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jharkhand-labour-problem-मजदूरों की समस्या और हंगामा से जुड़ी 3 खबरें, जमशेदपुर के मेडिका अस्पताल में स्टाफ के तबादले का यूथ इंटक ने जताया विरोध, आदित्यपुर के ऑटो प्रोफाइल में मजदूरों का हंगामा, जमशेदपुर स्टील स्ट्रिप के मजदूरों की समस्या इंटक ने डीएलसी तक पहुंचायी

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जमशेदपुर/सरायकेला : पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिला समेत तमाम जिलों में मजदूरों की समस्या बढ़ती जा रही है. वेतन समेत अन्य मुद्दे को लेकर आंदोलन शुरू हो रहा है. इस कड़ी में कई जगहों पर हंगामा हुआ.

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जमशेदपुर मेडिका के 40 स्टाफ कोलकाता भेजे गये, इंटक ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
यूथ इंटक का एक प्रतिनिधिमंडल मेडिका हस्पताल के प्रबंधन से मिलकर 40 मेडिकल स्टाफ के तबादले पर अपना विरोध जताया और एक आनन-फानन में लिए गए फैसले को वापस लेने के लिए कहा. सोमवार को सुबह 11:00 बजे से 2:00 बजे तक मेडिका प्रबंधन और यूथ इंटक के बीच चली वार्ता के बाद प्रबंधन ने कहा कि उन्हें 48 घंटे का समय दिया जाए, वे कोलकाता स्थित हेड ऑफिस जोकि मेडिकल स्टाफ का ट्रांसफर आर्डर भेजे हैं, उनसे बात कर सकारात्मक हल निकाल लिया जाएगा. प्रबंधन का कहना है कि कोलकाता मेडिका को कोविड सेंटर बनाया गया है वहां 150 नर्स मणिपुर की थी, जो अपने राज्य वापस चली गई है, इसलिए उन्हें सख्त नर्सों एवं मेडिकल स्टाफ की जरूरत है इसलिए यह निर्णय लिया गया है. प्रबंधन ने माना कि हमसे गलती हुई है और यह प्रबंधन यूनियन को बैठकर निर्णय लेना चाहिए. शैलेश पांडेय ने प्रबंधन से कहा कि समय की नजाकत को समझना चाहिए और आपको पहले अपने रिकॉग्नाइज यूनियन से वार्ता कर आगे पहल करनी चाहिए थी. इतने बड़े तादाद में ट्रांसफर करना बिना कोई समय दिए यह समझ से परे है , एक तरफ राज्य के मुख्यमंत्री प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने के लिए चिंतित है और आप अपने राज्य में काम कर रहे कामगारों को इस समय दूसरे राज्य में भेजना चाहते हैं जो कि न्यायोचित नहीं है. यूथ इंटक ने अल्टीमेटम दिया है कि 48 घंटे में यदि आप अपने फैसले को वापस नहीं लेते हैं तो हम आंदोलन के लिए बाध्य होंगे. मीटिंग में प्रबंधन के तरफ से डॉक्टर त्रिदीपत्तों चक्रवर्ती (डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट), अमित कुमार सिंह (ऑपरेशन हेड), इंद्राणी सरकार (कार्मिक प्रबंधक), दूसरी तरफ यूथ इंटक के प्रदेश अध्यक्ष शैलेश पांडेय, राष्ट्रीय यूथ इंटक सहायक महासचिव शिखा चौधरी, राष्ट्रीय सचिव विजय यादव एवं पूर्वी सिंहभूम जिला यूथ इंटक जिलाध्यक्ष अंजनी पांडेय उपस्थित थे.

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आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की कंपनी में हंगामा
वैश्विक संकट के बीच लॉक डाउन 4 की शुरुआत आज से हो रही है. भले देश के प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन की अवधि में कर्मचारियों और मजदूरों को वेतन दिए जाने की अपील की है. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. आपको बता दें कि झारखंड के सरायकेला जिले का आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया एशिया का दूसरा सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल सेक्टर है. लेकिन लॉक डाउन की अवधि में यहां के मजदूरों का जो दर्द सामने आ रहा है वह निश्चय ही काफी भयावह है. जहां आए दिन किसी न किसी कंपनी के मजदूरों को वेतन के लिए प्रदर्शन करते देखा जा रहा है. वैसे ताजा मामला ऑटो प्रोफाइल कंपनी का है. जहां करीब 600 मजदूरों ने वेतन की मांग को लेकर कंपनी गेट पर प्रदर्शन किया. जानकारी देते हुए मजदूरों ने बताया कि वे सभी ठेका कर्मी है जिन्हें पिछले 2 महीने से ठेकेदार द्वारा वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है, जिससे उनकी स्थिति काफी दयनीय हो गई है. ऐसे में आप साफ समझ सकते हैं कि केंद्र सरकार के निर्देश के बाद औद्योगिक नगरी आदित्यपुर में मजदूरों की क्या स्थिति है. वैसे यह स्थिति केवल एक दो कंपनियों की नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल सेक्टर के लगभग सभी कंपनियों की है.

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जमशेदपुर के गोविंदपुर स्टील स्ट्रिप्स लिमिटेड कंपनी का मुद्दा डीएलसी तक पहुंचा
जमशेदपुर के गोविंदपुर स्टील स्ट्रिप्स लिमिटेड कंपनी का मुद्दा भी उपश्रमायुक्त (डीएलसी) तक पहुंचा. इंटक नेता राजीव पांडेय के नेतृत्व में लोगों ने स्टील स्ट्रिप्स कंपनी के मसले को लेकर ज्ञापन सौंपा. इन लोगों ने एक ज्ञापन डीएलसी को सौंपा. इसके तहत डीएलसी को सौंपे गये ज्ञापन में कहा गया कि कोविड-19 के तहत लॉक डाउन अवधि में मार्च एवं अप्रैल महीने बकाया वेतन का भुगतान कराने की कृपा की जाय, ओवरटाइम का डबल भुगतान कराने की कृपा की जाये, साप्ताहिक तथा वार्षिक छुट्टी का पैसा का भी भुगतान कराने की कृपा की जाये, ग्रेच्युटी योजना का भी लाभ दिलाने की कृपा की जाये, पूरे महीने में 26 दिन ड्यूटी करने के बाद भी इपीएफ और इएसआइ में 12-14 दिन दर्शाया जाता है. कंपनी में व्याप्त इस प्रकार के अनिमियता दूर कराने की कृपा की जाये, फाइनल सेटलमेंट भी नियमतः लागू कराने की कृपा की जाये, गेट पास में कंपनी का पूरा नाम, पता एवं संपर्क सूत्र अंकित कराने की कृपा की जाये समेत अन्य मांगें की गयी. इन लोगों ने मांग की है कि देशव्यापी आपदा के दौरान सभी ठेका कर्मचारी आर्थिक संकट के कारण डिप्रेशन में है तथा थाली कटोरा लेकर रोड पर निकले एंव आत्महत्या करने पर विवश हो गए हैं.

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