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jharkhand-omicron-corona-variant-alert-झारखंड में कोरोना की तीसरी लहर ”ओमीक्रॉन” को लेकर हाई अलर्ट, स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कहा-ओमीक्रॉन सात गुणा ज्यादा खतरनाक, 30 तरीके से बदल रहा स्वभाव, जानिये जमशेदपुर में कैसी है कोरोना की तीसरी लहर की तस्वीर

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जमशेदपुर/रांची : झारखंड में भी कोरोना के बढ़ते केस और कोरोना की तीसरी लहर को लेकर राज्य सरकार ने अलर्ट जारी कर दिया है. दुनिया भर में खास तौर पर यूरोपीय देशों में कोरोना के नये वेरिएंट ”ओमीक्रॉन” ने चिंता बढ़ायी है. इस बीच झारखंड भी हाई अलर्ट पर है. झारखंड सरकार के स्वास्थ्य एवं आपदा मंत्री बन्ना गुप्ता ने रांची में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया है कि ओमीक्रॉन ने चिंता जरूर बढ़ा दी है, इस कारण सारे जिले को काफी सतर्क किया गया है. उन्होंने बताया कि ओमीक्रॉन को झारखंड में घुसने ही नहीं देना है, ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विदेशी उड़ानों को ही स्थगित रखने की अपील की गयी है. उन्होंने बताया कि यह नया वेरिएंट दूसरी लहर से भी सात गुणा ज्यादा खतरनाक है जबकि यह 30 तरीके से अपने स्वभाव को बदलता है. ओमीक्रोन का असर टीकाकरण भी नाकाफी हो सकता है. इस कारण फिर से इससे बचने के लिए लोगों को मास्क पहनना होगा. सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना होगा. स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने बताया कि टीकाकरण पहले चरण का काफी ज्यादा हो चुका है. (नीचे पूरी खबर देखें जमशेदपुर में क्या है तैयारी)

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जमशेदपुर के शहरी क्षेत्र में 1529 और गांव में 1000 बेड की व्यवस्था
कोरोना के नए वेरिएंट से दुनिया व देशभर में फिर से कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं, जिसे तीसरी लहर की दस्तक माना जा रहा है. ऐसे में अगर अभी जमशेदपुर में मरीजों की संख्या बढ़ने लगी तो उससे निपटने के लिए हम कितने तैयार हैं. इस पर प्रशासन ने जमशेदपुर के कोविड अस्पतालों की जानकारी हासिल की है. कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन व वेंटिलेटर की कमी सबसे ज्यादा देखी गयी थी. कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने को पूर्वी सिंहभूम जिले (जमशेदपुर) में तैयारी लगभग पूरी हो गई है. वहीं पिछले दिनों दुबई, कतर, अमेरिका, इंगलैंड, न्यूजीलैंड, सऊदी अरब समेत अन्य देशों से जमशेदपुर आए 261 लोगों में से 219 को जिला सर्विलांस विभाग की टीम ने 24 घंटे में ढूंढ निकाला था. रविवार साप्ताहिक अवकाश होने के बावजूद सर्विलांस टीम ने 49 लोगों का सैंपल लेकर जांच के लिए एमजीएम, टीएमएच वायरोलॉजी लैब भेज दिया है जिसकी रिपोर्ट सोमवार देर शाम तक आने की उम्मीद है. विदेश से आए अगर कोई व्यक्ति पॉजिटिव पाया जाता है तो उसके सैंपल की जीनोम सिक्वेंसिंग जांच के लिए ओड़िशा भेजा जाएगा. साथ ही विदेशों से आने वाले हर व्यक्ति की जांच अनिवार्य रुप से कराने को कहा गया है. वैज्ञानिकों ने पहले अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में तीसरी लहर आने की संभावना जताई थी. उसके मद्देनजर जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीम तैयारी में जुटी हुई थी, जिसे समय पर पूरा कर लिया गया है. तीसरी लहर से निपटने के लिए पूर्वी सिंहभूम जिले में लगभग तीन हजार बेड की व्यवस्था की गई है, जिसमें अधिक से अधिक बेड ऑक्सीजनयुक्त है क्योंकि दूसरी लहर में मरीजों को सबसे अधिक जरूरत ऑक्सीजन की पड़ी थी. जमशेदपुर के शहरी क्षेत्रों के लिए लगभग 1529 बेड व ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लगभग एक हजार बेड की व्यवस्था की गई है. बच्चे व बड़ों के लिए अलग-अलग बेड बनाए गए हैं.
जमशेदपुर में सात नए पीएसए प्लांट
जिले में सात नए पीएसए (प्रेशर स्विंग ऐड्सॉप्शन) प्लांट लगाए गए हैं. परसुडीह स्थित सदर अस्पताल में पीएसए प्लांट शुरू हो गया है. वहीं, एमजीएम में पीएसए प्लांट तैयार हो चुका है. इसके अलावा भिलाई पहाड़ी स्थित सेंट जोसफ हॉस्पिटल, बारीडीह स्थित मर्सी अस्पताल, टिनप्लेट अस्पताल, घाटशिला अनुमंडल अस्पताल व चाकुलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लग चुका है. वहीं, टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) व टाटा मोटर्स अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट पूर्व से संचालित है. इसके अलावा शहर के सभी नर्सिंग होम में भी ऑक्सीजन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है.
यह है जमशेदपुर के कोविड अस्पतालों की तैयारी
एमजीएम अस्पताल– कोविड मरीजों के लिए एमजीएम में 100 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल का निर्माण किया गया है. इसे अमेरिकन-इंडिया फाउंडेशन के सहयोग से तैयार किया गया है. इसमें 16 बेड का आइसीयू, 40 ऑक्सीजन बेड व शेष बेड ऑक्सीजन सपोर्टेड है. इसके अलावा 150 बेड की व्यवस्था अलग से की गई है. इसमें लगभग 80 बेड ऑक्सीजनयुक्त होगा.
टीएमएच अस्पताल – यहां लगभग 700 बेड है. इसमें वेंटिलेटर, ऑक्सीजन बेड के साथ-साथ सामान्य बेड भी शामिल है. अगर कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ी तो बेडों की संख्या और भी बढ़ाई जाएगी. बच्चों के लिए लगभग 120 बेड की व्यवस्था की गई है.
सदर अस्पताल – परसुडीह स्थित सदर अस्पताल में 120 ऑक्सीजनयुक्त बेड की व्यवस्था की गई है. फिलहाल अभी यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं है. वहीं, बच्चों के लिए 20 बेड का अलग वार्ड बनाया गया है. इसमें 10 बेड का आइसीयू शामिल होगा.
मर्सी अस्पताल – मर्सी अस्पताल में 55 बेड होगा. इसमें लगगभग 30 बेड ऑक्सीजनयुक्त होगा. वहीं, 10 बेड का पीआइसीयू होगा. इसका निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. फिलहाल यहां कोई मरीज भर्ती नहीं है.
कांतिलाल अस्पताल – बिष्टुपुर स्थित कांतिलाल अस्पताल में 90 बेड होगा. इसमें बच्चों के लए 50 बेड का पीआइसीयू बनाया गया है. वहीं, 40 बेड बड़ों के लिए होगा. सभी बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा होगी. यहां दूसरी लहर में 700 से अधिक मरीजों की जान बचाई गई थी.
टाटा मोटर्स – टेल्को स्थित टाटा मोटर्स अस्पताल में लगभग 250 बेड होगा. इसमें बच्चों के लिए 50 बेड और बड़ों के लए 200 बेड होगा. 50 बेड में से 45 ऑक्सीजन बेड व पांच वेंटिलेटर बेड होगा. वहीं, 200 बेड में से 110 ऑक्सीजनयुक्त बेड होगा.
सेंट जोसफ अस्पताल – भिलाईपहाड़ी स्थित सेंट जोसफ हॉस्पिटल में लगभग 30 बेड होगा. इसमें पांच बेड का आइसीयू होगा. इसका संचालन शुरू हो गया है. वहीं, 25 बेड ऑक्सीजनयुक्त होगा.
उमा हॉस्पिटल – नेशनल हाइवे स्थित उमा हॉस्पिटल में 60 बेड होगा. यहां 30 बेड पर ऑक्सीजन व तीन बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा होगी. इस अस्पताल में पीएसए प्लांट भी लगाने का निर्देश दिया गया है.
कोविड मरीजों के लिए कहां कितने बेड
अस्पताल – बेड
टीएमएच –
700
एमजीएम – 250
सदर अस्पताल – 140
मर्सी – 55
उमा हॉस्पिटल – 60
कांतिलाल – 90
टाटा मोटर्स – 204
सेंट जोसफ हॉस्पिटल – 30
कुल – 1529
टाटा स्टील ने दिए है 700 सिलेंडर दिए
तीसरी लहर से निपटने के लिए टाटा स्टील फाउंडेशन ने पूर्वी सिंहभूम जिले को 700 ऑक्सीजन सिलेंडर दिया है. ये सिलेंडर चिकित्सीय संसाधनों को दुरुस्त रखने में काफी उपयोगी होंगे. प्रशासन द्वारा इसमें से अधिकतर सिलेंडरों को जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों को दिया गया है ताकि आपात स्थिति में मरीजों को बेहतर इलाज सुविधा मिल सके.
कहां कितने सिलेंडर दिए गए
अस्पताल – सिलेंडर की संख्या
पटमदा –
90
घाटशिला – 90
मुसाबनी – 40
चाकुलिया – 40
बहरागोड़ा – 40
पोटका – 40
धालभूमगढ़ – 40
डुमरिया – 30
सदर अस्पताल – 200
एमजीएम – 70
कांतिलाल – 20
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
तीसरी लहर से निपटने के लिए जिले में तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। सदर अस्पताल में पीएसए प्लांट भी शुरू हो गई है। बच्चों के लिए भी अलग से व्यवस्था की गई है. – डॉ एके लाल, सिविल सर्जन.
कोविड मरीजों को किसी तरह की दिक्कत न हो इसे लेकर एमजीएम में विशेष तैयारी की गई है। अलग से 100 बेड का अस्थायी अस्पताल का निर्माण किया जा चुका है. इसमें सभी सुविधाएं मौजूद हैं. – डॉ अरुण कुमार, अधीक्षक, एमजीएम.

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