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tata-workers-union-committee-meeting-टाटा वर्कर्स यूनियन का कमेटी मीटिंग बुधवार को, प्रशासन की मिली मंजूरी, नौ माह बाद हो रहा मीटिंग, कमेटी मेंबरों को सवाल उठाने की इजाजत नहीं, मीटिंग बुलाने पर ही उठने लगे सवाल

राशिफल

जमशेदपुर : टाटा स्टील की अधीकृत यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन का कमेटी मीटिंग बुधवार यानी 16 दिसंबर को आहूत की गयी है. इस कमेटी मीटिंग को कोरोना काल के बाद आयोजित की जा रही है. नियमत: हर दो माह में कमेटी मीटिंग होना चाहिए, लेकिन इस बार करीब नौ माह से अधिक का वक्त हो चुका है, लेकिन इस बार के कमेटी मीटिंग में किसी को दूसरा कोई सवाल उठाने की इजाजत नहीं दी गयी है. 8 दिसंबर को इससे पहले कमेटी मीटिंग आहूत की गयी थी, लेकिन इस पर रोक लगा दी गयी थी. लेकिन अभी जिला प्रशासन और प्रबंधन ने इसको मंजूरी दे दी है और सारे कमेटी मेंबरों को जेनरल शिफ्ट, ए और बी शिफ्ट में रिलीज कर दिया गया है. इस कमेटी मीटिंग में पहले श्रद्धांजलि, फिर पिछले मीटिंग के मिनट्स को मंजूरी देना होगा. इसके बाद अक्तूबर 2019 से लेकर अक्तूबर 2020 तक का एकाउंट को पारित कराया जायेगा. करीब एक साल के एकाउंट को पारित कराया जायेगा. चुनावी माहौल के बीच कमेटी मीटिंग होने वाली है, जिस कारण इस कमेटी मीटिंग को लेकर माहौल गर्माया हुआ है. यूनियन के अध्यक्ष आर रवि प्रसाद ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी है जबकि महामंत्री सतीश सिंह और पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट की चुनावी टीम अलग बन चुकी है जबकि डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय, उपाध्यक्ष शहनवाज आलम, पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह समेत अन्य लोगों की अलग टीम बन चुकी है. ऐसे में टकराव संभव है. वैसे 8 दिसंबर की आहूत बैठक में सवाल उठाने के लिए दो कमेटी मेंबर संजीव तिवारी (आइ ब्लास्ट फर्नेस) और कोल्ड रोलिंग मिल (सीआरएम) के कमेटी मेंबर अशोक गुप्ता ने अपना सवाल लिखा था. इन लोगों ने क्वार्टर एलाटमेंट के सिस्टम और एलटीसी के मुद्दे को उठाने के लिए इजाजत मांगी है ताकि इन समस्याओं का निराकरण कराया जा सके. इस दौरान सत्ता पर काबिज लोगों को भी असहज होना पड़ सकता है, जिस कारण कमेटी मेंबरों की यह कमेटी मीटिंग महत्वपूर्ण माना जा रहा है. नौ माह बाद मीटिंग हो रही है, लेकिन इसमें भी यह बहाना बनाया जा रहा है कि पिछले कमेटी मीटिंग में कमेटी मेंबरों को सवाल उठाने के लिए एनी अदर मैटर (अन्य मामले) को उठाने की इजाजत थी, इस कारण दूसरी मीटिंग में सवाल पूछने की इजाजत नहीं दी जा सकती है, लेकिन यह मीटिंग हर दो माह में होती है जबकि अभी नौ माह में हो रही है. हर दो माह में एकाउंट पारित कराना होता है, लेकिन एक साथ एक साल का एकाउंट पारित कराया जा रहा है, ऐसे में कैसा संवैधानिक मीटिंग और उसमें भी कमेटी मेंबरों को सवाल उठाने की इजाजत नहीं देना, यूनियन के नियत और नीति पर ही सवाल उठा रहा है.

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