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सोमवार, मई 17, 2021
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tata-workers-union-टाटा वर्कर्स यूनियन चुनाव में 45 आपत्तियों में से 30 निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव, जानें कौन सीट बदली गयी, अरविंद पांडेय गुट बोला-संविधान विरोधी काम कर रही चुनाव समिति, सक्षम प्राधिकार के पास जायेगा मामला, चुनाव पदाधिकारी संतोष बोले-अनर्गल आरोप-देखे-video

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टाटा वर्कर्स यूनियन के निर्वाचन क्षेत्रों की सूची को देखते सारे लोग.

जमशेदपुर : टाटा वर्कर्स यूनियन के चुनाव में चुनाव पदाधिकारी संतोष सिंह और चुनाव समिति के सारे सदस्यों की हुई बैठकों के बाद कुल 45 आपत्तियों में से 30 सीटों की शिकायत को उचित मानते हुए सुधार कर दिया गया. अब नया और फाइनल सूची निर्वाचन क्षेत्रों की जारी कर दी गयी है. यूनियन संविधान की धारा 10 के अनुसार कुल कर्मचारी की संख्या को कमेटी मेंबर की कुल सीट से भाग दिया जाता है. उसके बाद 30 प्रतिशत प्लस-माइनस के हिसाब से सीट तय किया जाता है. इस फॉर्मूला के अनुसार वर्तमान में 12,158 कर्मचारी है. इसमें 214 से भाग देने पर 57 होता है. मतलब एक सीट को तय करने के लिए 57 कर्मचारी अथवा वोटर को होना जरूरी है. कई विभाग में फॉर्मूला के अनुसार कर्मचारी की संख्या कम अधिक होती है. इसको लेकर 30 प्रतिशत प्लस-माइनस का प्रावधान रखा गया है. इसके अनुसार इस यह संख्या कम से कम 40 व ज्यादा से ज्यादा 74 कर्मचारी होना चाहिए.

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रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ यानी चुनाव पदाधिकारी) संतोष सिंह ने बताया कि संविधान के मुताबिक ही, सीटों का निर्धारण किया गया है. हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि 45 आपत्ति आयी थी 30 सीटों की शिकायत उचित माना गया, जिसमें सुधार कर दिया गया. अरविंद व उनकी टीम द्वारा पक्षपात करने के आरोप को उन्हें सिरे से खारिज करते हुए बेबुनियाद बताया. उन्होंने बताया कि आगामी चुनाव के लिए निर्वाचन क्षेत्र का प्रकाशन बुधवार को हुआ था. तकनीकी कारणों से थोड़ी विलंब हुई, उसका निदान करने के लिए गुरुवार को हम लोगों ने निष्पादन के लिए समय सीमा कि अवधि को बढ़ाया और कुल 45 लोगों ने आपत्ति जताई जिसमें बहुत सारे लोगों ने लोगो ने निर्वाचन क्षेत्र सही है इसे ना बदला जाए, जिसमें सारे सुझाव पर काफी विचार करके सब लोगों का समस्या को दूर किया गया. उन्होंने बताया कि मुख्य रूप से कमेटी मेंबर बिनोद पांडेय (पूर्व अध्यक्ष रघुनाथ पांडेय के भाई), डब्ल्यूआरएम के आरके मिश्रा, पीएसडी विभाग के मनोज कुमार, राकेश कुमार सिंह, ट्यूब डिवीजन के रंजीत झा और एसएन सिंह के सीटों को ठीक किया गया है. ये वैसे लोग है, जो लगातार यूनियन में सक्रिय रहे है. ज्यादातर विपक्ष के लोगों की बातों को ही सुना गया है. इस कारण यह आरोप बेबुनियाद है.

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टाटा वर्कर्स यूनियन में संंवाददाता सम्मेलन करते नितेश राज लाइट ब्लू शर्ट में, उनके बगल में अरुण सिंह, आसमानी रंग का बंडी पहने अरविंद पांडेय और सबसे अंतिम में आरसी झा.

दूसरी ओर, भारी संख्या में आपत्ति आने को लेकर अरविंद पांडेय व उनकी टीम ने विरोध किया. अरविंद पांडेय, अरुण सिंह, नितेश राज, आरसी झा ने यूनियन परिसर में प्रेस वार्ता कर चुनाव पदाधिकारी संतोष कुमार सिंह पर सीधा आरोप लगाया कि उन्होंने सीट बनाने में पक्षपात किया है. यूनियन के संविधान में तय नियम व फॉर्मूला को दरकिनार कर सीटों का निर्धारण किया गया है. अरविंद पांडेय ने कहा कि आपत्ति दर्ज करने वाले सदस्य अगर चाहेंगे, तो उनकी टीम शिकायत को उचित फोरम तक लेकर जायेंगे. सत्ता पक्ष के डिप्टी प्रेसिडेंट और वर्तमान में अध्यक्ष के दावेदार अरविंद पांडेय के अनुसार कई ऐसे विभाग हैं जहां 91 कर्मचारी में एक सीट और 38 कर्मचारी में एक सीट बनाया गया है जो कि संविधान का उल्लंघन है. निर्वाचन संख्या 44 (टीएमएच) में 39 पर एक सीट तय कर दिया गया है. वहीं फायर एंड सेफ्टी विभाग में जहां दो सीट होता था, उसे अलग अलग कर एक एक सीट कर दिया गया है. निर्वाचन संख्या 91 सेफ्टी 38 कर्मचारी में एक सीट तय किया गया. वहीं फायर ब्रिगेड में 91 सदस्य पर एक सीट तय किया गया है. इसके अलावे वैसे भी आपत्ति आये जिसमें यह बताया गया है कि सीट कट कर दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में चला गया है.

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निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम सूची देखते संभावित उम्मीदवार.

कई लोगों को तय समय पर नहीं आने पर लौटाया गया
बुधवार को निर्वाचन क्षेत्र जब घोषित की गयी थी, तब निर्धारित समय से करीब तीन घंटे के बाद सूची को जारी किया गया था. तय समय के मुताबिक, उम्मीदवार 21 जनवरी की सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक अपना आपत्ति दर्ज करा सकते थे. इसके बाद हंगामा होने लगा कि पहले तीन घंटे देर से निर्वाचन क्षेत्र की सूची जारी हुई तो तीन घंटे अतिरिक्त दिया जाये. काफी हंगामा के बाद एक घंटा का समय बढ़ाया गया. इसके बाद करीब 45 निर्वाचन क्षेत्रों पर आपत्ति दर्ज करायी गयी. उसके बाद भी आपत्ति लेकर कुछ लोग पहुंचे, लेकिन तय समय सीमा और दिया गया अतिरिक्त एक घंटा भी बीत जाने के कारण उनकी आपत्ति अस्वीकार की गयी.

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