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All-India-Advocates-Welfare-Committee-Fifth-Convention : न्यायालयों और बार एसोसिएशनो में बेहतर आधारभूत संरचना आज की बड़ी आवश्यकता : न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय / पटना में अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति का पंचम महाधिवेशन सम्पन्न

राशिफल

पटना : बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्र, झारखंड स्टेट बार काउंसिल के वाईस चेयरमैन राजेश कुमार शुक्ल, बिहार स्टेट बार काउंसिल के वरिष्ठ सदस्य विंध्यकेसरी कुमार, अधिवक्ता कल्याण समिति के बिहार के महामंत्री रणविजय कुमार, पूर्व न्यायाधीश शिवनारायण सिंह को उनकी शानदार सेवा और उत्कृष्ट कानूनी क्षेत्र में कार्य के लिए अधिवक्ता रत्न से संम्मानित किया गया। शुक्रवार को अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति का पंचम राष्ट्रीय अधिवेशन आम्रपाली बैंकेट हॉल पटना में सम्पन्न हुआ, जिसका उद्घाटन पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय ने किया। जबकि इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार के विधि और न्याय मंत्री प्रमोद कुमार थे और विशिष्ट अतिथि के रूप में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्र, बिहार स्टेट बार काउंसिल के चेयरमैन काउंसिल रामाकांत शर्मा और पटना उच्च न्यायालय की को-आर्डिनेशन कमेटी के चेयरमैन योगेश चंद्र वर्मा थे। अधिवेशन की अध्यक्षता अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के अध्यक्ष और बिहार स्टेट बार काउंसिल के उपाध्यक्ष धर्मनाथ प्रसाद यादव ने की। स्वागत भाषण अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के राष्ट्रीय महामंत्री और झारखंड स्टेट बार काउंसिल के वाईस चेयरमैन राजेश कुमार शुक्ल ने किया। संचालन बिहार प्रदेश अधिवक्ता कल्याण समिति के महामंत्री रणविजय सिंह ने किया। (नीचे भी पढ़ें)

इस अवसर पर लंबित मुकदमों का दोषी कौन नामक विषयक सेमिनार भी आयोजित किया गया जिसमें दर्जनों प्रमुख अधिवक्ताओं और न्यायधीशों ने अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर पटना उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति शिवाजी पाण्डे ने कहा कि वकील के लिए ही नहीं न्यायाधीश के लिए भी बेहतर आधारभूत संरचना की जरूरत है। न्यायधीशों की कमी दूर करनी होगी। बार एसोसिएशन को उत्कृष्ट और गुणवत्तापूर्ण बनाना होगा। जब बेहतर अधिवक्ता होंगे तो बेहतर न्यायाधीश होंगे। दक्ष अधिवक्ता ही न्यायालय को मदद कर सकते है। लंबित मामलों के लिए सरकार, हमसब और मुवक्किल भी इसके लिए दोषी हैं। इस अवसर पर बिहार के विधि और न्याय मंत्री श्री प्रमोद कुमार ने कहा कि न्यायधीशों और अधिवक्ताओं का बेहतर समन्वय हो तो आमलोगों को सस्ता और जल्दी न्याय मिल सकता है। इसके लिए राज्य सरकार आधारभूत संरचना बढ़ाने के प्रति कृत संकल्पित है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अधिवक्ताओं की कल्याणकारी योजनाओं को मूर्त रूप दिलाने में पूरी मदद करेगी। उन्होंने अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति की सराहना की तथा विधि विमर्श पत्रिका की प्रशंसा की। (नीचे भी पढ़ें)

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्र सीनियर एडवोकेट ने कहा कि अधिवक्ता अनुशासित रहे, अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोरोना काल मे केंद्र और राज्य सरकार ने अधिवक्ताओं को कोई मदद नहीं की। अधिवक्ता व्यवसाय की गरिमा रखे उसको धक्का पहुंचाने का काम नहीं करें। बार काउंसिल के सदस्य अनुशासनहीनता न करें। बार काउंसिल ऑफ इंडिया और स्टेट बार कौंसिल अधिवक्ताओं की सुरक्षा, संरक्षा और उनके हितों के लिए है। श्री मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय, प्रान्त, और जिला स्तर पर ग्रीवांस रिड्रेसल फोरम बनाने पर विचार चल रहा ताकि न्यायालय में हर समस्या का निवारण हो, जिसमे न्यायाधीश, बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहेंगे। श्री मिश्र ने अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के प्रयास की सराहना की। इस अवसर पर बिहार स्टेट बार कौंसिल के चेयरमैन रमाकांत शर्मा ने कहा कि न्यायाधीशों की कमी, आधारभूत संरचना का अभाव लंबित मामलों के प्रमुख कारणों में है। जिला न्यायालय में आज भी अधिवक्ता टीनाशेड में बैठते है जब कि हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे है। (नीचे भी पढ़ें)

इस अवसर पर अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के अध्यक्ष और बिहार स्टेट बार कौंसिल के वाईस चेयरमैन धर्मनाथ प्रसाद यादव ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि समिति उन मूल्यो की रक्षा के लिए कृत संकल्पित है। उन्होंने कहा कानूनी प्रकिया की जटिलता से भी मामलों का लंबित होने के कारणों में है। अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के राष्ट्रीय महामंत्री और झारखंड स्टेट बार काउंसिल के वाईस चेयरमैन राजेश कुमार शुक्ल ने कहा कि पूरे देश मे एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट शीघ्र लागू किया जाना चाहिए। वहीं राज्य सरकारों के बजट में अधिवक्ताओं की कल्याणकारी योजनाओं के लिए बजटीय प्रावधान होना चाहिए। युवा अधिवक्ताओं को तीन वर्षो तक प्रोत्साहन राशि प्रति महीना 5 हजार रुपये देने की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जानी चाहिए। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में स्वर्गवासी हुए अधिवक्ताओं के परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा और एक-एक परिजन को नौकरी सरकार द्वारा दी जानी चाहिए। इस अवसर पर पटना उच्च न्यायालय की को-आर्डिनेशन कमिटी के चेयरमैन योगेश चंद्र वर्मा, बिहार स्टेट बार काउंसिल के वरीय सदस्य विंध्यकेसरी कुमार, सदस्य पंकज कुमार, बिहार के कार्यकारी अध्यक्ष शिवकुमार यादव, महामंत्री रणविजय सिंह, नागेन्द्र कुमार यादव, श्वेता कुमारी, शंभु शरण, मधुसूदन राय, दीपक प्रसाद सिन्हा, झारखंड के भरत झा, बिनीता सिंह, बसंत कुमार मिश्र, श्याम ठाकुर, उत्तर प्रदेश के राजन नाथ तिवारी ने अपने विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन नागेन्द्र कुमार ने किया। मंच संचालन डॉ पी यदुवंशी ने किया। इस अवसर विभिन्न प्रान्तों के हजारों प्रतिनिधि ऑनलाइन जुड़े। (नीचे भी पढ़ें)

अधिवक्ता रत्न से संम्मानित
सम्मेलन में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्र, सीनियर एडवोकेट, झारखंड स्टेट बार काउंसिल के वाईस चेयरमैन राजेश कुमार शुक्ल, बिहार स्टेट बार काउंसिल के सदस्य सीनियर एडवोकेट विंध्यकेसरी कुमार, विधि विमर्श पत्रिका के संपादक और अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के बिहार प्रान्त के महामंत्री रणविजय सिंह, अवकाश प्राप्त न्यायाधीश शिवनारायण सिंह को उनके कानूनी क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा के लिए अधिवक्ता रत्न से संम्मानित किया गया। पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्र, बिहार के विधि और न्याय मंत्री प्रमोद कुमार, बिहार स्टेट बार काउंसिल के चेयरमैन रमाकांत शर्मा और अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के अध्यक्ष धर्मनाथ प्रसाद यादव ने सम्मान प्रदान किया।

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