jharkhand cooperative bank loot-झारखंड को-ऑपरेटिव बैंक भी डूबने के कगार पर : सरकारी विभागों ने भी की 400 करोड़ रुपये की निकासी

Advertisement
Advertisement

जमशेदपुर : झारखण्ड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक ने वित्तीय अनियमितता गबन, घोटाले, बैंक फाइनांसिंग, एनपीए, तथा नुकसान के मामले में मुम्बई के पीएमसी बैंक घोटाले को भी पीछे छोड़ दिया है. इस बैंक की बदहाली और दुर्दशा इसके बैलेंस सीट से ही उजागर हुआ. वर्ष 2018-19 का बैंक का बैंलेस सीट 300 करोड़ के घाटे तथा 500 करोड़ के अधिक के घोटाले की लीपापोती की कहानी है. इसके उजागर होते ही जमाकर्ताओं में आतंक फैल गया और जमा राशि निकालने की होड़ मच गयी. इन खबरों ने सरकार और सरकार के विभिन्न विभागों की भी नींद उड़ा दी है. झारखण्ड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में सरकारी राशि जमा रखने वाले विभागों ने भी धड़ाधड़ अपना पैसा निकालना शुरु कर दिया है. अकेले झारखंड सरकार की संस्था जुड्को ने ही बैंक की रांची शाखा से लगभग 280 करोड़ की जमा राशि दूसरे बैंक में स्थानान्तरित कर अपने पैसे की सुरक्षा सुनिश्चित किया. इससे पूर्व राज्य की शीर्ष सहकारी संस्था भेज फेड व आईपीडीपी तथा भू-अर्जन विभाग ने भी लगभग 100 करोड़ रुपये की निकासी कर ली. इसके अलावा सैकड़ों बड़े-छोटे खाताधारियों तथा सामाजिक संस्थाओं ने भी कई करोड़ की राशि निकाल ली है. डैमेज कन्ट्रोल के लिए बैंक अधिकारियों के समझाने का भी कोई असर जमाकर्ताओं पर नहीं पड़ रहा है. बैंक में मची इस अफरा-तफरी में 21 अक्टूबर को बैंक के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (सीइओ) बीके चौधरी ने रांची से जमशेदपुर आकर बिष्टुपुर शाखा में जमाकर्ता सोसाइटीज तथा व्यक्तिगत खाताधारियों की एक बैठक डैमेज कन्ट्रोल के लिए बुलायी. परन्तु बैलेंस शीट में दिखाये गये हजारों करोड़ के घाटे, घोटाले तथा एनपीए की गड़बड़ी के सवालों का कोई जवाब नहीं दे पाये. सोसाइटीज के प्रतिनिधियों तथा जमाकर्ता खाताधारियों ने साफ कह दिया है कि वे इस डूबते बैंक में अपना तथा अपने सदस्यों का पैसा रखकर उन्हें पीएमसी बैंक के खाताधारियों की तरह मरने और बरबाद होने को नहीं छोड़ सकते. इस बैंक के जमाकर्ता सारे सरकारी विभाग तो डूबने के डर से अपना पैसा निकाल चुके हैं, पर रिजर्व बैंक तथा नाबार्ड के आदेश के बावजूद निबंधक सहयोग समितियां हाथ पर हाथ धरे मूकदर्शक की तरह बैंक को डूबता देख रही हैं. इतिहास बताता है रोम जल रहा था, तब वहां का तानाशाह बंशी बजा रहे थे. आज यही कहानी झारखण्ड में दुहरायी जा रही है.

Advertisement
Advertisement
Advertisement

Advertisement
Advertisement
Advertisement

Advertisement
Advertisement

Advertisement
Advertisement
Advertisement

Advertisement