ऐसे तो कुपोषण से जंग में हार जायेगा झारखंड, 38 कुपोषित बच्चे इलाज का कर रहे इंतजार

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चाकुलिया : चाकुलिया प्रखंड के 38 कुपोषित बच्चों को आज भी इलाज का इंतजार है. उनका इलाज नहीं हो पा रहा है. कुपोषण के खिलाफ झारखंड की सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद जंग छेड़ चुके है, लेकिन अब तक उनके इलाज का कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो पायी है. हालात यह है कि झारखंड कहीं चाकुलिया से ही कुपोषण के जंग में हार नहीं जाये. इसका कारण चाकुलिया सीएचसी में कुपोषण उपचार केंद्र का नहीं होना है. हालत यह है कि प्रखंड के कुपोषित बच्चों को इलाज के लिए बहड़ागोड़ा या घाटशिला के कुपोषण उपचार केंद्र में भेजा जाता है. लेकिन कई कारणों से अभिभावक बच्चों को बहड़ागोड़ा या घाटशिला ले जाने में असमर्थ होते हैं और उनका इलाज नहीं हो पाता है. मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2018-19 में सर्वे हुई थी, जिसमें 127 कुपोषित बच्चों की पहचान हुई थी. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सत्र 2018-19 में इस प्रखंड में 127 कुपोषित बच्चों की पहचान की गई थी, जिसमें से 89 बच्चों का इलाज हो पाया है, 60 कुपोषित बच्चों का इलाज घाटशिला और 29 का बहड़ागोड़ा कुपोषण उपचार केंद्र में हुआ. वहीं 38 बच्चें इलाज से वंचित हैं. इस संबंध में चाकुलिया सीएससी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुरेश चंद्र महतो ने बताया कि घाटशिला और बहड़ागोड़ा केंद्र में सीट खाली नहीं रहने के कारण या फिर बच्चों के अभिभावकों की परेशानियों के कारण इन बच्चों का इलाज कुपोषण उपचार केंद्र में नहीं हो पाया है. बच्चों की माताओं को घाटशिला और बहड़ागोड़ा आने जाने में परेशानी होती है जिस कारण 38 कुपोषित बच्चों का इलाज नहीं हो पाया है. उन्होंने कहा कि चाकुलिया के सीएचसी में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुपोषण उपचार केंद्र खोला गया तो ऐसे बच्चों का इलाज संभव हो पाएगा. इससे बच्चों के अभिभावकों को भी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा.

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