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रविवार, अप्रैल 18, 2021
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    आज भी बुनियादी सुविधाओं की बोट जोह रहा कुकडू प्रखंड, सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के दावे खोखले, चुनाव में सबक सिखाने के लिए ग्रामीण हो रहे है गोलबंद

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    सरायकेला : जैसे-जैसे झारखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है… वैसे-वैसे लोगों का मिजाज भी बदलने लगा है और लोग अपने जनप्रतिनिधियों को सबक सिखाने के लिए मुखर होने लगे हैं. चुनाव में सबक सिखाने के लिए लोग गोलबंद होने लगे हैं. ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र का कुकडू प्रखंड आज भी बुनियादी सुविधाओं की बाट जोह रहा है. अक्सर विवाद में रहने वाले ईचागढ़ के विधायक साधु चरण महतो पर झूठा आश्वासन देने का आरोप क्षेत्र की जनता और विपक्ष लगा रहे हैं.
    ईचागढ़ से लौटकर संतोष कुमार की एक खास रिपोर्ट……

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    ये तस्वीरें आजादी से पहले के भारत के गांवों की याद दिला रही होंगी, लेकिन ये तस्वीरे हमने ली है ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के कुकड़ू प्रखंड के लेटेमदा पंचायत के दारुदा मोड़ से जारगो गांव होते हुए कुईलटांड गांव के रेलवे लाइन तक के बीच से. जहां लगभग 3 किलोमीटर ग्रामीण सड़क की स्थिति काफी जर्जर है. आपको बता दें कि केंद्र के साथ झारखंड में भी भाजपा की सरकार है और यहां के सांसद और विधायक भी भाजपा से ही है. क्षेत्र में बीजेपी के ही सांसद और विधायक बनने के बाद इस क्षेत्र के लोगो को लगा था कि उनके वायदे के मुताबिक गांव की यह सड़क बन जाएगी, लेकिन भाजपा के सांसद-विधायक रहने के बावजूद इस सड़क को बनाने की दिशा में कोई दिलचस्पी नहीं लिया, जिससे लोगों में रोष व्याप्त है. यहां के लोग सांसद-विधायक के नाम से ही बिफर पड़ते हैं. इस सड़क से प्रतिदिन लोग जानूम, लेटेमदा डेली मार्केट, कुकड़ू प्रखंड कार्यालय, पश्चिम बंगाल के बलरामपुर,पुरुलिया आदि जगह आना-जाना करते है. यही नही लोग इस सड़क से जारगो महादेव बेड़ा में स्थित प्रसिद्ध नावकुंज मंदिर भी पूजा करने भी जाते है. किंतु आजतक यह सड़क नहीं बना इसके लिए प्रशासन या जनप्रतिनिधियों के द्वारा इस सड़क को बनाने के लिए कोई पहल नही किया गया.सड़क आज जगह-जगह उखड़ कर खंडर के रूप में तब्दील हो चुकी है. स्थिति इतनी भयावह है की कोई भी यातायात के वाहन गांव आना नहीं चाहता है. यदि गांव कोई प्रसव पीड़ित महिला को प्रसव दर्द उठ जाए तो मरने के सिवा कोई चारा नहीं है. ऐसे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के ऊपर उंगली उठना लाजमी है.

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    केंद्र एवं राज्य सरकार भले ही ग्रामीण सड़कों को मुख्य सड़क से जोड़ने का ढिढोंरा पीटती हो लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है. जहां स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी कई सवालों को जन्म दे रही है. आखिर क्या मामला है कि वे इन सड़कों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. वही इस सड़क के नही बनने के कारण करीब एक दर्जन गांवों के करीब 6 हजार लोग उबड़ खाबड़ रास्ते मे चलने को मजबूर है. यहां के लोगों को रोज भगवान का नाम लेकर सफर करना पड़ता है. झारखंड अलग राज्य गठन के बाद ईचागढ़ विधानसभा से दूसरी बार अरविंद कुमार सिंह उर्फ मलखान सिंह के विधायक बनने के बाद इस सड़क को बनाया गया था,. उसके बाद आज तक इस सड़क के जीर्णोद्धार के लिए न तो किसी जनप्रतिनिधि ने हाथ बढ़ाया न ही किसी प्रशासनिक पदाधिकारी ने. जबकि इस सड़क से आए दिन स्थानीय विधायक के साथ प्रखंड से लेकर जिला के आला अधिकारी का आवागमन होता है. वही झारखंड मुक्ति मोर्चा सरायकेला जिला कार्यकारणी  सदस्य इंद्रजीत महतो  ने विधायक साधु चरण महतो के कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हुए ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण का टेंडर निकालने के नाम पर भ्रम फैलाने, झूठा आश्वासन देने और क्षेत्र की जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है.

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    भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र व खुद को विकास पुरुष बताने वाले झारखंड के  मुख्यमंत्री रघुवर दास भले ही सबका साथ, सबका विकास नारे के साथ सत्ता में आए थे. लेकिन स्वार्थी विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र के उद्देश्यों को ही बदल डाला. इस सड़क की तस्वीर को देखकर सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के दावे खोखले साबित हो रहे है. इधर विधायक साधु चरण महतो ने एक बार फिर से विस्थापितों के नाम पर राजनीति शुरू कर दी है. जहां आदित्यपुर श्रीडूंगरी स्थित अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विधायक साधु चरण महतो ने विस्थापितों के मुआवजा राशि को बढ़ाए जाने की मांग सरकार से करने का ऐलान किया है. उन्होंने बताया कि जब स्वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना का लागत बढ़ सकता है, तो विस्थापितों के लिए मुआवजा राशि भी बढ़नी चाहिए. वैसे इससे पूर्व भी विधायक विस्थापितों की लड़ाई लड़ते रहे हैं लेकिन पिछला 5 साल उन्होंने अपने एजेंडे से विस्थापितों को गायब रखा, लेकिन चुनाव नजदीक आते ही एक बार फिर से विस्थापितों का दर्द इन्हें सताने लगा है.  

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