spot_imgspot_img

Global Statistics

All countries
370,601,326
Confirmed
Updated on January 29, 2022 12:40 PM
All countries
290,442,468
Recovered
Updated on January 29, 2022 12:40 PM
All countries
5,668,499
Deaths
Updated on January 29, 2022 12:40 PM
spot_img

tribute-to-sir-dorabji-tata-by-tata-steel-vp-chanakya-chaudhary-टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट चाणक्य चौधरी की कलम से सर दोराबजी टाटा को श्रद्धांजलि-”आज अगर सर दोराबजी टाटा जीवित होते तो ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के अग्रणी चैंपियन में से एक होते”

यह लेख टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट कारपोरेट सर्विसेज चाणक्य चौधरी द्वारा लिखा गया है, जो टाटा समूह से वर्षों से जुड़े रहे है.

जमशेदपुर : टाटा समूह का इतिहास और पूर्व के कुछ दशकों की इसकी कहानी तीन हस्तियों-जमशेदजी टाटा, दोराबजी टाटा और जेआरडी टाटा- की जीवनी के रूप में भी कही जा सकती है. जमशेदजी को हमेशा उनकी लंबी टोपी और लहरदार सफेद दाढ़ी में एक बुजुर्ग पारसी व्यवसायी और एक ऐसी हस्ती के रूप में याद किया जाएगा, जिसने ‘निजी उद्यम भारत जैसे देश को कैसे रूपांतरित कर सकते हैं’ पर पहला विजन दिया. सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले समूह के चेयरमैन के रूप में जेआरडी को उस व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा, जिसने 21वीं सदी के लिए टाटा और भारतीय उद्योग को तैयार किया था. इन दिग्गजों के मध्य में सर दोराबजी टाटा हैं, जिन्होंने वास्तव में 20 वीं शताब्दी के दो भीषण युद्घ के बीच समूह की नींव रखी. आज, समूह के तीन सबसे सुनहरे रत्न-टाटा स्टील, टाटा पॉवर और टाटा केमिकल्स-उनकी दूरदर्शिता और अपने समय की बेजोड़ दृढ़ता के प्रतिफल हैं. लेखक आरएम लाला ने ‘ऑफ क्रिएशन ऑफ वेल्थ’ नामक अपनी पुस्तक में, जो टाटा ग्रुप की प्रभावशाली औद्योगिक जीवनी है, दोराबजी के जीवन के कुछ बहुत हीरो चक ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख किया है, जो ‘अपने समय के पुरुष’ की एक छवि के रूप में उनको चित्रित करते हैं, जब एडिसन, फोर्ड और वेस्टिंग हाउस जैसे लोग पश्चिम का निर्माण कर रहे थे.

टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट चाणक्य चौधरी.

टाटा हाइड्रो-इलेक्ट्रिक कंपनी (अब टाटा पॉवर) में दोराबजी टाटा और उनके सहयोगियों द्वारा विद्युतिकरण से पहले से मिल मालिकों से पुराने बॉयलर खरीदना एक टेक्स्ट बुक केस है, जो दर्शाता है कि किस प्रकार एक बाजार का निर्माण किया जा सकता है. और, बैंक ऋण के लिए अपनी पूरी व्यक्तिगत संपत्ति 1 करोड़ रुपये में गिरवी रखने की कहानी, जिसने 1920 के दशक की शुरुआत में टाटा स्टील को बचाया था, भारत के आर्थिक इतिहास के निर्णायक क्षण बन गए हैं. संभवत: दोराबजी टाटा की छवि को लेकर एक सबसे प्रीतिकर घटना एक बैलगाड़ी में सोडा वाटर के साथ चाय बनाने की कोशिश करते हुए मय भारत में लौह-अयस्क की खोज करना है. डेढ़ सदी से अधिक समय तक केवल 8 लोगों ने 113 बिलियन के टाटा समूह की जिम्मेदारी संभाली है. इनमें से प्रत्येक की विरासत काफी हद तक अद्वितीय रही है और कुछ मामलों में, उल्लेखनीय रूप से साहसिक है. सर दोराबजी के नेतृत्व में 28 वर्ष न केवल समूह के चेयरमैन के पद के लिए दूसरा सबसे लंबा कार्यकाल है, बल्कि कंपनी के इतिहास की एक महत्वपूर्ण अवधि भी है.

लोग आसानी से यह भूल जाते हैं कि जब राजनीतिक नेता देश की आजादी के लिए लड़ रहे थे तब जमशेदजी, दोराबजी और उनके लोग भारत को आयातित स्टील से मुक्त करने की कोशिश कर रहे थे. शायद सर दोराबजी जैसे नेतृत्वकर्ता के लिए आर्थिक स्वतंत्रता एक देश की स्वतंत्रता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था और अगर वे आज जीवित होते, तो वे वर्तमान सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के अग्रणी चैंपियन में से एक होते. सर दोराबजी पेशेवर खेलों के गहन प्रतिबद्घ संरक्षक थे और इस क्षेत्र में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है. उन्होंने 1920 के एंटवर्प ओलंपिक में चार एथलीटों और दो पहलवानों को भेजा, जो खेल के क्षेत्र में महान योगदान की उनकी फलदायी यात्रा की पहली कड़ी थी. इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी के एक प्रतिष्ठित सदस्य बनने से पहले, उन्होंने इंडियन ओलंपिक काउंसिल के चेयरमैन के रूप में कार्य किया, जिसके दौरान उन्होंने 1924 में पेरिस ओलंपियाड के लिए भारतीय टीम को वित्त पोषित किया. चाहे फुटबॉल हो, हॉकी हो या पेशेवर पर्वतारोहण हो, खेल के क्षेत्र में टाटा स्टील के कार्य दोराबजी द्वारा रखी गई मजबूत नींव पर ही किए जा रहे हैं. शायद उनके सभी योगदानों में सबसे बड़ा योगदान‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस’ है-एक सपना, जिसने 1883 में एक पानी के जहाज पर आकार लिया था, जब जेएन टाटा ने स्वामी विवेकानंद से मुलाकात की थी और लगभग दो दशक बाद दोराबजी टाटा ने इसे साकार किया. दोराबजी टाटा के जीवन की यात्रा का समापन ऐसे समय हुआ, जब दुनिया महामंदी के बीच थी. इसके बाद के दशक में द्वितीय विश्व युद्ध हुआ और दुनिया पूंजीवाद व साम्यवाद जैसे चरम राजनीतिक व आर्थिक विचारों के बीच विभाजित हो गई. सर दोराबजी जैसे नेतृत्वकर्ताओं ने जिस प्रकार के पूंजीवाद को जिया, उसमें इस तरह के द्वैतवाद की गुंजाइश बहुत कम थी. उन्हें अपने पिता के सपने और पैतृक संपत्ति विरासत में मिली थी और अगले कुछ दशकों में अपने पीछे अपनी बनाई विरासत छोड़ गए. सर दोराबजी टाटा को हमेशा उस व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने टाटा समूह की नींव रखी थी.

यह लेख टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट कारपोरेट सर्विसेज चाणक्य चौधरी द्वारा लिखा गया है, जो टाटा समूह से वर्षों से जुड़े रहे है.

[metaslider id=15963 cssclass=””]

WhatsApp Image 2020-06-13 at 7.45.22 PM
IMG-20200108-WA0007-808x566
WhatsApp Image 2020-06-13 at 7.45.22 PM (1)
WhatsApp_Image_2020-03-18_at_12.03.14_PM_1024x512
previous arrow
next arrow

Leave a Reply

spot_img

Must Read

Related Articles

Don`t copy text!