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tata-steel-mines-वर्ष 2026 तक 45 मिलियन टन आयरन ओर का उत्पादन करेगा टाटा स्टील के नोवामुंडी समेत चार माइंस, देश में नजीर पेश कर चुकी नोवामुंडी माइंस में महिलाओं के लिए पूरी एक शिफ्ट चलाने की तैयारी, लैंगिक समानता का नायाब तरीका

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नोवामुंडी, पश्चिम सिंहभूम के माइंस का विहंगम दृश्य.

(नोवामुंडी, पश्चिमी सिंहभूम से लौटकर रोहित कुमार की रिपोर्ट) जमशेदपुर : टाटा स्टील अपने सारे माइंस का जरूरत के हिसाब से विस्तार करने जा रही है. इस कड़ी में टाटा स्टील अपने पश्चिम सिंहभूम जिले के नोवामुंडी स्थित माइंस के साथ-साथ सारे चार माइंस का विस्तार करने जा रही है. कंपनी से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2026 तक 45 मिलियन टन ( एमटी) प्रति वर्ष आयरन ओर के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. सिर्फ नोवामुंडी माइंस से ही 19 एमटी उत्पादन किया जाना है. यह जानकारी ओएमक्यू के जीएम अतुल भटनागर ने दी. उन्होने बताया कि टाटा स्टील फिलहाल 30 एमटी आयरन ओर का उत्पादन हर साल किया जाता है, जिसमें नोवामुंडी माइंस से ही 9 एमटी का उत्पादन होता है. जोड़ा, काटामाटी और खोंदबोंद 21 मिलियन टन प्रति वर्ष का उत्पादन किया जाता है. टाटा स्टील के नोवामुंडी माइंस वर्ष 1925 में शुरु किया गया था. जो अब 100 साल पूरे करने जा रहा है. फिलहाल माइंस से जो उत्पादन हो रहा है, वह टाटा स्टील के जमशेदपुर और कलिंगानगर के प्लांट की जरूरतों के लिए काफी है. उन्होने बताया कि इसके उत्पादन बढ़ाने के लिए मैनपावर भी बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे रोजगार के अवसर सृजित होंगे. फिलहाल नोवामुंडी माइंस में 1000 स्थायी कर्मचारी और 2000 ठेकाकर्मी है, जो अपनी सेवा दे रहे है. उत्पादन बढ़ाने के लिए मैन पावर में 15 प्रतिशत की वृद्धि की जरुरत होगी. वहीं ओर, माइंस एंड क्वैरीज (ओएमक्यू) डिवीजन में फिलहाल 2000 स्थायी कर्मचारी और 4000 ठेकाकर्मी है. इसमें भी लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी. लगातार तीसरे साल भी टाटा स्टील के नोवामुंडी माइंस को फाइव स्टार रेटिंग प्राप्त की है. नोवामुंडी माइंस को फाइव स्टार रेटिंग इस वजह से दी गई है कि वह अपने माइंस का संचालन शून्य हानि, संसाधन की दक्षता और इकोलॉजिकल फुटप्रिंट में कमी और समुदाय व श्रम बल के कल्याणकारी सिद्धांतों में गहराई से करती है. सस्टेनबिलिटी इसके संचालन की आधारशिला और इसी सस्टेनबिलिटी के साथ नोवामुंडी आयरन ओर माइंस में ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने की दिशा में काम करता है. नोवामुंडी माइंस का इलाका 1170 हेक्टेयर का है पर अब तक 750 हेक्टेयर में खुदाई की जा चुकी है. (नीचे देखे पूरी खबर)

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इन महिलाओं के फौलादी इरादों ने बदली माइंस की तस्वीर.

महिलाओं को दिया जा रहा बढ़ावा, एक्सकैवेटर, शॉवेल और डंपर चलाने के लिए महिलाओं को दी जा रही ट्रेनिंग
टाटा स्टील की ओर से महिलाओं को सशक्त करने के लिए नोवामुंडी प्लांट में तेजस्विनी 2.0 के तहत 23 महिलाओं के प्रथम बैच को शमिल किया गया है. इस महिलाओं को 1 फरवरी से बैच में शामिल कर हेवी अर्थ मूविंग मशीन जैसे एक्सकैवेटर, शॉवेल, डंपर आदि चलाना सिखाया जा रहा है. ये महिलाएं पहले कुछ भी नहीं चलाना जानती थी. इनमें से एक स्थानीय गांव की मुखिया रेवती पूर्ती भी शामिल है. रेवती पूर्ती महिलाओं के लिए एक जीता जागता उदाहरण है. रेवती दो बच्चों की मां भी है और अपनी ट्रेनिंग को भी पूरा कर रही है. रेवती का कहना है कि अगर वह यह काम करती है तो वह अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा दे सकती है. वर्ष 2025 तक कार्यबल में महिलाओं की कुल हिस्सेदारी 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है. आने वाले छह माह में पूरी एक शिफ्ट में सारी मशीन और उपकरण और उत्पादन का काम महिलाएं ही चलाएंगी. इसके लिए भी तैयारी पूरी की जा रही है. टाटा स्टील ने अपने रॉ मैटेरियल डिवीजन में “लैंगिक विविधता“ में सुधार के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. 1 सितंबर 2019 को “वीमेन एट माइन्स“ पहल लागू करने वाला ओएमक्यू डिवीजन भारत का पहला माइनिंग डिवीजन बन गया, जहां तीनों शिफ्टों में महिला कर्मचारियों को तैनात किया गया. इस पहल में हर वर्ग की महिला कर्मचारी जैसे अधिकारी, कर्मचारी और ठेका कर्मचारी शामिल थे. इस पहल की भारत सरकार ने भी सराहना की और यह पूरे टाटा स्टील परिवार के लिए बड़े गर्व की बात है. महिला कर्मचारियों को सशक्त बनाने की इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए ओएमक्यू डिवीजन द्वारा एक और बड़ा कदम उठाया गया है. ओएमक्यू डिवीजन में हैवी अर्थ मूविंग मशीन जैसे एक्सकैवेटर, शॉवेल, डम्पर आदि अब महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित की जा रही हैं. 1 फरवरी 2021 से “तेजस्विनी 2.0“ पहल के तहत 23 महिलाओं के प्रथम बैच को नोवामुंडी में शामिल किया गया था. बाद में इस पहल को वेस्ट बोकारो डिवीजन में भी शुरू की गई. टाटा स्टील ने 2025 तक कुल कार्यबल में महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है. खनन जैसे कठिन कार्यस्थल में इस तरह के कदम से कंपनी के इस विश्वास को बल मिलता है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में योगदान देने में पूरी तरह सक्षम हैं. टाटा स्टील हमेशा महिलाओं को अधिक अवसर प्रदान करने का प्रयास करता है. इसी क्रम में झारखंड सरकार से रात 10 बजे तक ’बी’ शिफ्ट में महिलाओं को तैनात करने के आदेश जारी करने का अनुरोध किया गया, जिसे स्वीकार कर लिया गया. इस आदेश का पालन करते हुए टाटा स्टील ने जमशेदपुर के कोक प्लांट डिपार्टमेंट और इलेक्ट्रिकल रिपेयर शॉप में फरवरी 2019 से “ए“ और “बी“ शिफ्ट में महिला कर्मचारियों को तैनात किया. महिला कर्मियों को कार्यस्थल पर सभी पूर्व निर्धारित शर्तों के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध करायी गयी हैं. स्पेयर मैन्युफैक्चरिंग डिपार्टमेंट ने फरवरी 2020 से “ए“ और “बी“ शिफ्ट में महिला कर्मचारियें को भी नियुक्त किया है. टाटा स्टील जमशेदपुर में लगभग 90 महिला कर्मचारी वर्तमान में “बी“ शिफ्ट में काम कर रही हैं. अन्य विभागों में भी महिला कर्मचारियें के लिए रोजगार की संभावना लगातार तलाशी जा रही है. 6 जनवरी 2021 से कलिंगानगर कोक प्लांट इलेक्ट्रिक मेंटेनेंस डिपार्टमेंट में भी “बी“ शिफ्ट में महिला कर्मचारियों को तैनात कर कार्य शुरू कर दिया गया है. इस पहल को “मैं हूं ना“ नाम दिया गया है.

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