विकास का ढिंढोरा पीटने वाली केन्द्र व राज्य सरकार की पोल खोल रही सड़क, नीमडीह प्रखंड मुख्यालय तक दर्जनों गांवों के पहुंचपथ जर्जर

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अनिशा गोराई
चांडिल :
सरायकेला खरसावां जिला का अति पिछड़ा प्रखंड है नीमडीह. इस प्रखंड क्षेत्र में प्रमुख समस्याओं से एक है आवागमन की समस्या. मुरुगडीह, रामनगर, काशीपुर, सीमा, गुण्डा, हेबेन, लावा, कल्याणपुर, अण्डा, तिलाईटांड़, हुटु, धतकीडीह, कीस्टोपुर आदि लगभग दो दर्जन गांवों को प्रखंड मुख्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, स्कूल, कॉलेज व राष्ट्रीय राजमार्ग 32 को जोड़ने वाला पहुंचपथ बुरी तरह से जर्जर हो गया है. सड़क पर सैकड़ों तलाबनुमा गड्ढे बन गये हैं. इस सड़क से साइकिल, दो पहिया व चार पहिया वाहनों के अलावा पैदल भी आवागमन में काफी कठिनाई हो रही है. लावा निवासी सलिल महतो ने बताया कि इस सड़क से प्रतिदिन हजारों छात्र-छात्राएं स्कूल-कॉलेज जाते हैं. सैकड़ों छोटे-छोटे फेरीवाले गांवो में घूमकर जीवन-यापन के लिए रोजगार करते हैं. जर्जर सड़क के कारण सभी वर्ग के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि रात में सड़क के बीच पानी भरे गड्ढे में आये दिन गिरकर साइकिल व दो पहिया वाहन सवार घायल हो रहे हैं.

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हरेलाल महतो ने तीन महीने पहले स्लैग डालकर मरम्मत करायी थी

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हेबेन निवासी अंबुज गोराई ने बताया कि लगभग तीन महीने पहले समाजसेवी हरेलाल महतो द्वारा 12 किलोमीटर दूर तक सड़क पर स्लैग डालवा कर मरम्मत करायी गयी थी. इससे आवागमन में काफी हद तक सुविधा हो गई थी. लेकिन बारिश के कारण अनेक स्थानों से स्लैग बह गया और पुनः तलाबनुमा गड्ढे बनने लगे. उन्होंने कहा कि जर्जर सड़क के कारण सबसे अधिक समस्या मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में हो रही है.

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