jamshedpur-rural- चाकुलिया के सरडीहा माहली टोला के 40 परिवार बांस पर है निर्भर, आजीविका का आधार है बांस से बनी वस्तुएं

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चाकुलिया: चाकुलिया प्रखंड की सरडीहा पंचायत के माहली टोला में 40 परिवार के लोग बांस पर निर्भर हैं. टोला के ग्रामीण धीरेन माहली, शर्मीला माहली, सरस्वती माहली,बधु माहली, मोहन माहली ने बताया कि सभी परिवार के लोगों के लिए आय का मुख्य स्रोत बांस है. कहां कि वे सभी बांस की बनी सामग्रियों को हाट बाजार में ले जाकर बेचते है और उससे हुई आमदनी से परिवार चलाते है. लोगों ने बताया कि वे सभी एक बांस सौ रुपए में खरीद कर लाते है और उसे पहले दो फाड़ करते है, इसके बाद उससे छोटे- छोटे भागो में टुकड़े करते है और चिकना बनाया जाता है.चिकना बनाते समय इसबात का ध्यान रखा जाता है कि खरीदने वाले के हाथ में बांस की छोटी- छोटी कनकी उनके हाथों में न चुभे. इसके बाद बांस की छोटी-छोटी इकाइ को लेकर जोड़ने का काम शुरु किया जाता है. घर की महिलाएं इसमें ज्यादा सहयोग करती है. घर में बैठक झुड़ी और सूप को आकार देकर बुनने का किया जाता है. सूप या टोकरी, या फिर झुड़ी तैयार होता है.

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बांस से अन्य सामग्री भी बनायी जाती है. बनने के बाद पुरुष ज्यादातर हाट बाजार में लेकर बेचते है. कहा कि एक बांस से चार या पांच सूप का निर्माण करते हैं और हाट में एक सूप 50-60 रुपए में बेचते है. एक बांस पर 150-200 रुपए की कमाई होती है. बांस की सामग्री निर्माण में परिवार के हर सदस्य सहयोग करते हैं तब जाकर एक दिन में 4-5 बांस की सूप और झुड़ी या अन्य सामग्री का निर्माण कर पाते है. लोगों ने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण इन दिनों हाट लगना बंद है जिससे उनके समक्ष आर्थिक समस्या उत्पन्न हो रही हैं. कहा कि वे सभी बांस से निर्मित सामग्रीयों को गांव गांव में घूमकर बेचते है और उससे जो भी आमदनी होती है उससे किसी तरह अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं.विदित हो कि चाकुलिया बांस के लिए प्रसिद्ध है. यहां के बांस से निर्मित अन्य वस्तुओं की मांग दूसरे राज्यों में भी है. परंतु बांस के व्यापार को बढ़ावा देने और मजदूरों को रोजगार दिलाने की दिशा में अब तक सरकार की ओर से ठोस पहल नही किया है जिसकारण यहां के मजदूरों को उचित मजदूरी नही मिल पाती है.

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