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adityapur-nagar-nigam-आदित्यपुर नगर निगम की ”भ्रष्टाचार कथा”, प्रशासनिक जांच में खोदे गये गड्ढों से निकलने लगा भ्रष्टाचार का जिन्न, अधिकारी जांच करने पहुंचे तो उड़ गये होश

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आदित्यपुर : सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए खोदे गए गड्ढों से भ्रष्टाचार का जिन्न बाहर आने लगा है. वैसे इस जिन्न को बाहर निकालने का काम अब जिला प्रशासन द्वारा शुरू किया जा रहा है. आपको बता दें कि नरक में तब्दील हो चुके नगर निगम के सभी 35 वार्डों की स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है. मामले पर संज्ञान लेते हुए स्थानीय विधायक सह राज्य के मंत्री ने सरायकेला-खरसावां जिले के उपायुक्त को निगम क्षेत्र में चल रहे सीवरेज- ड्रेनेज और पापईपलाईन के माध्यम से जलापूर्ति परियोजना की निगरानी का जिम्मा सौंपा. उधर जिले के उपायुक्त के हाथों में कमान जाते ही संवेदकों द्वारा किए जा रहे गड़बड़ी का खुलासा होने लगा है. सोमवार को जिले के उपायुक्त के निर्देष पर सरायकेला एसडीओ रामकृष्ण कुमार वार्ड 2 से लगातार मिल रहे शिकायतों की जांच करने पहुंचे. जहां जांच के क्रम में उन्होंने पाया कि जलापूर्ति और सीवरेज के लिए खोदे गए गड्ढों को भरने में लापरवाही बरती जा रही है. हालांकि इसके लिए एसडीओ को थोड़ा सख्त रूख अख्तियार करना पड़ा. आपको बता दें कि जब एसडीओ ने रीइंस्टॉलेशन के लिए खोदे गए गड्ढों के संबंध में संवेदक के प्रतिनिधियों से पूछा कि आप गड्ढों को रीइंस्टॉल कैसे कर रहे हैें. संवेदक के प्रतिनिधि ने साफ तौर पर कहा कि उनके द्वारा खोदे गए गड्ढों को सीधे ढलाई कर दिया जा रहा है. जबकि पूर्व के ढलाई में पहले बालू, उसके बाद, ईंट का सोलिग किया जाता था, ताकि सड़क मजबूत बने, लेकिन संवेदक द्वारा सीधे मिट्टी पर ढलाई कर दिया जा रहा है. एसडीओं ने इसे गंभीर मामला बताते हुए डीपीआर के संबंध में जानकारी प्राप्त किया तो वह चौंकानेवाला था. संवेदेक के प्रतिनिधि नें बताया कि डीपीआर में इसका जिक्र नहीं है. अब आप समझ गए होंगे कि जनता को किस तरह से गुमराह किया गया. नगर निगम के माननीयों द्वारा कभी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया. मतलब साफ है कि नगर निगम क्षेत्र में सड़क पर खोदे गए गड्ढों को री इंस्टॉल करने में हो रहे लापरवाही के कारण सड़के जहां- तहां धंस रहे हैं. और सड़क कमजोर हो रहे हैं. वैसे हमने इस संबंध में जब पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री से बात किया था तो उन्होने विभागीय जवाबदेही से इंकार नहीं किया था. उन्होंने साफ तौर पर रीइंस्टॉलेशन में नियम के तहत काम कराए जाने की बात कही थी. कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि आदित्यपुर नगर निगम में हो रहे लगभग 4 सौ करोंड़ से भी अधिक के सीवरेज ड्रैनेज और जलापूर्ति योजना में बड़े पैमाने पर घालमेल हुआ है. वैसे जिला प्रशासन के हाथों में कमान आते ही वैसे सभी मामले सामने आ रहे हैं. मतलब पिछली सरकार के एमओयू में ही गड़बड़ी थी. खैर अब जिला प्रशासन पूरे मामले पर गंभीर है और लोगों को उम्मीद है कि संवेदकों द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगा.

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