incab-industries-केबुल कंपनी के मामले में झारखंड सरकार पर विधायक सरयू राय ने बढ़ाया दबाव, मुख्य सचिव के साथ की वार्ता, एनसीएलटी में पक्षकार बन सकती है राज्य सरकार

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जमशेदपुर : जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित करीब 22 साल से बंद पड़े केबुल कंपनी (इंकैब इंडस्ट्रीज) को चालू कराने के लिए विधायक सरयू राय ने झारखंड सरकार पर अपना दबाव बढ़ा दिया है. विधायक सरयू राय ने इसको लेकर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह के साथ बुधवार को अहम बैठक की. मुख्य सचिव के सामने विधायक सरयू राय ने विस्तार से केबुल कंपनी के चालू होने, फिर बंद होने तक की पूरी कहानी लिखित में सौंपा जबकि किस तरह राज्य सरकार इसमें पहल कर सकती है, इसके भी उपाय बताये गये. मुख्य सचिव रके समक्ष एक संक्षिप्त प्रस्ताव रखा कि सरकार एनसीएलटी की सुनवाई के मामले में हस्तक्षेप करें ताकि केबुल कंपनी को नीलामी से बचाया जा सके और केबुल कर्मियों के हितों का संरक्षण किया जा सके. उन्होंने मुख्य सचिव को बताया कि किन-किन बिंदुओं के आधार पर राज्य सरकार इस मामले में एनसीएलटी के सामने हस्तक्षेप कर सकती है. मुख्य सचिव ने 40 मिनट चली वार्ता में काफी दिलचस्पी लिया और आश्वासन दिया कि इस मामले में वे कानूनी सलाह लेंगे और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे. मुख्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत तीन पृष्ठों का उनका प्रस्ताव भी रखा गया. इस दौरान टाटा स्टील की भूमिका की भी जानकारी मुख्य सचिव को दी है, जिसमें उन्होंने बताया है कि उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम के प्रतिवेदन से स्पष्ट है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने टाटा स्टील लिमिटेड को इस मामले में सर्वोतम बोली लगाने वाला अभ्यर्थी माना था. टाटा स्टील ने भी बीच के दिनों में इंकैब के पुनरूद्धार में पर्याप्त अभिरूचि प्रदर्शित किया था. परन्तु जब रिजोल्युशन प्रोफेशनल ने हाल में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (इओआइ) निकाला तो टाटा स्टील ने चुप्पी साध ली, बोली नहीं लगाया. अवधि विस्तार होने पर भी इन्होंने इओआइ में अपना प्रस्ताव अभी तक नहीं दिया है. सरयू राय ने सरकार को ध्यान दिलाया है कि टिस्को (टाटा स्टील लिमिटेड) ने 99 साल की लीज पर 177 एकड़ जमीन इंकैब को लीज पर दिया था, जिसकी अवधि दिनांक 14.07.2019 को समाप्त हो गई. इंकैब और टिस्को के बीच हुए लीज समझौता में उल्लेख है कि इंकैब के बंद होने की स्थिति में यह जमीन राज्य सरकार की अनुमति से टाटा स्टील के पास जा सकेगी. ऐसी स्थिति में आज की तिथि में इंकैब की 177 एकड़ जमीन का असली मालिक राज्य की सरकार है. यदि रिजोल्युशन प्रोफेशनल द्वारा प्रकाशित इओआइ के आधार पर इंकैब के पुनरूद्धार के लिए कोई सक्षम प्रोमोटर नहीं आता है, तब इस भूखण्ड पर या तो टाटा स्टील लिमिटेड औद्योगिक गतिविधि आरम्भ कर केबुल कर्मियों का बकाया भुगतान करे अथवा राज्य सरकार इस भूमि पर औद्योगिक निवेश आमंत्रित कर केबुल कर्मियों के हितों का संरक्षण करे. श्री राय ने कहा है कि राज्य सररकार के पास पर्याप्त आधार है कि इस 177 एकड़ जमीन पर आर्थिक गतिविधि आरम्भ करने, इंकैब में निहित स्वार्थी तत्वों की मिलीभगत उजागर करने के लिए और इंकैब के श्रमिकों का बकाया भुगतान सुनिश्चित करने हेतु राज्य सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे.

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