centre-for-hearing-impaired-children-सेंटर फॉर हियरिंग इम्पेरेड चिल्ड्रेन मूक-बधिर बच्चों की संवार रही जिंदगी, 335 बच्चों का थेरेपी से मूक-बधिर बच्चे को बोलने लायक बनाया, 13 दिसंबर को आप भी वहां जाकर ले सकते है इसका लाभ

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जमशेदपुर : टाटा स्टील के सौजन्य से जन्मजात मूक-बधिर बच्चों के लिए सेंटर फॉर हियरिंग इम्पेरेड चिल्ड्रन संस्था द्वारा उन मूक-बधिरों की जिंदगी संवार रही है. इसमें शहर और आसपास के दूर-दराज के मूक बधिर बच्चों को थेरेपी देकर उनका इलाज किया जाता है. यह थेरेपी प्रतिदिन तीन घंटे की होती है. जिसमें हर साल 30 से 35 बच्चों का इलाज किया जाता है. यह संस्था टाटा स्टील के सौजन्य से चलायी जाती है. जिसमें अभिभावकों से पैसे नहीं लिए जाते है. इस कार्यक्रम में रंजीता राव और टाटा मुख्य अस्पताल के ईएनटी हेड ने डॉ विनायक बिरुआ ने कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने बताया कि इस “द सेंटर फॉर हियरिंग इम्पायर्ड चिल्ड्रन” की शुरूआत 1990 से हुई थी. इस संस्था की जब शुरूआत की गयी थी तो इसमें केवल चार बच्चे ही शामिल थे. धीरे-धीरे बढ़ते बढ़ते इन 15 सालों में अब तक 335 बच्चे शामिल हो चुके है. वहीं इनमें से 200 से अधिक ऐसे बच्चे है जो अलग-अलग स्कूलों में एडमिशन ले चुके है. थेरेपी में स्पीच थेरेपी, कर्ण सांचा, ऑडिटरी वर्बल थेरेपी और कांउंसिलिंग शामिल है. (नीचे भी पढ़ें)

वहीं दूसरी ओर टाटा स्कूल के ईएनटी हेड ने बताया कि इस संस्था में जन्मजात बधिर बच्चे या पांच साल से कम के बच्चे यहां आते है. वहीं उन्होंने बताया इसके बात यहां कई नयी तरह की टेक्नोलॉजी जनवरी तक आ जाएगी जिसके बाद इस सांस्था में और तेजी से काम होगा. वहीं उन्होंने बताया कि इस संस्था में अब तक मुसाबनी, गया, जमशेदपुर, भागलपुर के बच्चों इस संस्था का हिस्सा बने है. इस संस्था से जुड़ने के बाद इन बच्चों को 2 से 3 साल का वक्त का लगता है जिसके बाद बच्चे बोलना सिख जाते है. वहीं डॉ विनायक ने बताया कि इस सांस्था द्वारा अभिभावकों को ध्यान रखने की जरूरत है कि बच्चे दो साल के अंदर यदि शुरुआती भाषाओं को बोलना यदि शुरु नहीं करते हैं तो उन्हें तत्काल इस चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए. वही एक शिविर का आयोजन किया 13 दिसंबर को 25 इ नॉर्थन टायन में सुबह 10 बजे से 2 बजे तक फ्री हियरिंग टेस्ट की जाएगी और सहीं उपचार दी जाएगी.

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