bank-problem-बैंकों में पैसा रखना या किसी भी ट्रांजैक्शन का करना खतरे से खाली नहीं, बैंक बना जंजाल

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जमशेदपुर : केंद्र सरकार के नए फरमान के बाद अब आपको हर तरह के ट्रांजिक्शन से लेकर न्यूनतम बैलेंस नहीं होने पर बैंक को कीमत चुकानी होगी. वैश्विक संकट के इस दौर में एक तरफ जहां देशभर में बेरोजगारी बढ़ रही है वहीं दूसरी ओर बैंक आपके जमाधन के साथ जरूरी सेवाओं के लिए चार्जेज भी लेने की तैयारी कर चुकी है. वैसे हर छोटे- छोटे ट्रांजेक्शन के लिए बैंक आपके जमाधन से सीधे पैसे काट रहा है, भले एक उपभोक्ता के लिए रकम छोटा होने के कारण कोई उपभोक्ता व्यक्तिगत रूप से क्लेम नहीं करता, लेकिन जरा सोचिए देश के करोड़ों उपभोक्ताओं से अगर विभिन्न मदों से एक- एक रुपए की कटौती की जा रही है तो बैंक उपभोक्ताओं को एक दिन में कितने का चूना लगा रहा है.
बैंकों की भीड़ बनी आफत
अब आप अगर सुबह बैंक पहुंच रहे हैं तो ये मानकर चलिए कि आपका पूरा दिन खराब. छोटे- बड़े शहरों से लेकर गावों और कस्बों के बैंकिंग प्रणाली पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत हो चुकी है. यानी पूरी तरह से सीबीएस सिस्टम के तहत सारे बैंकों में कामकाज हो रहा है. मतलब बैंककर्मी जब चाहें सर्वर अथवा लिंक फेल्योर का हवाला देकर मजे ले सकते हैं. ऐसा होता है और ये प्रमाणित भी हो चुका है. इसको लेकर अक्सर बैंककर्मियों और उपभोक्ताओं के बीच विवाद सामने आते रहे हैं. वहीं कोविड- 19 को लेकर जारी गाइडलाइंस में तो बैंककर्मियों और उपभोक्ताओं के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है. जहां सुबह से ही उपभोक्ताओं को पैसे निकासी से लेकर किसी भी प्रकार के काम के लिए घण्टों मशक्कत करनी पड़ती है.

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बैंक मित्र और गाइड बने कागजी घोड़े
बैंकों में उपभोक्ताओं को सहूलियत के लिए बैंक मित्र और कहीं-कहीं गाइड की व्यवस्था की गई है, लेकिन उन्हें अपने निजी कामों से फुर्सत मिले तब ना. अक्सर उन्हें बैंक में निजी काम करके देखा जाता है. अधिक सवाल जवाब करने पर बैंक मित्र झल्ला उठते हैं कमोबेश हर बैंकों की स्थिति यही है.

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एसबीआई में सबसे ज्यादा परेशानी
देश की सबसे बड़ी बैंकिंग श्रृंखला एसबीआई के उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा परेशानियों का सामना करते देखा गया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा साइबर फ्रॉड के शिकार इसी बैंक के उपभोक्ता होते हैं.

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