facts-to-know-ठंड के दिनों में रहना है फिट तो अपनाएं ये आसान और हेल्दी टिप्स

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शार्प भारत डेस्क : ठंड के दिनों में लोगों के बीमार होने की दर बढ़ जाती है. इसकी मुख्य वजह इम्युन सिस्टम का कमजोर होना है, साथ ही साथ ठंड के दिनों में मौसम शुष्क होने के कारण बैक्टीरिया की खतरा भी बढ़ जाता है. सूर्य की रोशनी की कमी के कारण लोगों को विटामिन डी प्रचुर मात्रा में नहीं मिल पाती जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ता है. इन सभी परेशानियों से बचाव का उपाय हमारे आयुर्वेद में वर्णित है. आइए जानते है ऐसे ही कुछ आसान उपायों के बारे में.
च्वनप्राश- च्वनप्राश एक आयुर्वेदिक फार्मूलेशन से निर्मित औषधी है. जिसका इस्तेमाल करके लोग खुद को फिट रख सकते है. च्वनप्राश प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने का काम करती है. सर्दी खांसी होने पर च्वनप्राश से लोगों को खासा आराम पहुंचता है. च्वनप्राश में 50 से अधिक जड़ी बूटियों को एक निश्चित मात्रा में मिलाकर बड़ी सावधानी से बनाया जाता है जो इसे बहुत खास बनाता है. च्वनप्राश अपनी एंटी आक्सीडेंट प्रवृति के लिए भी जानी जाती है. च्वनप्राश के निरंतर प्रयोग से स्वास संबंधी रोगों में अच्छा खासा लाभ मरीजों को मिलता है. आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार रात में गुनगुने दूध के साथ च्वनप्राश का उपयोग करना फायदेमंद होता है. (नीचे भी पढ़ें)

आंवला- ठंडे के दिनों में आंवला बहुत आसानी से मिलने वाली चीजों में से एक है. आंवला ने सुपरफूड के रुप में खुद को पूरे विश्व के सामने साबित किया है. आंवला में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाई जाती है. आंवला के 100 ग्राम में 20 संतरों के बराबर विटामिन सी पाया जाता है. अपने एंटी आक्सीडेंट नेचर के कारण यह बहुत ही गुणकारी साबित होती है. आंवला को आयुर्वेद की दुनिया में भगवान शंकर के स्थान पर रखा गया है, इस बात से ही इसके लाभ को समझा जा सकता है. आंवला का किसी भी रुप में सेवन किया जा सकता है. भारतीय घरों में तो मुरब्बे, आचार, चटनी, चूर्ण और विभिन्न रुपों में आंवला का इस्तेमाल भारतीय सदियों से करते आ रहे है. आंवला जूस का प्रयोग कई लोग सुबह-सुबह गर्म पानी के साथ भी करते हैं.
मौसमी सब्जियों और फलों का सेवन- ठंड के दिनों में मौसमी सब्जियों और फलों की बहार होती है. पालक, गाजर, मूली, शलजम, बथुआ , चौलाई, सीताफल, मशरुम आदि का इस्तेमाल करके हम खुद को चुस्त तंदुरुस्त रख सकते है. इन सभी चीजों में पाए जाने वाले मिनरल और फाइबर लोगों की सेहत में चार चांद लगा सकते हैं.
देसी घी- देसी घी में अच्छी गुणवत्ता पूर्ण फैट पाई जाती है. देसी घी पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है. साथ ही इसमें पाए जाने वाले विटामिन इम्यून सिस्टम के लिए खासे लाभदायक साबित होते है. इसके साथ-साथ यह एंटी इंफलामेंटरी और एंटी कैंसर गुणों से भी भरपूर होती है. ठंड के दिनों में इसका प्रयोग बढ़ाना चाहिए. अच्छी सेहत के लिए रोजाना 2 से 4 चम्मच देसी घी का उपयोग करना चाहिए. (नीचे भी पढ़ें)

गुड़- स्वस्थ रहने के लिए उचित मीठे का इस्तेमाल भी बहुत जरुरी है. रिफाइड शुगर की जगह हमें गुड़ को नियमित तौर पर अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए. गुड़ हमारे खून और लीवर को साफ करने का काम करता है. गुड़ से स्ट्रेश हार्मोंन को कम करने वाले हार्मोंन की मात्रा हमारे शरीर में बढ़ती है. यहीं कारण है कि ठंड के दिनों में इसका महत्व और बढ़ जाता है. भारतीय किचनों में गुड़ का एक अलग ही स्थान हैं. चाय से लेकर मिठाईयों तक गुड़ के बिना, ठंड के दिनों में अधूरी मानी जाती हैं.
सूखे मेवे- सूखे मेवों में वजन को नियंत्रित करने की प्रवृति होती है. ठंड के दिनों में शारीरिक गतिविधियों की खासी कमी हो जाती है जिससे लोगों का वजन बढ़ने लगता है. इससे बचाव में सूखे मेवे कारगर साबित होता है. इसके अलावा हड्डियों और दिल संबंधी रोगों से भी सूखे मेवे बचाने का काम करती हैं.
योग- अच्छे भोजन के साथ-साथ हमारे शरीर को योग की आवश्यकता भी होती हैं. भोजन से प्राप्त पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित करने के लिए शरीर को योग की जरुरत होती है. हम भारतीय हमेंशा से इससे दूर रहने की चेष्ठा करते है और यहीं अपनी सेहत से खिलवाड़ कर बैठते हैं. प्राणायाम, विभिन्न योगासन और हल्की एक्सरसाइज हम सभी को करनी चाहिए.

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