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tata-workers-union-shame-टाटा वर्कर्स यूनियन के 100 साल के इतिहास में सबसे शर्मनाक दिन, भ्रष्टाचार के छींटे यूनियन अध्यक्ष पर पड़े, कमेटी मीटिंग के बाद शुरू हुआ ”करप्सन फ्री यूनियन” बनाने का अभियान, अध्यक्ष के करीबी पदाधिकारी निशाने पर

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टाटा वर्कर्स यूनियन के बाहर करप्सन फ्री यूनियन बनाने का अभियान शुरू किया गया.

जमशेदपुर : टाटा वर्कर्स यूनियन सौ साल की हो गयी. अपनी एथिक्स के लिए दुनिया भर में मशहूर टाटा स्टील और टाटा समूह की ही अधीकृत यूनियन टाटा वर्कर्स यूनियन में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी उठ गया. अब तक के सौ साल के इतिहास में पहली बार यूनियन के किसी भी अध्यक्ष पर खुलेआम तौर पर भ्रष्टाचार की आवाज नहीं उठी थी. लेकिन बुधवार को टाटा वर्कर्स यूनियन के कमेटी मीटिंग के बाद कमेटी मेंबरों ने यह मुद्दा उठाया और कमेटी मीटिंग के बाद से ही भ्रष्टाचारमुक्त यूनियन (करप्सन फ्री यूनियन) बनाने का अभियान शुरू कर दिया गया. अध्यक्ष आर रवि प्रसाद के ही विभाग एलडी 2 के कमेटी मेंबर सुभाष, सीआरएम के कमेटी मेंबर अशोक गुप्ता जैसे कमेटी मेंबरों ने इस मुद्दे को उठाया. इन लोगों ने बताया कि आर रवि प्रसाद का कार्यकाल काला अध्याय के रुप में जाना जायेगा, जब भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा है. इनके कार्यकाल में यूनियन के एक विशेष पदाधिकारी पर बराबर भ्रष्टाचार का आरोप समाचार पत्रों में आते रहा और अध्यक्ष का पूर्ण संरक्षण प्राप्त रहा. इसको लेकर कमेटी मेंबर बदनाम ह ुए और इस कारण भ्रष्टाचार मुक्त यूनियन बनाने का अभियान शुरू करने जा रहा है, जो एलडी 2 से ही शुरु होगा, जिसमें मजदूरों से अपील की जायेगी कि स्वच्छ छवि के लोगों को चुनाव में जीताये. इस मुहिम में एलडी 2 के कमेटी मेंबर अब्दुल रफीक, सुनील कुमार, एके गुप्ता, संजीव तिवारी, जोगिंदर सिंह जोगी और लक्ष्मण सिंह जैसे कमेटी मेंबर शामिल है. इन लोगों ने बकायदा यूनियन में बैनर लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया.

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