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tata-mistry-issue-टाटा-मिस्त्री परिवार का विवाद-आखिर क्यों 70 साल पुराना रिश्ता टूटने के कगार पर पहुंचा, टाटा समूह को मिस्त्री परिवार को देना पड़ सकता है 16 खरब रूपये !, जानें कैसे बिगड़े रिश्ते, क्या है इतिहास, क्या होगा भविष्य, कैसे भाइयों के विवाद का लाभ मिस्त्री परिवार ने उठाया, पूरी खबर पढ़े

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रतन टाटा और सायरस मिस्त्री की पुरानी तस्वीर.

मुंबई/जमशेदपुर : टाटा समूह के एमिरट्स चेयरमैन रतन टाटा और पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री का 70 साल पुराना पारिवारिक रिश्ता और टाटा के साथ जुड़ाव अब टूटने के कागार पर पहुंच चुका है. टाटा समूह ने सुप्रीम कोर्ट में इच्छा जतायी है कि शापूरजी पालनजी समूह की हिस्सेदारी को वह खरीदना चाहती है जबकि खुद शापूरजी पालनजी समूह ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह टाटा समूह से अलग होना चाहती है और अगर उनको सही कीमत मिलेगी तो वे लोग इससे बाहर आ सकते है क्योंकि विवादों से उनको ही नुकसान होना है. इस बीच टाटा समूह ने इसका आकलन शुरू कर दिया है कि कैसे टाटा समूह मिस्त्री परिवार के शापूरजी पालनजी समूह के शेयर को खरीद सकती है. एक आकलन के मुताबिक, अगर टाटा समूह को सायरस मिस्त्री के परिवार का शेयर खरीदना है तो उनको 11.40 लाख करोड़ रुपये चुकाने पड़ सकते है. हालांकि, अभी आकलन और फाइनल फिगर आना बाकि है. वैसे समूह के जून 2020 की कारपोरेट रिपोर्ट में बताया गया है कि टाटा संस की कुल मूल्य, जिसको नेटवर्थ कहते है, वह 780778.2 करोड़ रुपये है. यह कुल मूल्य 14 कंपनियों की शेयर होल्डिंग से आती है, जिसमें मिस्त्री परिवार के 18 फीसदी शेयर है, जिसकी कीमत वर्तमान बाजार में 23 बिलियन डॉलर यानी 16 खरब, 92 अरब, 52 करोड़, 97 लाख, 50 हजार रुपये है, जिसकी अंतिम राशि बाद में सामने आयेगी. वैसे आपको बता दें कि शापूरजी पालनजी समूह कर्ज में है, जिस कारण वह अपना टाटा समूह का शेयर बेचना चाहती है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 28 अक्तूबर तक के लिए रोक लगा दी है.

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टाटा और मिस्त्री काफी करीबी थी, लेकिन समय के साथ दूरी बढ़ता चला गया
टाटा समूह के सर्वेसर्वा रतन टाटा और शापूरजी पालन जी समूह के अगुवा सायरस मिस्त्री के बीच विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुकी है, लेकिन एक वक्त था, जब दोनों काफी करीब हुआ करते थे. एक वक्त टाटा ट्रस्टों में ही उनको जगह दी जाने वाली थी. वहीं, रतन टाटा ने अपनी जगह सायरस मिस्त्री को जगह दे दी और सारे ट्रस्ट में भी उनको उत्तराधिकारी बनाने वाले थे. वैसे चेयरमैन बनाये जाने के करीब एक साल बाद ही सायरस मिस्त्री के साथ विवाद की खबरें आने लगी और वर्ष 2016 में यह मोड़ आ गया कि दोनों के बीच का विवाद कोर्ट तक जा पहुंचा. रतन टाटा और सायरस मिस्त्री के बीच करीब चार साल से कानूनी लड़ाई चल रही है. अक्तूबर 2016 में सायरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया. 2012 में चेयरमैन के पद पर सायरस मिस्त्री को पदस्थापित किया गया था, लेकिन बोर्ड ने खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए उनको हटा दिया. इसके बाद यह मामला एनसीएलटी होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक चला गया. वैसे आपको बता दें कि सायरस मिस्त्री का प रिवार रियर एस्टेट, होम एप्लायंसेज और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कारोबार कर रही है. समूह के ऊपर 1 अरब डॉलर जुटाने की योजना थी. शापूरजी पालनजी एंड कंपनी फरवरी तक 9280 करोड़ रुपये का कर्ज था. पूरे समूह पर मार्च 2019 तक 30 हकजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका था.

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1936 में सायरस मिस्त्री के दादा के साथ जुड़ा था टाटा समूह
टाटा समूह और सायरस मिस्त्री के परिवार का रिश्ता काफी पुराना है. वर्ष 1936 में सायरस मिस्त्री के दादा शापूरजी पालनजी मिस्त्री ने टाटा संस में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की थी. तब से टाटा परिवार और मिस्त्री परिवार के बीच काफी पुरानी दोस्ती बनी रही. कुछ वक्त बीच में इन दोनों परिवार के बीच विवाद भी हुआ था, लेकिन यह शांत हो गया था. वैसे टाटा समूह के वंशजों को सायरस मिस्त्री की बड़ी हिस्सेदारी कभी रास नहीं आयी थी, जिस कारण हो सकता है कि चेयरमैन के पद से उनको हटाकर मिस्त्री परिवार से ही किनारा कर लिया गया और अब राह जुदा होने वाली है. टाटा समूह के पास अभी 30 लिस्टेड और सैकड़ों अनलिस्टेड कंपनियां है, जिसमें से 18.5 फीसदी शेयर्स मिस्त्री परिवार के पास है, जो बड़ी हिस्सेदार है. शापूरजी पालनजी मिस्त्री ने टाटा संस के शेयर 1936 में टाटा संस के फाइनांसयर एफइ दिनशां से खरीददारी की थी. दरअसल, इसका भी इतिहास है. टाटा समूह के ऊपर दिनशां का करीब एक करोड़ रुपये उधार था और वह न चुका पाने की स्थिति में उसे टाटा संस की 12.5 फीसदी शेयर की हिस्सेदारी में बदल दिया था. इसके बाद शापूरजी पालनजी मिस्त्री स्वर्गीय जेआरडी टाटा के भाइयों से कुछ और शेयर खरीद लिये थे और उनका कुल हिस्सेदारी बढ़कर 18.5 फीसदी हो चुकी है.

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जेआरडी टाटा के भाइयों ने बेच दी थी शेयर, जिससे दमदार बना मिस्त्री परिवार
इसके पीछे भी रोचक कहानी है. भारत रत्न स्वर्गीय जेआरडी टाटा के भाइयों ने गुस्से में आकर देश के मशहूर बिल्डिंग बनाने वाली कंपनी, जो मिस्त्री परिवार के थे, उसको बेच दिये थे. टाटा संस के तत्कालीन चेयरमैन नैरोजी सकलतवाला ने शापूरजी पालन जी मिस्त्री के परिवार की बढ़ती हिस्सेदारी को रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किया, जिस कारण मिस्त्री परिवार की हैसियत बढ़ती चली गयी. इसके बाद जब जेआरडी टाटा चेयरमैन बने तो वे काफी नाराज थे और नहीं चाहते थे कि कोई गैर टाटा समूह वाले व्यक्ति की इंट्री हो. इसके बाद मिस्त्री की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण टाटा संस के बोर्ड में भी एक जगह पाने में यह परिवार कामयाब हो गया. जब 1975 में शापूरजी पालन जी मिस्त्री की मौत हो गयी तो सायरस मिस्त्री के पिता पालनजी ने टाटा संस में अपनी जगह ले ली. पालनजी के साथ टाटा परिवार के संबंध काफी बेहतर रहे थे और टाटा संस के कारोबार में उनका किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं था. इसके बाद वर्ष 2005 में जब पालनजी हट गये तब पालनजी मिस्त्री के सबसे छोटे बेटे सायरस मिस्त्री को टाटा संस में इंट्री दी गयी. इसके बाद वर्ष 2011 में सायरस मिस्त्री को टाटा संस का चेयरमैन बना दिया, जिसके बाद सायरस मिस्त्री ने अपना राज चलाना शुरू कर दिया था, जिसके बाद 2016 में रतन टाटा ने अपने विशेषाधिकार का पालन करते हुए उनको निकाल बाहर किया. सायरस मिस्त्री पहले ऐसे व्यक्ति थे, जो टाटा परिवार के सदस्य नहीं होने के बावजूद वे टाटा समूह के चेयरमैन बनाये गये थे. लेकिन उनको हटा दिया गया और फिर एन चंद्रशेखरन को चेयरमैन बनाया गया जो अपना पद संभाल रहे है.

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सायरस मिस्त्री टाटा समूह के शेयर बेचने का बना चुका था योजना
सुप्रीम कोर्ट ने शापुरजी पालन जी समूह को 28 अक्तूबर तक कोई शेयर बेचने पर रोक ल गा दी है. शापुरजी पालन जी समूह विभिन्न फंड के जरिये 11 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनायी है. सूत्रों के मुताबिक, कनाडा की एक चर्चित निवेशक से टाटा संस में अपनी 18.5 फीसदी हिस्सेदारी में से एक हिस्सा बेचने के लिए 3750 करोड़ रुपये में समझौता भी किया गया है. कनाडा के निवेशक की खबर जब रतन टाटा को लगगी तो वे फिर से सुप्रीम कोर्ट गये और इस पर सर्वोच्च अदालत ने रोक लगा दी है.

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