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tata-steel-csir-mou-कार्बन उत्सर्जन और वेस्ट के बेहतर इस्तेमाल के लिए साथ मिलकर काम करेगी टाटा स्टील और सीएसआइआर, एमओयू पर किया हस्ताक्षर, टाटा स्टील के एमडी ने कहा-

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एमओयू के बाद ग्रुप फोटो. यह तस्वीर फरवरी 2020 को एक वर्कशॉप की है.

जमशेदपुर : जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ भारत की लड़ाई में कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (सीसीयूएस) के महत्व को ध्यान में रखते हुए, बढ़ती ऊर्जा मांगों और पेरिस समझौते के तहत प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने की दिशा में टाटा स्टील और काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) ने सीसीयूएस के क्षेत्र में कार्य करने के लिए हाथ मिलाया है. टाटा स्टील लिमिटेड और काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के बीच हस्ताक्षरित इस रणनीतिक एमओयू के तहत टाटा स्टील और सीएसआइआर की टीमें स्टील उद्योग में सीसीयूएस प्रोद्योगिकियों को विकसित करने और इसके कार्यान्वयन में तेजी लाने का काम करेंगी. ये प्रौद्योगिकियां अन्य कार्बन-प्रबल क्षेत्रों जैसे पावर, सीमेंट और फर्टिलाइजर आदि में एक डीकार्बोनाइज्ड इकोनॉमी के अवस्था परिवर्तन में भी तेजी लाएंगी. यह सहयोग सीओ-2 कैप्चर, इस्तेमाल और भंडारण के प्रमुख क्षेत्रों में काम करेगा. सीएसआइआर के नोडल में रूप में एनइइआरआइ (राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान) के डायरेक्टर डॉ राकेश कुमार, टाटा स्टील के वीपी टेक्नॉलॉजी एंड न्यू मैटेरियल बिजनेस डॉ देवाशीष भट्टाचार्जी इसका सह-नेतृत्व करेंगे.  इसके अलावा, कई अन्य सीएसआइआर प्रयोगशालाएं भी इस क्षेत्र में अपनी विविध क्षमताओं के साथ हिस्सा लेगी. सीएसआइआर ने समानांतर रूप से एनइइआरआइ, नागपुर में सीसीयूएस पर एक राष्ट्रीय सुविधा स्थापित करने के लिए कदम उठाए हैं.  टाटा स्टील ने इस सुविधा को स्थापित करने के लिए एक संस्थापक भागीदार होने का इरादा किया है. यह सुविधा “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस“ (सीओई) की तर्ज पर काम करेगी, जिसमें यह एक पार्टनरशिप मॉडल के माध्यम से सीसीयूएस के क्षेत्र में इच्छुक संस्थानों और स्टेक होल्डरों को अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, कार्यान्वयन, नीति वकालत, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में हिस्सा लेने, निवेश करने और योगदान देने के लिए एक साझा सहयोगी मंच प्रदान करेगी. टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन ने इस एमएओयू पर कहा कि विश्व स्तर पर और विशेष रूप से भारत जैसे विकासशील देश में स्टील उद्योग की सस्टेनेबिलिटी के लिए यह आवश्यक है कि हम एक पैमाने पर सीओ-2 (कार्बन डायऑक्साइड) को कैप्चर करने और इसका उपयोग या अनुक्रमण के लिए एक किफायती समाधान खोजें. आज पर्याप्त प्रौद्योगिकियां मौजूद नहीं हैं. सीएसआइआर और टाटा स्टील के बीच, हमारे पास अनुप्रयोग के अवसर के साथ-साथ काफी बौद्धिक और अनुसंधान शक्ति भी है. टाटा स्टील-सीएसआइआर सहयोग मंच आवश्यक गति प्रदान करेगा और अन्य संस्थानों को भी कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (सीसीयूएस) के समाधान की दिशा में जुड़ने और सहयोग करने में सक्षम बनाएगा. एमडी ने कहा है कि उनको विश्वास है कि यह पहल भारत को सीसीयूएस के क्षेत्र में एक वर्ल्ड लीडर के रूप में विकसित होने में मदद करेगी. पिछले कुछ वर्षों में, टाटा स्टील ने स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करने और अपशिष्ट ताप की रिकवरी टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए कई पहल में निवेश किया है. कंपनी ने जमशेदपुर वर्क्स और फेरो-क्रोम प्लांट में कार्बन कैप्चर एंड यूज़ (सीसीयू) और भारत में अपने सभी लोकेशन पर अक्षय ऊर्जा क्षमता का आकलन करते हुए पहले ही पायलट प्रोजेक्ट स्थापित कर लिया है. अपने सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए टाटा स्टील हाल ही में उद्योग के पहले ग्लोबल मल्टी-स्टेकहोल्डर स्टैंडर्ड और सर्टीफिकेशन इनिशिएटिव ‘रिस्पांसिबलस्टील’ में शामिल हुई है. सीसीयूएस में टाटा स्टील-सीएसआइआर की साझेदारी एक समयोचित पहल है और इस दिशा में पहला कदम है. ये प्रयास वैज्ञानिक और उद्योग समुदाय के बीच सहयोगपूर्ण तरीके से प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले समाधानों और इसकी वाणिज्यिक कार्यान्वयन के लिए उपयोगी सहयोग प्रदान करेंगे. सीएसआइआर और टीएसएल की यह पहल भारत को दृढ़ता के साथ रणनीतिक तौर पर वैश्विक सीसीयूएस के नक्शे में एक लीडर के रूप स्थापित करेगी. सीएसआईआर की स्थापना 1942 में हुई थी. यह एक स्वायत्त सोसायटी है, जिसका अध्यक्ष भारत का प्रधानमंत्री होता है. यह दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान संस्थानों में से एक है. पिछले वर्षों में, इसने अनुसंधान और विकास के माध्यम से कई उद्योगों और स्थानीय राज्य सरकारों को अपना आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ अधिकतम करने में मदद की है. 

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