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jamshedpur-administration-action-जमशेदपुर में अल्ट्रासाउंड संचालकों के खिलाफ दूसरे दिन बड़ी कार्रवाई, सिदगोड़ा आरोग्यम अस्पताल में बिना लाइसेंस के चलाया किया जा रहा था अल्ट्रासाउंड, मशीन जब्त

राशिफल

जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले में अवैध रूप से चलाए जा रहे अल्ट्रासाउंड सेंटर पर कार्रवाई शुरू कर दी गयी है. सोमवार को जहां पहली कार्रवाई दो अल्ट्रासाउंट संचालकों के खिलाफ की गयी थी तो मंगलवार को सिदगोड़ा स्थित आरोग्यम अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्यवाही करते हुए सालों से रजिस्ट्रेशन नहीं कराए गए अल्ट्रासाउंड मशीन को जब्त कर लिया है. इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ एके लाल ने बताया कि साल 2014 से ही आरोग्यं अस्पताल स्थित अल्ट्रासाउंड मशीन का रिन्यूअल नहीं कराया गया था. बार-बार सूचना देने पर भी अस्पताल प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया. जिसके बाद सिविल सर्जन के आदेश पर यह कार्रवाई की गई. इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई थी. सोमवार को भी प्रशासन ने दो अल्ट्रासाउंड संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई त रह के कागजी कार्रवाई की गयी थी, लेकिन अब तक सबकुछ दुरुस्त नहीं हो पाया है. मंगलवार को इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है. छापेमारी टीम में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (एसीएमओ) डॉ. साहिर पॉल, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. एके लाल, डॉ. विमलेश कुमार सहित अन्य पदाधिकारी शामिल थे. (नीचे पूरी खबरें पढ़े क्या हो रही कार्रवाई)

शहर में चल रहे 139 अल्ट्रासाउंड सेंटर, सब की होगी जांच
शहर भर में कुल 139 अल्ट्रासाउंट सेंटर का संचालन किया जा रहा है. टीम द्वारा सभी सेंटरों पर छापेमारी की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से संचालको भय का माहौल बना हुआ है. सोमवार को भी साकची स्थित जीवनदीप अल्ट्रासाउंड केंद्र का जांच किया गया था. यहां पर भी टीम ने काफी खामियां पाई थी. जिसके बाद विभागिय कार्रवाई की जा रही है.
क्या है पीसीपीएनडीटी एक्ट

पीसीपीएनडीटी (गर्भ धारण एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक-विनियमन तथा दुरुपयोग अधिनियम) एक्ट, भारत में कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए बनाया गया है. इस अधिनियम से प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक पीएनडीटी एक्ट-1996 के तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है. ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाले जोड़े या करने वाले डॉक्टर, लैब कर्मी को तीन से पांच साल सजा और 50 हजार रुपये की जुर्माना का भी प्रावधान है.

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