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शुक्रवार, अप्रैल 23, 2021
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भागवत कथा सुनने से भय व भ्रांतियों का नाश होता है : हंसानंद महाराज

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  • कमारीगोड़ा राधा गोविंद मंदिर में सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा

चाकुलिया : चाकुलिया नगर पंचायत क्षेत्र के कमारीगोड़ा स्थित राधा गोविद मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक हंसानंद महराज ने कहा कि कथा का भक्ति भाव से श्रवण करें. भक्त वह है जिसके मन में भक्ति हो. भागवत कथा से मन में भक्ति भाव जगता है. भक्ति भाव से पुकारने से भगवान आते हैं. जीवन में कम से कम दिन भर में एक बार प्रभु का नाम भक्ति भाव से लेने पर उसका फल तीन अश्वमेघ यज्ञ के समान है. भगवान को सात्विक भोग लगावें. प्रभु सात्विक भोग ग्रहण करते हैं.जो प्रभु प्रसाद ग्रहण नही करते हमें भी नही खाना चाहिए. हमें भोजन शाकाहारी करना चाहिए.भक्ति प्रबल होती है. उम्र बहुत छोटी है, जितना है उसी में प्रभु का नाम जप ले. सांसो का क्या भरोसा, कब और कहां रूक जाये. भजन पर श्रोता भावुक हो गये. महराज ने कहा कि श्वास स्थिर नहीं है, न जाने कब साथ छोड़ दे. जीवन हंस की तरह है. जिस तरह हंस अपनी चोंच से दूध पी लेता है और पानी छोड़ देता है. उसी तर्ज पर जीवन को सत्कर्म में लगायें. जीवन को भजन और भगवान की भक्ति में लगायें. जीवन में भक्ति लायें अभिमान नही. व्रत करें पर किसी को बतायें नहीं. ऐसा कर हम भक्ति नही भगवान के प्रति अभिमान जताते हैं. ऐसा नही होना चाहिए. व्रत करने से मन शुद्ध होता है. भक्ति ध्रुव की तरह अटल होनी चाहिए. भक्ति अटल हो तो भगवान की प्राप्ति होती है. भगवान से कुछ मांगना हो तो कामना मुक्त मांगना चाहिए. जब जीवन में कोई कामना नही रहेगी तो मन दुखी नही होगा.भरत के नाम से देश का नाम भारत हुआ.अंत समय में हम जिसका ध्यान करते हैं अगला जन्म वही होता है. इस कारण जीवन के अंत समय में प्रभु का नाम लो इससे जीवन को मोक्ष मिलती है. दुख वहां है जहां मोह है . जिस वस्तु से हमें मोह है वह छूट जाये तो हमें मोह होता है. सत्संग में जायें, सत्संग से मन को शांति मिलती है, जैसी संगत होती है वैसा ही हमारे जीवन में प्रभाव पड़ता है. भागवत कथा का श्रवण करने से भय और मन की भ्रांतियां समाप्त होती हैं. भगवान भक्त वात्सल्य होते है. इस अवसर पर रितुराज सिंह, सनातन दास, लंबोदर दास, रतन दास, निरंजन दास, लखन सिंह, निर्मल दास, पतित पावन दास, गंगा गोप, गंगा दास, शिदाम सीट, रबी कर, गोबिंद दास, मनिशंकर दास, मधु दास, नंदलाल दास, तापस दास, जयंत दास, मनोज दास, चन्द्र देव महतो, कृष्णा दास, बादल दास, बिटु दास समेत अन्य उपस्थित थे.

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