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शनिवार, अप्रैल 17, 2021
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    united-forum-of-bank-union-protest-बैंकों के कर्मचारियों ने जमशेदपुर की सड़कों पर निकलकर केंद्र सरकार के खिलाफ बोला हल्ला, विरोध-प्रदर्शन भी किया, काला बिल्ला लगाकर कर रहे काम-video

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    जमशेदपुर : यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन द्वारा अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है. करीब एक माह से धरना-प्रदर्शन किया गया है जबकि इसको लेकर आंदोलन भी हो रहा है. इसके तहत पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जमशेदपुर में कार्यरत सैकड़ों बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने लोगों निजीकरण के खिलाफ जागरूक करने के लिए साकची गोलचक्कर के समक्ष प्रदर्श किया. काला बिल्ला लगाकर काम किया. (नीचे पढ़े पूरी खबर.)

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    इस नुक्कड़ सभा में आम जनता के बीच निजीकरण के हानि से संबंधित पैंफलेट का वितरण किया एवं राष्ट्रीयकरण से हुए देशहित की जानकारी देते हुए वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंक देश की धरोहर है. इसे सहेजकर रखना हमारी सरकार और आम जनता की है. इसके उलट केंद्र सरकार सिर्फ बैंक ही नही उन सभी लाभ वाले संस्थानों को बेच रही है, जो करोड़ो करोड़ का लाभ सरकार को देती है और अपने विकास से देश के शिक्षित बेरोजगारों को स्थाई नौकरी प्रदान करती है, चाहे वो बैंक हो, एलआईसी हो, रेल, तेल कंपनियां, शिपिंग कंपनी या रेलवे के माल ढोने वाली कंपनियां हो. वक्ताओं ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया की आखिर देश में पिछले 70 सालों में व्यवस्था ढंग से चल रही कंपनियों को क्यों बेचा जा रहा है ? (नीचे पढ़े पूरी खबर.)

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    निजी बैंक पहले भी आम जनता के परेशानी का कारण बनते रहे हैं, चाहे वो ग्लोबल ट्रस्ट बैंक डूबने पर हो, पंजाब महाराष्ट्र कॉपरेटिव बैंक के डूबने पर हो या फिर हाल में लक्ष्मी विलास बैंक डूबने की बात हो. वक्ताओं ने आम आदमी को चेताया बैंक निजी हाथों के जाने पर खाते के मिनिमम बैलेंस अधिक रखना होगा, एटीएम के शुल्क अधिक देने होंगे, खाता मेंटेनेंस के शुल्क देने होंगे, लोन मिलना मुश्किल होगा, लोन पर अधिक ब्याज देना होगा जबकि जनता एक जमा पूंजी पर आम ब्याज मिलेगा. बैंको को निजी हाथों में सौंपने से बैंकिंग सेवा आम लोगों के लिए नही खास लोगों के लिए हो जायेगी. आज जब राष्ट्रीयकृत बैंक ऑपरेटिंग प्रॉफिट मे है तो इसे बेचने की क्या जरूरत आम पड़ी है. दरअसल सरकार बैंको को बड़े औद्योगिक घराने और बड़े व्यापारियों के हाथों सौंप कर उन्हे लाभ पहुंचाना चाहती है. बैंको के निजीकरण का विपरीत असर देश के विकास में, बेरोजगारों पर, छोटे मांझोले दुकानदार और उद्योगों पर पड़ेगा. वक्ताओं ने आम जनता से बैंक कर्मचारी द्वारा देशहित और आम के फायदे के लिए चलाए जाने वाले संघर्ष में शामिल होने का आग्रह किया. इस सभा प्रदर्शन का संचालन “यूएफबीयू” के संयोजक रिंटू रजक ने किया. आम जनता को कुंदन कुमार, डीएन सिंह, श्वेता कुमारी समेत अन्य लोग मौजूद थे. इस सभा प्रदर्शन के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हीरा अरकने, आरएनपी सिंह, एनजेएल कुमार, एके भौमिक, संजीव रेड्डी समेत अन्य लोगों ने काफी अहम किरदार निभाया.

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