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jharkhand-health-department-big-lapses-झारखंड के स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही, रांची से जमशेदपुर कोरोना पोजिटिव पुरुष मरीज का लाया गया शव, साकची कब्रिस्तान में शव खुला तो निकली महिला की लाश, अब साकची के कब्रिस्तान में हुआ हंगामा, हड़कंप-video

राशिफल

जमशेदपुर : झारखंड का स्वास्थ्य विभाग किस तरह से लापरवाह है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रांची में एक पुरुष मरीज की कोरोना से मौत हो जाती है. वह मानगो आजादनगर के रहने वाले पुरुष होते है. उनका अंतिम संस्कार करने के लिए शव को जमशेदपुर लाया गया. रांची से जमशेदपुर शव को अंतिम संस्कार करने के लिए लाया गया. जमशेदपुर के साकची स्थित कब्रिस्तान लेकर शव को परिजन सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक लाये ताकि अंतिम संस्कार हो जाये, लेकिन जैसे ही शव को खोला गया, वैसे ही शव महिला का निकल गया. इसके बाद हड़कंप मच गया.

दरअसल जमशेदपुर के एक 60 वर्षिय़ व्यक्ति को निमोनिया की शिकायत के बाद उसे 1 सितंबर को रांची के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 4 सितंबर को उसकी मौत हो गई थी. जांच में वह कोरोना पोजिटिव पाया गया था. शनिवार को कागजी प्रकिया के बाद उसे दफनाने के लिए सड़क मार्ग से जमशेदपुर लाया गया. यहां लोग साकची कब्रिस्तान में शव को सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए जुटे थे. शव का चेहरा हटते ही सभी दंग रह गए. शव बदला हुआ था. पुरुष की जगह महिला का शव पाया गया. वहीं इस मामले में परिजन रांची के अस्पताल प्रशासन पर सीधा आरोप लगा रहे है. उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन की गलती से ही शव बदल गया है. वहीं ऐसी गलती अस्पताल प्रशासन के काम पर भी सवाल खड़े करती है.

फिलहाल वह शव किसके पास पहुंचा है इसकी जांच की जा रही है. यह एक बड़ी लापरवाही है. अब शव को वापस रांची भेजने और किसका शव रांची से जमशेदपुर ले आया गया, यह देखा जा रहा है. अब रांची वापस जायेगा महिला का शव या पुरुष का शव वापस लाया जायेगा या नहीं, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है. इस संबंध में मृतक के बड़े भाई अब्दुल हमीद ने बताया अस्पताल में कोरोना के ईलाज के नाम पर मरीजों का दोहन हो रहा है.

हर दिन के इलाज में 25 से 30 हजार लिया जा रहा है. इतना ही परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर कई संगीन आरोप लगाते हुए झारखंड सरकार से ऐसे अस्पतालों का लाइसेंस रद्द करने की मांग की है वैसे अस्पताल प्रशासन की ओर से मृतक शमीम अंसारी का शव भेजे जाने का आश्वासन दिया गया है. लेकिन इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन होगा, यह झारखंड सरकार को तय करना है. क्योंकि इस लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

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