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jharkhand-corona-new-protocol-झारखंड में कोरोना को लेकर नयी गाइडलाइन जारी, अब कोरोना पोजिटिव मरीजों को घर में ही रखकर हो सकेगा इलाज, गंभीर लक्षण वाले को कोरोना सेंटर व अस्पताल में ले जाया जा सकेगा, जानें क्या है नया गाइडलाइन

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राज्य के स्वास्थ्य सचिव डॉ नीतिन मदन कुलकर्णी.

रांची : झारखंड सरकार ने कोरोना को लेकर एक नया गाइडलाइन जारी किया है. इसके तहत कोरोना के संदिग्धों की जांच, इलाज और फिर डिस्चार्ज को लेकर नया प्रोटोकॉल जारी किया गया है. राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ नीतिन मदन कुलकर्णी ने इसके लिए नये गाइडलाइन जारी किये है, जिसके तहत यह कहा गया है कि कोरोना के संदिग्ध लोगों को कोरोना सेंटर, अस्पताल या घर में भी आइसोलेशन (सभी से अलग हटाकर अकेले में रखना) में रखा जा सकता है. अगर कोई व्यक्ति कोरोना पोजिटिव हो जाता है तो उसको तब तक अस्पताल में रखा जाना है, जब तक वह टेस्टिंग में नेगेटिव नहीं आ जाता है. संदिग्ध और कोरोना पोजिटिव केस के मरीजों के लिए तीन स्तर पर प्रबंधन की व्यवस्था करने को कहा गया है. इसके तहत ए-सिम्प्टोमैटिक/प्री-सिम्प्टोमैटिक/माइल्ड केस की श्रेणी बनाने को कहा गया है, जिसके तहत ऐसे मरीजों को अलग-अलग रखा जा सकता है. जिनको हल्का कोरोना का सिम्प्टम यानी लक्षण है, उनको कोरोना केयर सेंटर में रखा जाना है जबकि जिनको सबसे ज्यादा लक्षण देखए जा रहे है, उसका इलाज समर्पित कोरोना अस्पताल में किया जाना चाहिए. 65 साल से ज्यादा उम्र या कई बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति को कोरोना हेल्थ सेंटर में जरूर रखा जाना चाहि, लेकिन अगर जगह हो तो उनको कोरोना अस्पताल में रखकर इलाज किया जाना चाहिए. संदिग्ध मरीजों को कंफर्म पोजिटिव केस के साथ नहीं रख़ने की हिदायत दी गयी है. जिसमें कोई लक्षण नहीं है, उनको घरों में भी आइसोलेशन में रखा जा सकता है. डिस्चार्ज करने को लेकर भी नयी पॉलिसी बनायी गयी है, जिसके तहत जो व्यक्ति कोरोना पोजिटिव पा लिया जाता है और उसमें बीमारी के हल्के लक्षण है, उसका एक सप्ताह के बाद आरटीपीसीआर या ट्रू-नेट के जरिये फिर से टेस्ट किया जाना चाहिए. इसके बाद अगर वह नेगेटिव आता है तो उनको 14 दिन घर में ही क्वारंटीन रहने की हिदायत देकर डिस्चार्ज कियका जा सकता है. अगर कोई व्यक्ति कोरोना पोजिटिव आता है और उसका एक सप्ताह बाद भी पोजिटिव पा लिया जाता है तो उसको तब तक हर तीन दिनों में टेस्ट करना चाहिए, जब तक नेगेटिव नहीं आता है. जैसे ही उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आ जाता है, वैसे ही उसको 14 दिनों के होम क्वारंटीन में भेज दिया जा सकता है. अगर किसी व्यक्ति को लगातार बुखार है या सांस लेने में दिक्कत है और वह नेगेटिव भी आ चुका है तो उसको अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जा सकती है. हां, वैसे लोगों के वार्ड को बदला जा सकता है. अगर कोई व्यक्ति ट्रू-नेट की टेस्टिंग में कोरोना नेगेटिव पा लिया जाता है तो वह नेगेटिव ही माना जायेगा, जिसके लिए फिर से आरटीपीसीआर टेस्ट की जरूरत नहीं होगी.

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