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रविवार, मई 16, 2021
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tata-steel-employees-bonus-टाटा स्टील के कर्मचारियों के ‘बोनस’ वार्ता की अब होगी शुरुआत, टाटा वर्कर्स यूनियन पर एरियर पर बोनस दिलाने का दबाव, क्या कह रहे है टाटा वर्कर्स यूनियन के ‘टॉप नेता’

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जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों का बोनस वार्ता अब शुरूआत होने वाली है. टाटा स्टील के कर्मचारियों के बोनस का फार्मूला पहले ही तीन साल के लिए तय हो चुका है, लिहाजा, फार्मूला के मुताबिक, समझौता किया जाना है. इसके लिए टाटा स्टील की वार्षिक आमसभा का इंतजार किया जा रहा था. वार्षिक आमसभा गुरुवार को पूरी हो गयी. अब बोनस को लेकर कर्मचारियों की निगाहें टिकी हुई है. कर्मचारियों को अब यूनियन से ज्यादा बोनस दिलाने का दबाव है. तय समझौता के पहले ही टाटा स्टील के कर्मचारियों का वेज रिवीजन समझौता हुआ था. इस दौरान कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोत्तरी हो गयी थी. ऐसे में कर्मचारियों को बढ़े हुए वेतन के मुताबिक ही बोनस का समझौता होगा और बोनस की राशि कर्मचारियों को मिलेगी, लेकिन यूनियन पर एक और दबाव होगा. यूनियन पर दबाव होगा कि किसी भी हाल में कर्मचारियों को एरियर की राशि (बढ़े हुए बेसिक व डीए) पर बोनस दिलाना होगा. यह एक चुनौती का काम होगा क्योंकि टाटा स्टील के साढ़े तेरह हजार कर्मचारियों को फरवरी-मार्च माह में एरियर की राशि का भुगतान हो चुका है. एरियर मद में नये ग्रेड के कर्मचारियों को अधिकतम 3.31 लाख रुपये और पुराने ग्रेड के कर्मचारियों को 6.72 लाख रुपये दिये गये है. टाटा स्टील के कर्मचारियों और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच ग्रेड रिवीजन (वेतन बढ़ोत्तरी) समझौता 23 सितंबर 2019 को हुुआ था. इस समझौता के तहत एक जनवरी 2018 से 31 दिसंबर 2024 तक के लिए नया वेज रिवीजन समझौता लागू किया गया है. 21 माह का एकमुश्त एरियर कर्मचारियों को मिल चुकी है. लेकिन इस एरियर पर अब कर्मचारियों को यूनियन बोनस दिला पायेगी या नहीं, यह देखने वाली बात होगी क्योंकि बेसिक और डीए पर ही बोनस की राशि मिलती है. जब कर्मचारियों का वेतन बैकडेट से बढ़ा है तो उस वक्त के बेसिक व डीए पर क्या यूनियन बोनस दिला पायेगी, यह देखने वाली बात होगी और यह यूनियन के लिए भी बड़ी चुनौती होगी. कर्मचारियों को एक जनवरी 2018 से 21 माह का एरियर मिला है, जिस पर बोनस की राशि मिलना कर्मचारियों का वाजिब हक है.

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एरियर पर मिल चुका है बोनस की राशि :
टाटा स्टील के कर्मचारियों के एरियर पर बोनस की राशि मिल चुकी है. एक जनवरी 2007 से लेकर 31 दिसंबर 2011 के बीच टाटा वर्कर्स यूनियन के तत्कालीन अध्यक्ष रघुनाथ पांडेय के कार्यकाल के वक्त एरियर की राशि पर 8.33 फीसदी बोनस मिला था. लेकिन एक जनवरी 2012 से 2014 के बीच लागू हुए वेतन समझौता के बाद एरियर पर बोनस नहीं मिला था. वैसे यह कहा जाता है कि वर्ष 2012 में बोनस को लेकर पीएन सिंह के कार्यकाल में जब तीन साल का बोनस समझौता हुआ था तो प हली बार मुनाफा पर 2.95 फीसदी के हिसाब से बोनस की राशि दी गयी थी. बोनस के मद में एक मुश्त 182.47 करोड़ रुपये दिये गये थे, जिसके आधार पर सबको बोनस मिला था और आज भी लगभग वहीं स्थिति है कि कर्मचारियों को एक मुश्त राशि बोनस के मद में दे दी जाती है और कर्मचारियों के बीच बोनस की राशि दे दी जाती है.

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क्या है पुराना और नया वेतनमान और कितना हुई है बढ़ोत्तरी :
ग्रेड का नाम-पुराना वेतनमान की राशि-नये वेतनमान की राशि
एनएस ग्रेड न्यूनतम-6750 रुपये-20425 रुपये
एनएस ग्रेड अधिकतम-49500 रुपये-72175 रुपये
एस ग्रेड में न्यूनतम-16080 रुपये-26255 रुपये
एस ग्रेड में अधिकतम-47420 रुपये-78155 रुपये
वी ग्रेड में अधिकतम-45650 रुपये-83720 रुपये
वी ग्रेड में न्यूनतम-25270 रुपये-41260 रुपये

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क्या कहते है टाटा वर्कर्स यूनियन के टॉप नेता :
टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद :
टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद ने कहा कि एजीएम समाप्त हो गयी है. अब बोनस की वार्ता शुरू होगी. इसको लेकर मैनेजमेंट को पत्र लिखा जायेगा. जहां तक हो सकेगा कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलाने की कोशिश की जायेगी. एरियर पर बोनस दिलाने को लेकर अभी कुछ नहीं कह सकते है.
टाटा वर्कर्स यूनियन के महामंत्री सतीश सिंह :
टाटा वर्कर्स यूनियन के महामंत्री सतीश सिंह ने कहा कि एजीएम के बाद अब हम लोग वार्ता शुरू करेंगे. इसको लेकर जरूरी प्रक्रिया अपनायी जायेगी. तीन साल के लिए पहले से ही फार्मूला तय हो चुका है. ज्यादा से ज्यादा बेहतर राशि दिलाने का प्रयास होगा. एरियर की राशि पर बोनस दिलाने को लेकर वार्ता जब होगी, उस मुद्दे पर भी जरूर बातचीत होगी.

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पिछले साल के तय बोनस फार्मूला के मुताबिक, पिछले साल कितना मिला था बोनस जानें :
टाटा स्टील का तय मानक का एरिया-पिछले साल 2018-2019 का आंकड़ा-पिछले साल कितना मिला था बोनस
टाटा स्टील का मुनाफा- 8207 करोड़ रुपये-123.11 करोड़ रुपये
प्रोफिटेबिलिटी (प्रोफिट प्रति टन बिक्री योग्य स्टील)-6323 रुपये प्रति टन-41.50 करोड़ रुपये
उत्पादकता (क्रूड स्टील प्रति टन/प्रति कर्मचारी/प्रति वर्ष)-528 प्रति टन प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष-70 करोड़ रुपये
सेफ्टी-5 करोड़ रुपये

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इस साल इस आधार पर कितना मिल सकता है बोनस (वार्षिक रिपोर्ट व कंपनी सूत्रों के मुताबिक) :
पिछले साल के तय बोनस फार्मूला के मुताबिक, पिछले साल कितना मिला था बोनस जानें :
टाटा स्टील का तय मानक का एरिया-इस साल 2019-2020 का आंकड़ा-इस साल कितना मिल सकता है बोनस
टाटा स्टील का मुनाफा-6743 करोड़ रुपये-101.15 करोड़ रुपये
प्रोफिटेबिलिटी (प्रोफिट प्रति टन बिक्री योग्य स्टील)-5473 रुपये प्रति टन-36.5 करोड़ रुपये
उत्पादकता (क्रूड स्टील प्रति टन/प्रति कर्मचारी/प्रति वर्ष)-803 प्रति टन प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष-90 करोड़ रुपये
सेफ्टी-0000000000

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यह है बोनस का तीन साल (2021 तक) का फार्मूला, जिसके तहत बोनस मिलना है :
प्रोफिट (मुनाफा) पर-कुल मुनाफा का 1.5 फीसदी
प्रोडक्टिविटी-टेबुल तय है कि कितना पर कितना मिलना है (ऊपर चार्ट देखें)
प्रोफिटेबिलिटी-टेबुल तय है कि कितना पर कितना मिलना है (ऊपर चार्ट देखें)
सेफ्टी-कितनी दुर्घटनाएं हुई है, उसके आधार पर यानी 0.40 से नीचे अगर एलटीएफआर रहेगा तो 5 करोड़ रुपये और अगर उससे ज्यादा होगा तो शून्य राशि मिलना है

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किस वर्ष, कितना मिला बोनस :
वर्ष—–कंपनी का मुनाफा—बोनस की राशि—बोनस का प्रतिशत

1991-160.13 करोड़ रुपये-38.6 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1992-214.16 करोड़ रुपये-44.54 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1993-127.12 करोड़ रुपये-50.75 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1994-180.84 करोड़ रुपये-54 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1995-281.12 करोड़ रुपये-66.04 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1996-465.79 करोड़ रुपये-76.46 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1997-469.21 करोड़ रुपये-75.86 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1998-322.08 करोड़ रुपये-72.83 करोड़ रुपये-17.50 फीसदी
1999-282.23 करोड़ रुपये-69.61 करोड़ रुपये-16 फीसदी
2000-422.59 करोड़ रुपये-75.55 करोड़ रुपये-18 फीसदी
2001-553.44 करोड़ रुपये-83 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2002-204.90 करोड़ रुपये-78 करोड़ रुपये-15 फीसदी
2003-1012.31 करोड़ रुपये-102.07 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2004-1746.22 करोड़ रुपये-102 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2005-3474.16 करोड़ रुपये-98.1 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2006-3506.38 करोड़ रुपये-102.01 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2007-4222.15 करोड़ रुपये-107 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2008-4687.03 करोड़ रुपये-113 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2009-5201.74 करोड़ रुपये-139 करोड़ रुपये-18.50 फीसदी
2010-5046.80 करोड़ रुपये-143 करोड़ रुपये-17.50 फीसदी
2011-6217.69 करोड़ रुपये-171 करोड़ रुपये-18.50 फीसदी
2012-6184 करोड़ रुपये-182.47 करोड़ रुपये-17.69 फीसदी
2013-5050.64 करोड़ रुपये-180.50 करोड़ रुपये-16.01 फीसदी
2014-6553.95 करोड़ रुपये-193.34 करोड़ रुपये-15.46 फीसदी
2015-6500 करोड़ रुपये-154.72 करोड़ रुपये-8.53 फीसदी
2016-4900 करोड़ रुपये-130 करोड़ रुपये-8.60 फीसदी
2017-3933.17 करोड़ रुपये-164 करोड़ रुपये-11.27 फीसदी
2018-6682.49 करोड़ रुपये-203.24 करोड़ रुपये-12.54 फीसदी
2019-6323 करोड़ रुपये-239.61 करोड़ रुपये-15.86 फीसदी
2020-6743.80 करोड़ रुपये-227.65 करोड़ रुपये————-(अनुमानित आंकड़ा)

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