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tata-workers-union-hearing-टाटा वर्कर्स यूनियन चुनाव को लेकर अध्यक्ष-महामंत्री ने ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार को सौंपे दस्तावेज, विपक्षी खेमे ने भी दे दिये चुनाव में गलत होने के सबूत, ”अदृश्य शक्तियों” को लेकर चर्चा तेज, फैसला कर सकता है प्रभावित, नतीजा शुक्रवार को आना संभव

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श्रम विभाग का रांची स्थित दफ्तर, फाइल तस्वीर.

जमशेदपुर : टाटा स्टील की अधीकृत यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन चुनाव की वैधता को लेकर ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार श्याम सुंदर पाठक को यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु और महामंत्री सतीश सिंह ने गुरुवार को चुनाव से जुड़े सारे दस्तावेज सौंप दिये. तीन दिनों तक चली सुनवाई के बाद अब रजिस्ट्रार यह तय करेंगे कि चुनाव प्रक्रिया वैध है या अवैध. हालांकि सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ताओं की ओर से यह प्रमाण दिया गया है कि उनकी आपत्तियों की समाधान किए बगैर ही चुनाव कराया गया है. वहीं यूनियन की ओर से चुनाव को संवैधानिक बताते हुए कागजात भी सौंपा गया है. वैसे दोनों पक्षों का अपना-अपना दावा है. वहीं अदृश्य शक्तियों के सक्रिय होने से विरोधी खेमा सकते में है. विरोधी खेमा का कहना है कि यह वही अदृश्य शक्तियां है जो पर्याप्त समय होने के बावजूद आनन-फानन में चुनाव करवा दी थी और अब उस अवैध चुनाव प्रक्रिया को वैध करार देने के लिए ताकत लगा रही हैं. हालांकि इस संभावना को देख विरोधी खेमा की ओर से पहले ही हाईकोर्ट में मामले की शिकायत की जा चुकी है. ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार ने बुधवार को अध्यक्ष और महामंत्री को तलब कर पक्ष रखने को कहा था. ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार ने सुनवाई के दौरान अध्यक्ष से कुछ कागजात और दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था. यूनियन अध्यक्ष की ओर से गुरुवार को मांगे गये कागजात और दस्तावेज उपलब्ध करा दिया गया है और रजिस्ट्रार को तय करना है कि कौन सही और कौन गलत है. मालूम हो कि यूनियन के पूर्व सहायक सचिव जे आदिनारायण, अनिल कुमार सिंह और सुनील कुमार सिंह ने चुनाव की निष्पक्षता को लेकर ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार से शिकायत दर्ज कराई थी. उप श्रमायुक्त राजेश प्रसाद ने शिकायतों की जांच कर ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार को सौंप दिया था. ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार ने मंगलवार को शिकायतकर्ताओं को और गुरुवार को अध्यक्ष तथा महामंत्री को पक्ष रखने के लिए तलब किया था. हालांकि चुनाव के दौरान रजिस्ट्रार ने खुद यूनियन अध्यक्ष व चुनाव पदाधिकारी को निर्देश दिया था कि आपत्तियों का निपटारा कर ही चुनाव कराएं. उस दौरान चुनाव पदाधिकारी ने डीएलसी को जवाब सौंपते हुए यह कहा था कि चुनाव रोकने का अधिकार उनके पास नहीं है. वहीं चुनाव पदाधिकारी के जवाब पर डीएलसी ने शिकायतकर्ताओं से उनका पक्ष लिया जिसमें उन्होंने बिना आपत्तियों के निष्पादन के चुनाव कराने की अपनी शिकायत को दोहराया व चुनाव पदाधिकारी के जवाब पर असंतोष जताया था. इस वजह से चुनाव के करीब छह माह बीत जाने के बाद भी अब तक यूनियन रजिस्टर बी में दर्ज नहीं हो सका है. इससे मजदूर हित के कई फैसले भी अप्रत्यक्ष रुप से प्रभावित हो रही हैं.

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