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रविवार, मई 16, 2021
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Adityapur : किस काम का आदित्यपुर शहरी स्वास्थ्य केंद्र, बंद करवा दीजिये मंत्री जी…

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आदित्यपुर : सरायकेला- खरसावां जिले का आदित्यपुर शहरी स्वास्थ्य केंद्र अक्सर विवादों में घिरा रहता है. कभी लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण यह अस्पताल सुर्खियों में रहता है, तो कभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही के कारण. ताजा मामला रविवार देर शाम लगभग 7 बजे के आसपास का है. जब एक गम्भीर रूप से घायल व्यक्ति खून से लतपथ होकर थाना की पर्ची लेकर अस्पताल पहुंचा. जहां घायल व्यक्ति लगभग 1 घंटे तक इलाज के लिए तड़पता रहा, लेकिन अस्पताल में ना तो स्वास्थ्यकर्मी थे, ना ही चिकित्सक. मामले की जानकारी मिलते ही तृणमूल कांग्रेस के युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष बाबू तांती मौके पर पहुंचे और स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉक्टर मीरा मुर्मू को दूरभाष पर मामले की जानकारी दी, लेकिन 1 घंटे तक वे नहीं आई. बाबू तांती ने सिविल सर्जन को मामले से अवगत कराया. इस बीच घायल व्यक्ति का खून काफी बह चुका था. अस्पताल में मौजूद एएनएम ने ट्रीटमेंट करने से साफ मना कर दिया. वही एक घंटे बाद प्रभारी डॉ मीरा मुर्मू अस्पताल पहुंची. वहीं बाबू तांती और अस्पताल में मौजूद सुरक्षा कर्मी ने मिलकर किसी तरह से घायल व्यक्ति का प्राथमिक उपचार किया जिसके बाद घायल का खून बंद हो सका. एक घण्टे बाद प्रभारी डॉक्टर मीरा मुर्मू अस्पताल पहुंची. पूछने पर उन्होंने अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की कमी का हवाला देते हुए अपना ही रोना रोया. उन्होंने अस्पताल के प्रसूति विभाग में तैनात एएनएम को किसी काम का नहीं बताते हुए सारा गुस्सा सिस्टम पर उतार डाला. अहम सवाल ये है कि आखिर लगभग 1 लाख की आबादी वाले आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के इस शहरी स्वास्थ्य केंद्र में अगर कोई आकस्मिक दुर्घटना के शिकार मरीज या रोगी पहुंचते हैं, तो उसके लिए क्या व्यवस्था है. झारखंड सरकार के दावों की ऐसी सिस्टम पूरी तरह से पोल खोलती नजर आ रही है. घायल व्यक्ति का नाम करण गोराई बताया जाता है, जो आदित्यपुर थाना अंतर्गत जयप्रकाश उद्यान के समीप राम मड़ैया बस्ती का रहने वाला था. जिसे उसकी पत्नी, सास और साली ने मारपीट कर घायल कर दिया था. जिसके बाद तीन बच्चों के साथ वह आदित्यपुर थाना पहुंचा था, जहां थाना से उसे मेडिकल कराने के लिए शहरी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया था. लेकिन यहां एक घंटे तक वह इलाज के लिए वह तड़पता रहा, जहां ना तो प्राथमिक उपचार की सुविधा मिली ना ही मौके पर डॉ मिले. वो तो ऊपर वाले का लाख-लाख शुक्र है कि मामले की जानकारी टीएमसी नेता बाबू तांती को मिली और उन्होंने आनन-फानन में किसी तरह उसे इलाज में मदद किया. बहरहाल ऐसी सिस्टम और ऐसी व्यवस्था किस काम की जब लाख रुपए महीना वेतन पाने के बाद भी मरीजों की देखभाल करने समय पर डॉक्टर नहीं पहुंच पाते.

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