saraikela-witch-hunting-नीमडीह में डायन कहकर बुजुर्ग महिला का सामाजिक बहिष्कार करने के बाद ग्रामीणों ने किया आपसी समझौता, आदिवासी सेंगेल अभियान के अध्यक्ष सालखन मुर्मू से मिले दोनो पक्ष

राशिफल

जमशेदपुर : जमशेदपुर से सटे सरायकेला-खरसांवा जिले के नीमडीह थाना अंतर्गत पड़कीडीह निवासी 65 वर्षीय श्रीमती हांसदा को ग्रामीणों ने बीते दिनों डायन करार देकर सामाजिक बहिष्कार कर दिया था. इस मामले में श्रीमती हांसदा ने पुलिस की शरण ली थी जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था. सोमवार को इसी मामले को लेकर दोनों पक्ष आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू से मिलने पहुंचे. जहां सालखन मुर्मू ने दोनों पक्षों की बाते सुनी. उन्होने यह निर्णय लिया की अब गांव में ना तो डायन कहकर किसी का बहिष्कार किया जाएगा और ना ही किसी तरह का जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही किसी भी कार्यक्रम में हड़िया की जगह पवित्र जल का इस्तेमाल किया जाएगा. जानकारी देते हुए आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने बताया कि 24 अगस्त को गांव वालों ने श्रीमती हांसदा को डायन करार दे दिया था. 25 अगस्त को उसे उसके बेटे भोटेल हांसदा के साथ बोकारो के एक ओझा के पास ले गए जहां ओझा ने श्रीमती के डायन होने पर अपनी मुहर लगा दी. श्रीमती और उसके बेटे के पास पुलिस की मदद लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था. अंत में दोनों ने नीमडीह थाना में मामले की शिकायत कर दी. सूचना पाकर वे थाना पहुंचे और पुलिस को कार्यवाई करने की बात कही. पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए गांव वालों को बुलाया और एक बैठक की. बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अब गांव में डायन प्रथा को खत्म कर दिया जाएगा. सालखन मुर्मू ने बताया कि इन सब की जड़ नशा है. नशे के लिए ही लोग इस तरह की हरकत करते है. उन्होने एक राजनितिक पार्टी की ओर इशारा करते हुए कहा कि पार्टी गांव वालों को लालच देकर वोट पा लेती है और डायन प्रथा को जन्म देती है जिससे उनकी पार्टी को फायदा पहुंचे. मौके पर मुख्य रुप से सालखन मुर्मू, उनकी पत्नी सुमित्रा मुर्मू, देवेंद्र बेसरा, कालीपदो टुडू, देवनाथ हेंब्रम, ग्राम प्रधान राजू हेंब्रम, ग्राम माझी पदो हांसदा और वार्ड मेंबर नरेश हेंब्रम के अलावा गांव के अन्य लोग मौजूद रहे.

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