jamshedpur-tmh-corona-good-news-जमशेदपुर में कोरोना वायरस को लेकर अच्छी खबर, कोरोना का संक्रमण में अब आ सकती है गिरावट, लोगों में विकसित कर रहा कोरोना से लड़ने वाला ”इम्यूनिटी”, मौतों पर टीएमएच के जीएम ने कहा-लोग खराब हालत करके मरीज को अस्पताल लाते है, कब अस्पताल लाना है, यह जानें-जानें क्या है प्लाज्मा थेरेपी का हाल, ‘टीएमएच ने किया मेडिका अस्पताल का टेकओवर’

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जमशेदपुर : जमशेदपुर में कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच अच्छी खबर है. कोरोना वायरस के संक्रमण में अब गिरावट दर्ज हो सकती है क्योंकि जमशेदपुर में अभी कोरोना का संक्रमण काफी तेजी से बढ़ा है और अब यह पोजिटिव केस की संख्या में गिरावट दर्ज हो सकती है. दस दिनों में हालात में बदलाव होने की उम्मीद है. यह बातें टाटा स्टील के मेडिकल सर्विसेज (टीएमएच) के जीएम डॉ राजन चौधरी ने कहीं है. डॉ चौधरी शनिवार को पत्रकारों से ऑनलाइन बात कर रहे थे. उन्होंने अपने टीएमएच में कोरोना को लेकर चल रहे इलाज की स्थिति की पूरी जानकारी दी. उनके साथ टाटा स्टील के चीफ कारपोरेट कम्यूनिकेशन कुलविन सुरी और हेड रुना राजीव कुमार मौजूद थे. इस दौरान टीएमएच के जीएम ने बताया कि टीएमएच में अब तक 2265 पोजिटिव केस आये है. इसमें से 1710 रिकवर होकर डिस्चार्ज हो चुके है. रिकवरी रेट 72 फीसदी से बढ़कर 75 फीसदी हो चुका है. अभी टीएमएच में सिर्फ जो सिम्प्टोमैटेकि है, उनका ही इलाज या भरती लिया जा रहा है. टीएमएच में अभी 411 बेड है. इन सारे बेड का अभी इस्तेमला शुरू हो चुका है. 411 बेड में से 95 फीसदी बेड में मरीज भरती है. टेस्टिंग की व्यवस्था को 14 अप्रैल से टीएमएच में शुरू किया गया था, जिसके तहत आरटीपीसीआर टेस्ट 23566 किया जा चुका है और करीब 450 टेस्ट एक दिन में भी किया गया है. एंटीजेन टेस्टिंग भी बढ़ायी गयी है, जिसके तहत 3845 कोरोना का टेस्ट एंटीजेन के माध्यम से हो चुका है. तीन दिनों में मौत की संख्या पहले के मुकाबले थोड़ी घटी है.

प्रदूषण का कोई असर नहीं, प्लाज्मा थेरेपी 50 फीसदी कारगर हुआ
टीएमएच में हो रही इलाज के बारे में डॉ राजन चौधरी ने बताया कि प्लाज्मा थेरेपी और दवाओं का इस्तेमाल समेत तमाम पद्धतियों का इस्तेमाल हो रहा है. तीन दिनों में मौत की संख्या घटी है. जहां तक प्लाज्मा थेरेपी की बात है तो यह जरूरी नहीं है कि जिस मरीज को प्लाज्मा चढ़ा दिया जाये, वह बिलकुल ठीक ही हो जाये. डॉ राजन चौधरी ने बताया कि अब तक 9 मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी दिया गया है. दो ठीक होकर घर लौट गये है. 4 कोरोना पोजिटिव से नेगेटिव हो चुके है. दो पर प्लाज्मा थेरेपी कारगर नहीं हुआ तो उनकी मौत भी हो गयी जबकि एक मरीज अब भी कोरोना पोजिटिव है. इस तरह करीब 50 फीसदी लोगों में यह इलाज कारगर है. वैसे यह इलाज दुनिया भर में प्रयोग के स्तर पर है. कोई भी ऐसी दवा या कोई इलाज नहीं आया है, जिससे यह दावा किया जा सके कि 100 फीसदी या 90 फीसदी मरीजों को ठीक ही कर दिया जायेगा. उन्होंने उस तरह के अफवाह को भी इनकार किया कि जमशेदपुर में ज्यादा प्रदूषण है, इस कारण कोरोना ज्यादा असर कर रहा है. यह अफवाह मात्र है.

जमशेदपुर में विकिसत हो रहा है कोरोना से लड़ने लायक इम्यूनिटी
जीएम डॉ राजन चौधरी ने बताया कि यहां कोरोना का संक्रमण काफी ज्यादा बढ़ा हुआ है. लेकिन यह अब नीचे आ सकता है क्योंकि यह देश और दुनिया में देखा गया है, जहां पीक पर कोरोना का संक्रमण होता है, उसके बाद कोरोना कंट्रोल होना शुरू हो जाता है. ऐसा ही स्थिति दस दिनों के भीतर हो सकता है. वैसे यह भी खुशी की बात है कि कई लोगों में यह देखा गया है कि कोरोना से लड़ने लायक इम्यूनिटी समाज के विभिन्न हिस्सो में विकसित हो चुका है. टीएमएच के जीएम डॉ राजन चौधरी ने बताया कि जब कोरोना का संक्रमण बढ़ता जाता है तो लोगों में इम्यूनिटी विकसित हो जाता है. इसको थर्ड इम्यूनिटी कहा जाता है. इसके विकास से सबको लाभ होता है.

संक्रमित होने के बाद नेगेटिव होकर फिर पोजिटिव नहीं हुए मरीज
जीएम ने बताया कि कोरोना के संक्रमण को देखते हुए कई तरह के प्रयोग किये गये है और अफवाह है. लेकिन जमशेदपुर में ऐसा कोई घटना नहीं है कि कोई मरीज पोजिटिव था, वह नेगेटिव हो गया और फिर पोजिटिव हो गया हो. ऐसा कोई मामला नहीं है. एक केस जरूर आया था, लेकिन उसकी टेस्टिंग में हो सकता है गलत रिपोर्ट आया हो, लेकिन ऐसा कोई वृतांत नहीं है. हां, दुनिया में यूरोप के देशों बेल्जियम में इसकी जांच जरूर चल रही है.

अगर ऑक्सीजन लेवल 94 के नीचे होने लगे तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें
कोरोना से होने वाली मौत के बारे में डॉ राजन चौधरी ने बताया कि अभी ऐसा केस ज्यादा दिख रहा है कि लोग 24 घंटे के भीतर ही मर जा रहे है. ऐसे केस आने की वजह है कि पहले लोग घरों में ही अपने स्तर से इलाज कर लेते है और जब हालत बिलकुल ही खराब हो जाता है तो टीएमएच या अन्य अस्पताल लेकर आते है. इस पर टीएमएच के जीएम ने बताया कि लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए. अगर किसी को तेज बुखार है, सर्दी और खांसी की शिकायत है तो उनको सबसे पहले अपने को समाज और घर के लोगों से अलग कर लेना चाहिए. इसके बाद अपना पल्स और ऑक्सीजन मीटर से जांच करना चाहिए. अगर ऑक्सीजन मीटर 94 के नीचे चला जाता है तो तत्काल टीएमएच या कोई भी अस्पताल मरीज को लाया जा सकता है या चिकित्सक से संपर्क कर सकते है. ऐसा देखा गया कि लोग वेट करते रहते है, जिस कारण स्थिति खराब हो जाती है और लोगों की 24 घंटे के भीतर ही मौत हो जाती है. उन्होंने बताया कि टीएमएच में अब तक 169 लोगों की मौत हुई है.

मेडिका का टेकओवर कर लिया गया है, मैनपावर की स्थिति का हो रहा आकलन
जीएम डॉ राजन चौधरी ने कहा कि बिष्टुपुर स्थित मेडिका अस्पताल के खोलने को लेकर पूछे गये एक सवाल के जवाब में कहा कि मेडिका का टेकओवर बिल्डिंग का टीएमएच द्वारा किया जा चुका है. चिकित्सक, चिकित्सा कर्मचारी समेत तमाम कर्मचारियों की जरूर दिक्कतें होगी. इसको अभी ठीक किया जा रहा है. वैसे टीएमएच के जीएम ने यह भी साफ किया कि करीब 300 चिकित्साकर्मी उनके टीएमएच में खुद संक्रमित हो चुके है, लेकिन अस्पताल में कामकाज पर किसी तरह का कोई असर नहीं पड़ा है. टीएमएच के दस फीसदी डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी संक्रमित हो चुके है और काफी परेशानी भरे हालात में लोगों की सेवा की जा रही है. जो पीपीइ किट पहनते है, उसमें पसीने होते है, जिसके बाद लोगों को इलेक्ट्रोलाइट पीना पड़ता है, इस कारण अफवाहों और वीडियो या सोशल मीडिया पर फैलायी जा रही अफवाहों पर नहीं ध्यान देकर चिकित्सा व्यवस्था को हासिल करें और डॉक्टरों से लेकर कर्मचारियों पर भरोसा रखें, वे लोग अपना बेस्ट सोसाइटी को दे रहे है.

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