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telco-workers-union-सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पारित आदेश को लागू करे प्रशासन, तत्काल कराये टेल्को वर्कर्स यूनियन, हर्षवर्धन और आकाश डीसी के पास पहुंचे

राशिफल

जमशेदपुर : टेल्को वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष आकाश दूबे ने जिला प्रशासन से सुप्रीम कोर्ट औरर हाईकोर्ट के पारित आदेश को लागू करते हुए जिला प्रशासन से यूनियन का चुनाव जल्द कराने की मांग की है. इस संबंध में उन्होंने जिले की उपायुक्त को पत्र लिखा है. उनका कहना है कि वे यूनियन के निवार्चित उपाध्यक्ष हैं. उनका नाम 21 जनवरी 2016 के रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन झारखंड के आदेश के माध्यम से फॉर्म बी में दर्ज हुआ था. हालांकि कालांतर में यूनियन में आंतरिक विवाद उत्पन्न हो गया. इस कारण दोनों गुटों ने एक दूसरे के विरोध में कारवाई की. इस करवाई में एक गुट ने उन्हें भी यूनियन से बहार निकाल दिया. उसके बाद दूसरे गुट द्वारा कुछ और लोगों को यूनियन से निकाल दिया गया.
उस बीच दूसरे गुट के आवेदन को रजिस्ट्रार ने सही बताते हुए उस पर की गई कारवाई को सही माना और पहले गुट के दो नेताओं को यूनियन से बाहर करने का फैसला सुनाया था. साथ ही दूसरे गुट के फैसले को नियम विरोधी बताते हुए अस्वीकार्य कर दिया था. इस बीच पहले गुट ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसपर हाई कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन को यूनियन के आंतरिक विवाद में किसी तरह का कोई फैसला लेने का कोई अधिकार नहीं है. अपने उसी आदेश में हाई कोर्ट ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत परिस्थिति के अनुसार उपायुक्त जमशेदपुर को विशेष पदाधिकारी नियुक्त कर उनकी देख-रेख में आठ सप्ताह के भीतर यूनियन का चुनाव कराने का फैसला सुनाया. साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी फैसला सुनाया कि यूनियन के ढांचे में किसी भी हालात में कोई बदलाव तब तक नहीं होगा, जब तक यूनियन के चुनाव के उपरांत रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन द्वारा चुने हुए पदाधिकारियों का नाम फॉर्म बी में नही दर्ज कर लिया जाता. आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि जब तक चुनाव नहीं हो जाता 21 जनवरी 2016 के आदेश से फॉर्म बी में दर्ज सभी पदाधिकारी यथावत रूप से काम करते रहेंगे. (नीचे भी पढ़ें)

पत्र में बताया गया है कि उसके बाद उपायुक्त कार्यालय ने बिन्देश्वरी ततमा को चुनाव पदाधिकारी नियुक्त कर चुनाव की प्रक्रिया शुरू की. उसी कड़ी में चुनाव पदाधिकारी ने रजिस्ट्रार के फैसले के पूर्व के ढांचे पर चुनाव के लिए मतदाता सूची प्रस्तुत करने के लिए यूनियन को आदेशित किया. इस बीच दूसरे गुट ने हाईकोर्ट के आदेश को डिवीजनल बेंच में चुनौती दी और डिविजनल बेंच ने हाईकोर्ट के आदेश के उस हिस्से के क्रियान्वन पर रोक लगा दिया जिसमें 8 सप्ताह के भीतर उपायुक्त की देख-रेख में यूनियन के चुनाव कराने की बात कही गयी थी. इसके अलावा उक्त आदेश में यूनियन के बैंक अकाउंट के परिचालन पर भी रोक लगा दी थी. यह भी कहा गया कि यूनियन ऑफिस के इंचार्ज के रूप में कोई भी कार्य नही करेगा. इस आदेश के बाद पहले पक्ष द्वारा रोक हटाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किया गया, लेकिन सुनवाई नहीं होने के कारण पहले पक्ष द्वारा अंतरिम आदेश के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायलय में एक याचिका दायर की गयी. उस पर सर्वोच्च न्यायलय ने हाईकोर्ट पूर्व के फाइंडिंग और अब्जर्वेशन को किनारे रख स्टे वैकेटिंग याचिका को उसके मेरिट पर निर्धारित करने को निर्देशित किया. फिर हाईकोर्ट ने स्टे वैकेटिंग याचिका को खारिज करते हुए लगी रोक को हटाने से मना कर दिया. हाईकोर्ट ने यूनियन के निबंधन को बिहार के ट्रेड यूनियन निबंधक द्वारा रद्द किए जाने को अपने उस फैसले को आधार बनाया और निबंधक ट्रेड यूनियन के फैसले को झारखंड के ट्रेड यूनियन पर प्रभावी मानते हुए चुनाव पर लगी रोक को हटाने से मना कर दिया था. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने पत्र में बताया है कि उसके बाद पुनः पहले पक्ष द्वारा उक्त आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी. उस पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव का आदेश दिया, लेकिन इसे लंबित एलपीए के परिणाम से संबंध किया था. उसके बाद अपने अंतिम आदेश में हाईकोर्ट के डिवीजनल बेंच ने दूसरे पक्ष की याचिका को पूर्णतः खारिज करते हुए सिंगल जज के आदेश में किसी भी प्रकार का कोई दखल देने से साफ इंकार कर दिया. यूनियन उपाध्यक्ष आकाश दूबे ने हाईकोर्ट के डिवीजनल बेंच द्वारा पारित अंतिम आदेश की कॉपी संलग्न करते हुए कहा है कि पारित आदेश से ही इस मामलें में पारित सभी पूर्व के आदेश स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं. इसी तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले से हीं न्यायिक सिद्धांत स्थापित किए गए हैं. इससे साफ है कि हाई कोर्ट द्वारा 25 जुलाई 2017 को पारित सिंगल जज फैसला अब पूरी तरह प्रभावी है. इसी कड़ी में टेल्को वर्कर्स यूनियन के महासचिव ने भी जिला उपायुक्त को पत्र लिखा था. उसमें रुकी हुई चुनाव प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग की गई थी. उसके बाद दूसरे पक्ष द्वारा हाई कोर्ट के डिविजनल बेंच के फैसले पर रोक लगाने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया. श्री दूबे ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित उस आदेश की कॉपी उपलब्ध कराते हुए हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के एक मामले में साफ किया है कि सरकार के प्रतिनिधि का यह परम कर्तव्य है कि वे न्यायिक आदेश को माने और उसे लागू करें. इसी आधार पर टेल्को वर्कर्स यूनियन का चुनाव जल्द कराने की प्रशासन से मांग की गई है.

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