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गुरूवार, जून 17, 2021
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tmh-life-line-of-jamshedpur-‘टीएमएच’ बना कोल्हान के लोगों की ‘जिंदगी’, कोरोना काल में चिकित्सकों और कर्मचारियों को कीजिये नमन, 250 डॉक्टर व कर्मचारी अपना घर छोड़कर कर रहे मरीजों की सेवा, पूर्व मंत्री मथुरा महतो टीएमएच से डिस्चार्ज, कहा-टीएमएच की व्यवस्था सराहनीय, अतुलनीय

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जमशेदपुर : पूरा देश कोरोना के समय में चिकित्सा की व्यवस्था से जूझ रहा है. इस व्यवस्था के बीच झारखंड चिकित्सा के मामले में काफी लाचार माना जाता है. ऐसे में कोल्हान का पूरा प्रमंडल टाटा स्टील द्वारा संचालित टाटा मुख्य अस्पताल (टीएमएच) के ही भरोसा चल रहा है. जब सरकार का सारा चिकित्सा तंत्र फेल कर जाता है तब हर किसी को कोल्हान के जमशेदपुर हो या फिर पश्चिम सिंहभूम जिला या फिर सरायकेला-खरसावां जिला, हर किसी को टीएमएच ही याद आता है. हालत यह है कि कोरोना के काल में जहां अस्पतालें बंद हो रही है. बेड की कमी हो चुकी है. चिकित्सक इलाज से कतरा रहे है, ऐसे में कोरोना को लेकर टीएमएच के चिकित्सक और कर्मचारी कोरोना की जंग लड़ रहे है. हालात यह है कि करीब 250 लोग ऐसे है, जो कोरोना के इस कालखंड में अपना परिवार को छोड़कर इलाज कर रहे है क्योंकि 14 दिनों तक सारे चिकित्सक अपनी ड्यूटी टीएमएच में करते है. 7 दिन अस्पताल के क्वारंटाइन सेंटर में रहते है और फिर वे लोग वापस घर जाते है. कोरोना के मरीजों का इलाज जमशेदपुर का पूरा जिला यानी पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां के मरीजों का इलाज कर रहे है. दो-दो जिला का प्रभार सरकार ने टीएमएच के भरोसे ही दे रखा है. इसके ऊपर अपना सिस्टम टीएमएच बढ़ा चुकी है. 600 तक की क्षमता को बढ़ाकर कोरोना को लेकर अब तक 900 बेड तैयार कर चुकी है, जिसके जरिये इलाज किया जा रहा है. आइसीयू, सीसीयू की सुविधायुक्त यहां इलाज हो रहा है, जिससे हर दिन लोग ठीक होकर घर लौट रहे है. पूरे देश और दुनिया की तरह ही टीएमएच में भी कोरोना के मरीजों की मौत भी हो रही है, लेकिन यह मौत का आंकड़ा अन्य सारे प्रदेशों से काफी कम है और ठीक होने वालों का आंकड़ा भी अच्छा है. एक ओर जहां सरकारी व्यवस्था नहीं खड़ी हो, वहां एक कारपोरेट घराने का अस्पताल दो जिलों को संभाला है और यह लाइफलाइन बना है, यह सराहनीय कदम है और टीएमएच के चिकित्सकों और कर्मचारियों को सलाम करने का वक्त है. टीएमएच में इसके विपरित कई लोग हल्ला हंगामा कर दे रहे है, जो चिकित्सकों और नर्सों और कर्मचारियों को हतोत्साहित कर रहे है, जो पीड़ा देने वाली घटनाएं है. इस तरह की घटनाओं को नहीं किया जाये तो शायद झारखंड को बेहतर इलाज, वर्ल्ड क्लास इलाज मिलता रहेगा. लेकिन मारपीट, गाली गलौज जैसी घटनाएं जरूर हतोत्साहित कर सकती है. वैसे आम लोगों को यह भी सोचना चाहिए कि जब सभी की तबीयत खराब होती है या कोई दुर्घटना या घटना होती है तो कौन सा अस्पताल याद आता है, अगर कोई अपनी आत्मा की आवाज सुनेगा तो कहेगा टीएमएच, तो फिर इतनी अविश्वसनीयता क्यों जबकि यहीं लाइफलाइन है और इसको लेकर भ्रम फैलाने वालों से बचने की भी जरूरत है. टीएमएच का सहयोग करने की जरूरत है.

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टीएमएच में पूर्व मंत्री मथुरा महतो का हुआ इलाज, हुए डिस्चार्ज
राज्य के पूर्व मंत्री और टुंडी के विधायक मथुरा महतो का इलाज टीएमएच में हुआ. वे करीब 15 दिनों से कोरोना पोजिटिव पाये जाने के बाद से इलाज के लिए भरती कराये गये थे. उनका समुचित इलाज हुआ. उनका रिपोर्ट कोरोना नेगेटिव पाये गये. इसके बाद बुधवार को उनको डिस्चार्ज कर दिया गया. मथुरा महतो को डिस्चार्ज करने के बाद वे अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए रवाना भी हो गये. उन्होंने टीएमएच की व्यवस्था की तारीफ की और कहा कि काफी बेहतर व्यवस्था है. इलाज का इंतजाम भी काफी अच्छा है. यह सराहनीय है और अतुलनीय भी है. उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में जब ले जाने की बात हुई तो लोगों ने टीएमएच का ही सुझाव दिया, जिसके बाद टीएमएच में इलाज कराने आये और अब ठीक होकर लौट रहे है.

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