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adityapur-nit-मुआवजा व नौकरी की मांग को लेकर एनआईटी व आसंगी के विस्थापित आमने- सामने, एनआईटी प्रबंधन ने कहा- मुआवजा नहीं मिलना जांच का विषय, नौकरी मेरे बस की बात नहीं, तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय पदों पर स्थानीय लोगों की बहाली हो, नहीं तो 22 मार्च से हुड़का जाम

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आदित्यपुरः एनआईटी प्रबंधन और आसंगी मौजा के विस्थापित एकबार फिर से मुआवजा और नौकरी की मांग पर आमने- सामने हैं. शुक्रवार को एनआईटी विस्थापित प्रभावित समिति का एक प्रतिनिधिमंडल झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष सह जिला 20 सूत्री उपाध्यक्ष डॉक्टर शुभेंदु महतो के नेतृत्व में एनआईटी के निदेशक से मुलाकात कर एक मांग पत्र सौंपा.(नीचे भी पढ़े)

गए मांग पत्र के माध्यम से इन्होंने संस्थान के आसपास के गांव के गरीब और आदिवासियों के 54 एकड़ जमीन के एवज में मुआवजा और नौकरी की मांग उठाई. इन्होंने ग्रुप सी और ग्रुप डी के पदों पर विस्थापितों के आश्रितों को बहाल किए जाने की मांग की. हालांकि इस मांग को निदेशक करुणेश कुमार शुक्ला ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि नौकरी देना उनके हाथ में नहीं है. मामला भारत सरकार का है, जहां तक मुआवजा की बात है, तो 1960 में संस्थान की स्थापना हुई थी, तब से लेकर आज तक मुआवजा नहीं मिलना जांच का विषय है.(नीचे भी पढ़े)

उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से वैसे प्रभावितों की सूची उपलब्ध कराने की बात कही, जिन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि पर्याप्त साक्ष्य के आधार पर मिले आवेदनों को मंत्रालय को भेजा जाएगा और प्रभावित परिवार को निश्चित रूप से मुआवजा दिलाया जाएगा. इधर समिति का पक्ष रखते हुए झामुमो नेता वीरेंद्र प्रधान ने साफ तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है, कि अगर संस्थान के तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय पदों पर विस्थापित प्रभावित एवं आसपास के स्थानीय ग्रामीणों को नियुक्त नहीं किया जाता है, तो 22 मार्च से प्रबंधन का हुड़का जाम किया जाएगा. संस्थान में किसी के भी प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी. (नीचे भी पढ़े)

उन्होंने संस्थान पर मनमानी का आरोप लगाते हुए संस्थान के बाहर से गांव में प्रवेश करने वाले सड़क निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाया है. बताया कि हाईकोर्ट के आदेश का संस्थान उल्लंघन कर रहा है. सड़क पर सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रखा गया है. सड़क की चौड़ाई कम है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है. इसके अलावा संस्थान में दैनिक वेतन भोगी मजदूरों का भी शोषण हो रहा है. 18 दैनिक वेतनभोगी मजदूर 20- 21 वर्षों से संस्थान में नियमित होने की आस में नौकरी कर रहे हैं, अबतक संस्थान और मंत्रालय से उन्हें नियमित करने की स्वीकृति नहीं मिली है.(नीचे भी पढ़े)

श्री प्रधान ने सीधे- सीधे संस्थान और मंत्रालय पर हमला बोला और कहा वर्तमान समय में होने वाली नियुक्तियों में प्राथमिकता के आधार पर अगर स्थानीय विस्थापितों के आश्रितों को नहीं लिया जाता है, तो लड़ाई अब आर-पार की होगी. इस दौरान इंटक नेता लालबाबू सरदार, झामुमो जिला उपाध्यक्ष अमृत महतो, डिग्री प्रधान, विनय महतो, रवि सरदार, बबलू प्रधान सहित एनआईटी विस्थापित प्रभावित समिति के दर्जनों सदस्य मौजूद रहे.

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