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jharkhand-journalists-death-झारखंड में पत्रकारों की हालत बदतर, पीटीआइ के ब्यूरो हेड ने लगायी फांसी, होगी एसआइटी जांच, धनबाद के दैनिक जागरण के पत्रकार की मौत, पत्रकारों का हो रहा शोषण, आवाज उठाने वाला कोई नहीं

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रांची : पत्रकार समूह के लिए गुरुवार का दिन काफी दुखदायी रहा. एक दिन में झारखंड के दो पत्रकारों की मौत ने पूरे पत्रकार समूह को झकझोर के रख दिया. जानकारी हो कि धनबाद के दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार संजीव सिन्हा की मौत गुरुवार की सुबह रांची स्थित रिस्म में हो गई. संजीव सिन्हा कोरोना संक्रमण से पीडि़त थे और इलाज के लिए रिम्स में भर्ती कराया गया था. बताया जा रहा है कि सुबह बाथरूम में गिरने से उनकी मौत हो गई. वहीं पीटीआई के ब्यूरो चीफ पीवी रामानुजम ने गुरुवार की सुबह खुदकुशी कर लिए. दो पत्रकारों को यू दुनिया से चले जाना झारखंड पत्रकारिता की बहुत बड़ी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है. दोनों के मौत के बाद पूरे पत्रकार समूह में शोक की लहर है. आपको बता दे कि इस कोरोना संक्रमण माहामारी में सभी पत्रकार अपनी जान की बाजी लगाकर लोगों तक सूचनाएं पहुंचा रहे हैं लेकिन इनके बारे में कोई सोचने वाला नहीं है. सरकार की ओर से कोरोना संक्रमण के बीच पत्रकारों के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है. देश में कई ऐसे राज्य हैं जहां सरकार ने पत्रकारों को कोरोना योद्धा का सम्मान देने के साथ बीमा भी कराया है, लेकिन झारखंड में ऐसा कुछ नहीं है. पत्रकारों की समस्याओं को इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि इस कोरोना माहामारी में एक पत्रकार को खुदकुशी करनी पड़ रही है. आप उदाहरण के तौर पर जमशेदपुर की स्थिति को देखे लिजिए. यहां कई मीडिया हाउस बंद हो गए और इससे बेरोजगार हुए पत्रकारों की ओर से सरकार आज तक ध्यान नहीं दिया. भारत एक ऐसा देश है जहां पत्रकारों के लिए सरकार की ओर से कुछ नहीं किया जाता है. कोरोना से लड़ने वाले डॉक्टर, नर्स, सफाई कर्मचारी आदि के लिए बीमा कराया गया, लेकिन पत्रकारों को ऐसी कोई सुविधा नहीं दी जाती है. स्थिति यह है कि अगर पत्रकार कोरोना संक्रमण का शिकार होता है तो उसको अपना इलाज भी खुद करवानी होगी. कोरोना योद्धा के तौर पर देखे तो अबतक सबसे ज्यादा पत्रकारों की ही मौत कोरोना संक्रमण से हुई है, लेकिन इसपर किसी का ध्यान नहीं है. शहर के तमाम सामाजिक संगठन सरकार को विभिन्न मुद्दो पर घेरती है लेकिन पत्रकारों के समस्याओं को लेकर आज तक किसी ने अवाज नहीं उठाई. वहीं सभी मीडिया हाउस सरकार तो पैसा ले लिए और पत्रकारों को देने के बजाय वेतन में कटौती करने समेत कई को तो नौकरी से भी निकाल दिया गया. दूसरी ओर, पीटीआइ के रांची ब्यूरो चीफ पीवी रामानुजम की मौत के मामले की जांच एसआइटी करेगी. रामानुजम ने अपने कार्यालय में ही फांसी लगा ली. इस घटना की एसआइटी जांच की जा रही है. ग्रामीण एसपी नौशाद आलम ने बताया कि लालपुर थाना पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतारा है. स्वर्गीय रामानुजम के पुत्र ओड़िशा में पढ़ाई करता है. पुलिस उनको वापस ला रही है. वैसे स्वर्गीय रामानुजम की पत्नी ने कहा कि उन पर किसी तरह का परिवार का कोई दबाव नहीं था. वैसे उनकी पत्नी की सुरक्षा को बढ़ा दी गयी है.

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