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tata-steel-cii-initiative-टाटा स्टील और सीआइआइ की संयुक्त पहल, युवाओं को रोजगार देने के लिए जमशेदपुर के बर्मामाइंस में खोला गया मॉडल कैरियर सेंटर, युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए लांच किया ऐप, आदित्यपुर की इस लड़की को मिली टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में ऐसी नौकरी

राशिफल

मॉडल कैरियर सेंटर का उदघाटन करते टाटा स्टील के वीपी सीएस चाणक्य चौधरी और अन्य.

जमशेदपुर : टाटा स्टील फाउंडेशन (टीएसएफ) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआइआइ) के साथ मिलकर जमशेदपुर के बर्मामाइंस स्थित टाटा स्टील टेक्निकल इंस्टीच्यूट में मॉडल कैरियर सेंटर की शुरुआत की गयी. टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट कारपोरेट सर्विसेज चाणक्य चौधरी ने इसको समर्पित किया. इस मौके पर टाटा स्टील फाउंडेशन के चीफ सौरभ राय, टाटा स्टील फाउंडेशन के पदाधिकारी हेड कैप्टन अमिताभ, सीआइआइ के पदाधिकारी शंखानिल बासु मौजूद थे. इस मौके पर आयोजित एक समारोह के दरान एचआर पदाधिकारी विजया, शिप्रा समेत अन्य लोग मौजूद थे. कार्यक्रम का संचालन टाटा स्टील इंस्टीच्यूट के छात्र शुभम सिंह और जूही आनंद ने किया. इसका उद्देश्य नौकरी चाहने वालों को सही कैरियर विकल्प चुनने और उन्हें बेहतर प्लेसमेंट प्रदान करने के लिए मार्गदर्शन और परामर्श देना है. यह पहल नौकरी चाहने वालों के आला समूह को एक मंच प्रदान करेगी जो या तो अनजान हैं या अन्य पोर्टलों तक नहीं पहुंच सकते हैं. हालांकि, एमसीसी की सेवाएं सभी नौकरी चाहने वालों के लिए खुली हैं, लेकिन इसका फोकस समाज के सामाजिक और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों के युवाओं तक पहुंचने पर होगा. इस दौरान वहां एक जॉब पेयर भी लगाया गया, जिसमें कई कंपनियों ने हिस्सा लिया. इसके तहत फाइव एस डिजिटल, लोगिस्कीम, एएसएल इंटरप्राइजेज, क्वेस कारपोरेशन, बजाज कैपिटल, टीम लीज, टाटा मोटर्स व एनटीटीएफ, सोडेक्शन, हाइको इंजीनियरिंग, फोर्स मोटर्स, एचडीआर फाइनांस, एमसीसी और होराइजोन ट्रकिंग शामिल थे. इसके तहत दसवीं और बारहवीं तक की परीक्षा पास करने वालों को यहां नौकरियां दी गयी. (नीचे देखे पूरी खबर)

मॉडल कैरियर सेंटर के जरिये नौकरी पाने वाली अंशिका सोनी के पिता सुनील कुमार सोनी और मां सरस्वती सोनी

इस मौके पर एक एप को भी लांच किया गया, जिसके जरिये युवाओं को नौकरी के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा और फिर उसके जरिये उनको सही मुकाम हासिल कराया जायेगा. यह पहल नौकरी चाहने वालों के उच्च स्तर के समूह को एक मंच प्रदान करेगी, जो या तो अनजान हैं या अन्य नौकरी पोर्टलों तक नहीं पहुंच सकते हैं जबकि एमसीसी की सेवाएं सभी नौकरी चाहने वालों के लिए खुली हैं, लेकिन समाज के सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिए के वर्गों के युवाओं तक ध्यान केंद्रित किया जाएगा. दूसरी ओर, एमसीसी कौशल के अंतर को कम करने के लिए और सही प्रतिभा को काम पर रखने के लिए उद्योगों को सहायता भी प्रदान करता है. हालांकि किसी भी अन्य उद्योगों की तरह, महामारी के कारण एमसीसी संचालन प्रभावित हुआ है, लेकिन निरंतर प्रयास और कठोर प्रक्रिया के बाद एमसीसी ने विभिन्न उद्योगों को जोड़ा है. (नीचे देखे पूरी खबर)

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स में नौकरी पाने वाली सोनी की तस्वीर.

विनिर्माण, सेवा, आतिथ्य, खुदरा, ई-कॉमर्स आदि पूर्वी क्षेत्र से आवश्यक कार्यबल को रखने के लिए मुख्य तौर पर संस्था काम कर रही है. पिछले 2 वर्षों में एमसीसी ने 5000 से अधिक उम्मीदवारों को जुटाया है, जिसमें विभिन्न योग्यताएं और कौशल सेट शामिल हैं, जैसे-10 वीं पास और उससे कम, 12 वीं पास, आईटीआई या पॉलिटेक्निक, स्नातक और स्नातकोत्तर (तकनीकी या गैर-तकनीकी) लोगों को जोड़ा गया है और उनको रोजगार उपलब्ध कराया गया है. अब तक, एमसीसी ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, जोमैटो, मानसी, फाइव एस डिजिटल, यस टेक्नो, यूनाइटेड इंफ्राकोर, ऑटोमेक, सोडेक्सो, वाउ मोमोज आदि छोटी बड़ी कंपनियों में 300 उम्मीदवारों को सफलतापूर्वक नौकरी पर रखवाने में सफलता पायी है. आने वाले 3 वर्षों में एमसीसी के पास 30,000 युवाओं तक पहुंचने का लक्ष्य है. भारत के पूर्वी क्षेत्र और पूरे भारत में उद्योगों की कार्यबल आवश्यकताओं की सहायता से रोजगार आधारित गतिविधियों के माध्यम से बेहतर रोजगार के अवसर पैदा करना और आजीविका बढ़ाने के लक्ष्य को हासिल करना ही इसका उद्देश्य है. एक तरह से उद्योग या संगठनों के साथ बेरोजगारों का मिलान करने का एक बड़ा प्लेटफार्म तैयार किया गया है. टाटा स्टील टेक्निकल इंस्टीच्यूट, टाटा स्टील फाउंडेशन और सीआइआइ के संयुक्त प्रयास से एमसीसी के जरिये सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर हरिओम नगर रोड नंबर दो निवासी सीआरपीएफ जवान सुनील कुमार सोनी और मां सरस्वती सोनी की बेटी अंशिका सोनी को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स बंगलुरु में नौकरी मिली. अंशिका सोनी ने आदित्यपुर गम्हरिया वीमेंस आइटीआइ में डिप्लोमा इलेक्ट्रॉनिक्स व कम्यूनिकेशन से की थी. उसके पिता भी उदघाटन के मौके पर थे. दो बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी अंशिका सोनी को काफी मेहनत करना पड़ा. वह चेन्नई में सीएट टायर में काम कर रही थी. उसी दौरान एमसीसी के जरिये उनको ऑफर मिला, जिसके बाद वह तीन बार फ्लाइट से जमशेदपुर आना जाना की और सारी अहर्ताओं को पूरा की, जिसके बाद उनको टाटा टेक्नॉलॉजी में नौकरी मिली. ऐसे ही कई युवाओं को वहां नौकरी देने और कंपनियों को बेहतर मैनपावर दिलाने के लिए यह काम शुरू किया गया है.

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