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naxal-bharat-band-भारत बंद के दौरान नक्सलियों का तांडव, चाईबासा में बम ब्लास्ट कर रेलवे ट्रैक उड़ाया, मुंबई-हावड़ा मेल बाल-बाल बची, लातेहार में भी उड़ाई पटरी, कई ट्रेने फंसी

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रांची/चाईबासा : नक्सलियों के भारत बंद का झारखंड पर जबरदस्त असर देखने को मिला है. नक्सलियों ने एक करोड़ के साथी इनामी नक्सली प्रशांत बोस की गिरफ्तारी के खिलाफ 20 नवंबर को भारत बंद का ऐलान किया था जिसको लेकर झारखंड पुलिस और रेलवे प्रशासन की व्यवस्था की पोल खुल गई. काफी हाई अलर्ट के बावजूद नक्सलियों ने झारखंड में दो घटनाओं को अंजाम दे दिया है. पहली घटना लातेहार में घटी है, जहां रिचु घुटा और डेमु रेलवे स्टेशन के बीच नक्सलियों ने रेलवे ट्रैक पर बम लगाकर पटरी को ही उड़ा दिया है. हालांकि, इससे कोई बड़ी घटना नहीं हो पाई. लेकिन एक ट्रॉली जरूर डिरेल हो गई. इस घटना के बाद से उधर से गुजरने वाली ट्रेनों के परिचालन पर असर पड़ा है. इस घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और रेलवे अधिकारी घटनास्थल की ओर रवाना हो चुके हैं. इस मामले की जांच भी शुरू कर दी गई है. रेलवे प्रबंधन पटरी को ठीक करने का काम कर रही है. दूसरी घटना कोल्हान में घटी. कोल्हान के पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर में नक्सलियों ने चक्रधरपुर सोनवा स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक को बम ब्लास्ट कर उड़ा दिया. लोटा पहाड़ स्टेशन के समीप दो पटरियों को भी उड़ाया गया. इस वारदात को रात के करीब 2:00 बजे अंजाम दिया गया. हालांकि, कोई भी ट्रेन पर इसका असर नहीं पड़ा, लेकिन मुंबई हावड़ा मेल उस रेलवे ट्रैक से गुजरने वाली थी, जो किसी तरह बच पाई. रेलवे के कर्मचारियों की तत्परता के कारण यह हादसा टल गया. रेलवे के अप और डाउन दोनों रेलवे ट्रैक यहां क्षतिग्रस्त हुआ है और रेल परिचालन भी ठप हो चुकी है. इस घटना के बाद से मुंबई सीएसटी से हावड़ा मेल और समरसता स्पेशल ट्रेन समेत कई ट्रेनें बीच में फंसी हुई है. करीब 6 घंटे देर से यह सारी ट्रेनें चल रही है और कहीं-कहीं रोका गया है. ट्रेन का परिचालन लगभग प्रभावित हो गया है. आपको बता दें कि झारखंड नक्सलियों का गढ़ है. स्टेशन उड़ाने से लेकर पटरी तक उड़ाने की घटनाएं होती रही है, लेकिन ऐसे बंद के दौरान रेलवे की ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे कि इस तरह की घटना को पहले से रोका जा सके और हमेशा राज्य सरकार के ऊपर जिम्मेवारी फेंक कर अपना पल्ला रेलवे प्रशासन झाड़ लेती है. ऐसी घटनाओं से ट्रेन में ट्रेवल कर रहे हजारों यात्रियों की जान खतरे में रहती है, लेकिन रेलवे और राज्य सरकार हमेशा एक दूसरे पर लीपापोती कर मामले को निपटा देते हैं और रिजल्ट जीरो है और आम आदमी फिर से इसके शिकार हो जाते हैं.

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