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tata-workers-union-टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबरों ने खोला यूनियन पदाधिकारियों की पोल, राजनीति को लेकर अध्यक्ष व उनके साथियों का किया कटाक्ष

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जमशेदपुर : टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबरों ने ने यूनियन के कुछेक पदाधिकारियों की पोल खोली है. राजनीति को लेकर उन्होंने अध्यक्ष व उनके साथियों पर कटाक्ष किया है. उन्होंने एक प्रेस बयान जारी कर कहा है कि टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मेंबरों द्वारा विगत 2 दिनों से यूनियन में चल रहे कोरोना वायरस को लेकर कार्यालय बंद करने या न करने को लेकर जो खींचतान चल रहा है, उसको लेकर विचार विमर्श किया गया. आज जब वायरस के प्रकोप से लोगों को बचाने के लिए आम आदमी से लेकर कॉरपोरेट जगत तक चिंतित है और वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता दी जा रही है. वैसे में यूनियन के पदाधिकारियों द्वारा इसके कार्यालय को कुछ दिनों के लिए ऐहतियातन बंद करके वर्क फ्रॉम होम का विरोध करना निश्चित तौर पर उनके अमानवीय संवेदना का परिचायक है. यूनियन के वे पदाधिकारी जो एचएसएम विभाग से आते है, जिनका कार्यालय मुश्किल से ही खुलता है या वे यदा-कदा ही उसको सुशोभित करते हैं और एलडी-2 से आने वाले पदाधिकारी यूनियन के गेट तक ही उनका सरोकार रहता है, वैसे लोगों का यह बयान की “अगर यूनियन बंद हो जाएगा तो कर्मचारियों का काम कैसे होगा” बहुत ही हास्यास्पद है. उन्हें बताना चाहिए कि जब वे लोग मई 18 को उत्तराखंड और दिसंबर 19 को गोवा की मस्ती में समूचे यूनियन को पदाधिकारी विहीन करके चले गए थे, उन 15 से 20 दिनों में कर्मचारियों का काम किनके मार्फत हो रहा था. पर्सनल ईगो को संतुष्ट करने और एक दूसरे को नीचा दिखाने के चक्कर में आज यूनियन बर्बादी के कगार पर बढ़ रहा है और इन समाचारों के प्रकाशन के बाद तो कर्मचारी भी इसके भविष्य को लेकर गंभीर चिंतित हो गए हैं. कमेटी मेंबरों ने कहा है कि टाटा वर्कर्स यूनियन एक बहुत ही प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थान है और यहां पर कंपनी कर्मचारी के अलावा समाज से सरोकार रखने वाले बहुत सारे लोगों और एजेंसियों का लगातार आना जाना बना रहता है। क्योंकि यूनियन में संभावित मरीज की पहचान करने की कोई विधि अपनाई ही नहीं गई है, ऐसे में वहां भारी संख्या में लोगों का आना जाना नही रोक पाना और संक्रमण फैलने के संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. बैठक में सरोज सिंह, संतोष, अभिनंदन, मनोज, ओपी, अन्य लोग कमेटी मेंबर मौजूद थे.

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