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Jamshedpur-cyber-crime : लोगों में डर पैदा कर साइबर ठग घटना को दे रहे अंजाम, नये-नये तरीके से ठगे जा रहे लोग, जानें कैसे बचे इन ठगों से

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रोहित कुमार
जमशेदपुर :
जमशेदपुर में साइबर ठग इन दिनों अपनी पैठ बनाते नजर आ रहे हैं. साइबर अपराधी नये-नये तरीके से लोगों के साथ साइबर ठगी कर रहे हैं. आये दिन लोग इन साइबर ठगों के चंगुल में आकर हजारों से लाखों रुपए गवां रहे हैं. हर माह शहर के बिष्टुपुर स्थित साइबर थाना में ऐसे कई मामले आते हैं, जिनमे साइबर ठग लोगों में डर का माहौल बनाकर पहले तो रिमोट कंट्रोल एप डाउनलोड करते हैं और फिर खाते से रुपयों की अवैध निकासी कर लेते हैं. हाल ही में साइबर ठगों ने शहर के डॉक्टरों को भी अपना निशाना बना लिया है. (नीचे भी पढ़ें)

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ऐसे दे रहे घटना को अंजाम : सबसे पहले साइबर अपराधी लोगों को उनके मोबाइल पर नंबर बंद होने का मैसेज भेजते है. साथ ही नंबर को एक्टिव करवाने के लिए एक नंबर पर संपर्क करने के लिए भी कहते है. जैसे ही कोई व्यक्ति दिए हुए नंबर पर फोन करता है तो ठग उन्हे खुद को मोबाइल कंपनी का कर्मचारी बताते है और कहते है कि केवाईसी नहीं होने पर नंबर बंद कर दिया जाएगा. नंबर बंद होने की बात सुनकर कोई भी इसलिए घबरा जाता है कि नंबर बंद होते ही सारे काम रुक से जायेंगे. ऐसे में वे ठग के झांसे में आकर उसने आगे की प्रक्रिया जानने लगते है. इसी का फायदा उठाकर ठग व्यक्ति के मोबाइल पर कोई भी रिमोट कंट्रोल एप को डाउनलोड करवाकर उनके मोबाइल का एक्सेस ले लेते है. बाद में उन्हें 10 रुपए का रिचार्ज करने को कहते है. इसी बीच वे सारी जानकारी हासिल कर लेते है और फिर सामने वाले व्यक्ति के खाते से सारे रुपयों की अवैध निकासी कर ली जाती है. (नीचे भी पढ़ें)

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लिंक भेजकर भी कर रहे ठगी : साइबर ठग लोगों को ओएलएक्स और अन्य तरह के वेबसाइट के माध्यम से भी एडवांस पेमेंट के नाम पर लिंक भेजकर उनसे सारी जानकारी हासिल कर लेते है और फिर ठगी को अंजाम देते है. साइबर ठग मनी पेमेंट की जगह मनी रिक्वेस्ट का लिंक भेज देते है. लोग लालच में आकर इसे देखते नहीं और लिंक पर क्लिक कर पासवर्ड डाल देते है जिससे वे ठगी का शिकार हो जाते है. (नीचे भी पढ़ें)

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हाल ही में हुए साइबर ठगी की घटनाएं
केस 1. विगत 5 मई को टीएमएच के वरिष्ठ सलाहकार डॉ धर्मेंद्र कुमार से रिफंड के नाम पर रिमोट कंट्रोल एप डाउनलोड और लिंक भेजकर 1.12 लाख की ठगी कर ली गई थी. ठगों ने रिफंड करने के नाम पर उनसे एनी डेस्क एप डाउनलोड करवाया था.
केस 2. कदमा के रमेश प्रसाद शुक्ला से बीएसएनएल का नंबर बंद करने का दर बनाकर ठगों ने क्विक सपोर्ट ऐप डाउनलोड करवाकर 1.50 लाख की ठगी कर ली थी. वहीं साकची के सुरोजित कुमार गुहा के खाते से भी इसी तरह 4 लाख रुपए की अवैध निकासी कर ली गई थी.
केस 3. पटमदा डिग्री कॉलेज के खाते से 27 जनवरी को 2 लाख रुपए निकाल लिए गए इसके ठीक दूसरे दिन लोयला कॉलेज के पी एंथोनी राज के खाते से 1.58 लाख की ठगी की गई. (नीचे भी पढ़ें)

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क्या होता है रिमोट कंट्रोल एप : रिमोट कंट्रोल एप गूगल प्ले स्टोर में मिल जायेगा. इन एप के सहारे साइबर ठग आपके पूरे मोबाइल का कंट्रोल अपने पास रख लेते है. वे कहीं भी दूर बैठकर आप अपने मोबाइल पर क्या कर रहे है ये देख सकते है. जैसे ही आप कुछ पेमेंट करते है वे आपकी सारी जानकारी नोट कर लेते है. फिर वे रुपए ट्रांसफर करने का खेल खेलते है. आपके मोबाइल पर आने वाला ओटीपी भी पढ़ लेते है. रिमोट कंट्रोल एप में एनी डेस्क, क्विक सपोर्ट, टीम व्यूवर, वीएनसी व्यूवर जैसे कई सारे एप गूगल प्ले स्टोर में मौजूद है. (नीचे भी पढ़ें)

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कैसे बचे इन ऐसे साइबर ठगी से : साइबर थाना प्रभारी उपेंद्र कुमार मंडल बताते हैं कि साइबर ठग डरा कर लोगों के साथ ठगी कर रहे है. साइबर ठग क्विक सपोर्ट ऐप या लिंक भेजकर लोगों को ठगते है. उन्होंने बताया कि कोई भी मोबाइल ऑपरेटर कंपनी मोबाइल नंबर बंद होने का मैसेज नही करती और न ही ऑनलाइन केवाईसी करने को कहती है. अगर ऐसा कोई भी मैसेज आए तो नजदीकी थाने में संपर्क करे. इसके अलावा कोई भी लिंक पर क्लिक न करे और न ही किसी के कहने पर कोई भी रिमोट कंट्रोल एप डाउनलोड करे.

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