारा 7 फरवरी 2020 को दिये गये इंकैब कंपनी के परिसमापन के आदेश को अपने संज्ञान में लेकर 5 मार्च 2020 के अपने उक्त आदेश में इंकैब के मजदूरों के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव के इस बहस को दर्ज किया था कि इंकैब कंपनी की सरकारी बैंकों की देनदारियों को प्राइवेट कंपनियों को सौंपना उच्चतम न्यायालय के आइसीआइसीआइ बैंक बनाम ऑफिशियल लिक्विडेटर ऑफ एपीएस स्टेट इंडस्ट्रीज लिमिटेड (2010) 10 एससीसी 1 मामले में दिये गये फैसले के प्रतिकूल है. उच्च न्यायालय ने यह भी दर्ज किया था कि सरकारी बैंक अपनी गैरनिष्पादित संपत्तियों (एनपीए) को सिर्फ सरकारी बैंकों और एनबीएफसी कंपनियों को ही सौंप सकते हैं. उच्च न्यायालय ने अपने उक्त आदेश में यह भी दर्ज किया भारत के कानून में उपरोक्त व्यवस्था के अलावे कुछ और सक्षम करने का प्रावधान नहीं है. अदालत ने शुक्रवार की कार्यवाही में कमला मिल्स को अधिवक्ता को यह याद दिलाया कि उन्हें उच्चतम न्यायालय के उक्त आदेश का भी जवाब देना है. अगली कार्यवाही 4 फरवरी 2021 को होगी. इंकैब कर्मचारियों की तरफ से उक्त सुनवाई में कोलकाता उच्च न्यायालय के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव और आकाश शर्मा ने हिस्सा लिया.

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