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tata-steel-employees-bonus-टाटा स्टील के कर्मचारियों की शुरू होगी वार्ता, यूनियन अध्यक्ष ने मैनेजमेंट को भेजा पत्र, क्या लिखा है पत्र में जानें

राशिफल

टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद का फाइल फोटो.

जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों को लेकर बोनस वार्ता शुरू होगी. इसको लेकर टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद ने टाटा स्टील के एमडी टीवी नरेंद्रन को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने औपचारिक तौर पर बोनस वार्ता शुरू करने की गुजारिश की है. अध्यक्ष आर रवि प्रसाद ने कहा है कि अब फेस्टिव का मौसम शुरू होने वाला है. ऐसे में हम लोग चाहते है कि हर हाल में बोनस की वार्ता शुरू कर तत्काल इसका समझौता कर लिया जाये. दरअसल, टाटा स्टील के कर्मचारियों के बोनस को लेकर तीन साल का फार्मूला पहले से ही तैयार हो चुका है. ऐसे में हर हाल में अब वार्ता कर इसका रास्ता निकाल लिया जाना चाहिए ताकि कर्मचारियों को बोनस समय पर मिल जाये. कोरोना काल में कर्मचारियों के लिए यह राहत की बात होगी. टाटा स्टील के एमडी को अध्यक्ष ने याद दिलाया है कि तीन साल का समझौता हो चुका है और अब इसके समझौता में देर करने से अच्छा है जल्दी से समझौता कर लिया जाये तो बेहतर होगा. इसकी एक कॉपी टाटा स्टील के वीपी एचआरएम सुरेश दत्त त्रिपाठी को भी भेजी गयी है. इसमें आग्रह किया गया है कि बोनस की वार्ता शुरू की जाये. दरअसल, टाटा स्टील में कर्मचारियों के बोनस समझौता होने और वार्ता शुरू होना जमशेदपुर के लिए भी सभी कंपनियों में बोनस वार्ता का रास्ता खोलता है. इसको देखते हुए इस पर सभी की नजर टिकी होती है. यूनियन द्वारा मैनेजमेंट को वार्ता के लिए पत्र भेजना भी इसकी परिपाटी का ही एक हिस्सा है.

पिछले साल और इस साल में बोनस का क्या होगा अंतर :
वैसे पिछले साल यानी वित्तीय वर्ष 2018-2019 के लिए कर्मचारियों को बोनस के मद में 239.61 करोड़ रुपये बोनस की राशि मिली थी, जिसमें से टाटा स्टील के जमशेदपुर वर्क्स और ट्यूब डिवीजन में कार्यरत 13 हजार 675 कर्मचारियों के लिए 131.22 करोड़ रुपये बोनस मिला था. टाटा स्टील के कर्मचारियों के बोनस को लेकर मैनेजमेंट और यूनियन के बीच समझौता हुआ था, जिसमें तीन साल का फार्मूला भी तय हुआ था, जो वर्ष 2021 तक प्रभावी रहेगा. इसके तहत टाटा स्टील के कर्मचारियों को उनके वार्षिक बेसिक व डीए का 15.86 फीसदी बोनस मिला था. हालांकि, बोनस फीसदी पर अब नहीं होता है, बोनस की फिक्स राशि तय हो जाती है, जिसके आधार पर कर्मचारियों के बीच उनके काम और वेतन के हिसाब से बोनस बंट जाता है. पिछले बार कर्मचारियों को बोनस के मद में मुनाफा पर 123.11 करोड़ रुपये, प्रोफिटेबिलिटी पर 41.50 करोड़ रुपये, उत्पादकता पर 70 करोड़ रुपये और सेफ्टी पर 5 करोड़ रुपये दिये गये थे. इसके तहत कुल राशि 239.66 करोड़ रुपये तय हुआ थी. तय फार्मूला के मुताबिक, टाटा स्टील के कर्मचारियों को तीन साल यानी 2021 तक टाटा स्टील के मुनाफा पर 1.5 फीसदी (जिसके हिसाब से पिछले साल 123.11 करोड़ रुपये मिला था), प्रोफिटेबिलिटी यानी प्रोफिट प्रति टन बिक्री योग्य स्टील के मद में टेबुल के हिसाब से (इसके तहत पिछले साल 41.50 करोड़ रुपये बोनस मिला था), प्रोडक्टिविटी (उत्पादकता) (क्रूड स्टील का उत्पादन प्रति टन प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष के तहत) 528 रुपये प्रति टन प्रति कर्मचारी प्रतिवर्ष (इसके हिसाब से पिछले साल 70 करोड़ रुपये मिला था) और सेफ्टी के तहत 5 करोड़ रुपये की राशि मिलनी है, अगर कोई दुर्घटना कंपनी में नहीं होती है या कोई मौत नहीं होती है तो मिला करेगी और अगर कोई दुर्घटना या मौत हो जाती है तो यह शून्य हो जायेगा. इस तय फार्मूला की अगर बात की जाये तो वित्तीय वर्ष 2018-2019 में कंपनी ने 8207 करोड़ रुपये (टाटा स्टील के जमशेदपुर व कलिंगानगर प्लांट का सारी देनदारियों के बाद) की आमदनी की थी, जिसका 1.5 फीसदी के आधार पर 123. 11 करोड़ रुपये मिला था जबकि वित्तीय वर्ष 2019-2020 में कंपनी का मुनाफा घटकर 5611 करोड़ रुपये हो चुका है. पिछले साल प्रोफिटेबिलिटी 6323 रुपये प्रति टन के हिसाब से 41.50 करोड़ रुपये मिला था जबकि उत्पादकता 528 प्रति टन प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष था, जिसके बदले तय फार्मूला के अनुसार 70 करोड़ रुपये मिला था. वहीं, सेफ्टी में भी 5 करोड़ रुपये मिला था क्योंकि किसी तरह का कोई दुर्घटना नहीं घटा था. बीते वित्तीय वर्ष 2019-2020 में मुनाफा घटा है. टाटा स्टील से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस बार टाटा स्टील के जमशेदपुर और कलिंगानगर प्लांट का मिलाकर मुनाफा की राशि 6743 करोड़ रुपये है. इसका 1.5 फीसदी अगर निकाला जाये तो यह आंकड़ा 101.15 करोड़ रुपये होता है. इस साल का प्रोफिटेबिलिटी 5473 रुपये प्रति टन हो चुका है, जिसके हिसाब से इस साल बोनस की राशि प्रोफिटेबिलिटी में 36.5 करोड़ रुपये (तय समझौता के टेबुल के अनुसार) मिलेगा. हालांकि, इस साल उत्पादकता बढ़ी है. उत्पादकता इस साल 803 प्रति टन प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष हो चुकी है, जो पिछले साल 528 प्रति टन प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष था. उत्पादकता के क्षेत्र में इस साल कर्मचारियों को 90 करोड़ रुपये (तय समझौता के टेबुल के मुताबिक) बोनस की राशि में मिलेगी जो पिछले साल 70 करोड़ रुपये था. सेफ्टी के लिहाज से 5 करोड़ रुपये मिलना है लेकिन इसमें इस बार एक भी रुपये नहीं मिलने वाला है क्योंकि इस साल एलटीआइएफआर (लॉस टाइम इंज्यूरी फ्रिक्वेंसी रेट) 0.52 है, ऐसे में कंपनी के मानक के मुताबिक, अगर एलटीआइएफआर 0.40 से अधिक होता है तो रुपये जीरो हो जाता है. इसके अलावा पिछले साल एक मौत भी हो चुकी है. ऐसे में इसका अगर आकलन किया जाये तो इस साल करीब 227.65 करोड़ रुपये (101.15+36.5+90=227.65 करोड़ रुपये) बोनस की राशि के मद में मिल सकती है. पिछली बार बोनस की राशि 239.61 करोड़ रुपये था, जो इस साल घटकर 227.65 करोड़ रुपये रुपये हो सकता है यानी 11.96 करोड़ रुपये कम बोनस के मद में राशि मिल सकती है. वैसे कर्मचारियों की संख्या पिछली बार 27 हजार कर्मचारियों के बीच यह राशि बंटी थी, जिसमें 13 हजार 675 कर्मचारी जमशेदपुर प्लांट में थे जिसकी संख्या घटी है, जिस कारण यह राशि कर्मचारियों के बीच जब बंटेगा तो थोड़ा बढ़ सकता है.

पिछले साल के तय बोनस फार्मूला के मुताबिक, पिछले साल कितना मिला था बोनस जानें :
टाटा स्टील का तय मानक का एरिया-पिछले साल 2018-2019 का आंकड़ा-पिछले साल कितना मिला था बोनस
टाटा स्टील का मुनाफा- 8207 करोड़ रुपये-123.11 करोड़ रुपये
प्रोफिटेबिलिटी (प्रोफिट प्रति टन बिक्री योग्य स्टील)-6323 रुपये प्रति टन-41.50 करोड़ रुपये
उत्पादकता (क्रूड स्टील प्रति टन/प्रति कर्मचारी/प्रति वर्ष)-528 प्रति टन प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष-70 करोड़ रुपये
सेफ्टी-5 करोड़ रुपये

इस साल इस आधार पर कितना मिल सकता है बोनस (वार्षिक रिपोर्ट व कंपनी सूत्रों के मुताबिक) :
पिछले साल के तय बोनस फार्मूला के मुताबिक, पिछले साल कितना मिला था बोनस जानें :
टाटा स्टील का तय मानक का एरिया-इस साल 2019-2020 का आंकड़ा-इस साल कितना मिल सकता है बोनस
टाटा स्टील का मुनाफा-6743 करोड़ रुपये-101.15 करोड़ रुपये
प्रोफिटेबिलिटी (प्रोफिट प्रति टन बिक्री योग्य स्टील)-5473 रुपये प्रति टन-36.5 करोड़ रुपये
उत्पादकता (क्रूड स्टील प्रति टन/प्रति कर्मचारी/प्रति वर्ष)-803 प्रति टन प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष-90 करोड़ रुपये
सेफ्टी-0000000000

यह है बोनस का तीन साल (2021 तक) का फार्मूला, जिसके तहत बोनस मिलना है :
प्रोफिट (मुनाफा) पर-कुल मुनाफा का 1.5 फीसदी
प्रोडक्टिविटी-टेबुल तय है कि कितना पर कितना मिलना है (ऊपर चार्ट देखें)
प्रोफिटेबिलिटी-टेबुल तय है कि कितना पर कितना मिलना है (ऊपर चार्ट देखें)
सेफ्टी-कितनी दुर्घटनाएं हुई है, उसके आधार पर यानी 0.40 से नीचे अगर एलटीएफआर रहेगा तो 5 करोड़ रुपये और अगर उससे ज्यादा होगा तो शून्य राशि मिलना है

किस वर्ष, कितना मिला बोनस :
वर्ष—–कंपनी का मुनाफा—बोनस की राशि—बोनस का प्रतिशत
1991-160.13 करोड़ रुपये-38.6 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1992-214.16 करोड़ रुपये-44.54 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1993-127.12 करोड़ रुपये-50.75 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1994-180.84 करोड़ रुपये-54 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1995-281.12 करोड़ रुपये-66.04 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1996-465.79 करोड़ रुपये-76.46 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1997-469.21 करोड़ रुपये-75.86 करोड़ रुपये-20 फीसदी
1998-322.08 करोड़ रुपये-72.83 करोड़ रुपये-17.50 फीसदी
1999-282.23 करोड़ रुपये-69.61 करोड़ रुपये-16 फीसदी
2000-422.59 करोड़ रुपये-75.55 करोड़ रुपये-18 फीसदी
2001-553.44 करोड़ रुपये-83 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2002-204.90 करोड़ रुपये-78 करोड़ रुपये-15 फीसदी
2003-1012.31 करोड़ रुपये-102.07 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2004-1746.22 करोड़ रुपये-102 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2005-3474.16 करोड़ रुपये-98.1 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2006-3506.38 करोड़ रुपये-102.01 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2007-4222.15 करोड़ रुपये-107 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2008-4687.03 करोड़ रुपये-113 करोड़ रुपये-20 फीसदी
2009-5201.74 करोड़ रुपये-139 करोड़ रुपये-18.50 फीसदी
2010-5046.80 करोड़ रुपये-143 करोड़ रुपये-17.50 फीसदी
2011-6217.69 करोड़ रुपये-171 करोड़ रुपये-18.50 फीसदी
2012-6184 करोड़ रुपये-182.47 करोड़ रुपये-17.69 फीसदी
2013-5050.64 करोड़ रुपये-180.50 करोड़ रुपये-16.01 फीसदी
2014-6553.95 करोड़ रुपये-193.34 करोड़ रुपये-15.46 फीसदी
2015-6500 करोड़ रुपये-154.72 करोड़ रुपये-8.53 फीसदी
2016-4900 करोड़ रुपये-130 करोड़ रुपये-8.60 फीसदी
2017-3933.17 करोड़ रुपये-164 करोड़ रुपये-11.27 फीसदी
2018-6682.49 करोड़ रुपये-203.24 करोड़ रुपये-12.54 फीसदी
2019-6323 करोड़ रुपये-239.61 करोड़ रुपये-15.86 फीसदी
2020-6743.80 करोड़ रुपये-227.65 करोड़ रुपये————-(अनुमानित आंकड़ा)

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