spot_imgspot_img

Global Statistics

All countries
327,540,808
Confirmed
Updated on January 16, 2022 11:15 PM
All countries
264,779,749
Recovered
Updated on January 16, 2022 11:15 PM
All countries
5,555,968
Deaths
Updated on January 16, 2022 11:15 PM
spot_img

Chaibasa-Congress-celebrated-Dr-Ram Dayal-Munda’s-birth-anniversary : ‘झारखण्ड ही नहीं पूरे देश के लिए अनमोल रत्न थे डॉ रामदयाल मुंडा’

Advertisement
Advertisement

Chaibasa : नगर कांग्रेस कमेटी के तत्वाधान में रविवार को पूर्व राज्यसभा सांसद व रांची विश्वविद्यालय के कुलपति रहे, पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए डॉ रामदयाल मुंडा की जयंती स्थानीय कांग्रेस भवन में मनायी गयी. इसमें पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने उनके तैल चित्र पुष्प अर्पित करने के उपरणतं दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके साथ ही उनके जीवन कृत्य पर परिचर्चा भी गई.

Advertisement

नगर अध्यक्ष मुकेश कुमार ने कहा कि डॉ रामदयाल मुंडा का सपना था कि प्रत्येक गांव में अखाड़ा हो और झारखंड की संस्कृति ही राज्य की पहचान है. उसे आगे बढ़ाने से ही राज्य का विकास होगा. जिला कांग्रेस प्रवक्ता जितेन्द्र नाथ ओझा ने कहा डॉ रामदयाल मुंडा झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक अनमोल रत्न थे. वे व्यक्ति सौभाग्यशाली हैं, जिन्हें उनसे मिलने और उनके विचारों को निकट से जानने का अवसर प्राप्त हुआ. हमारे राज्य के रांची जिले के गांव देऊरी में जन्मे डॉ मुंडा को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है जिनका प्रभाव शिक्षित एवं अशिक्षित, शहरी एवं ग्रामीण वर्ग, सभी में अद्वितीय था.

Advertisement

सांसद प्रतिनिधि त्रिशानु राय ने कहा कि डॉ मुंडा साधारण लोगों के साथ भी वैसे ही मिलनसार थे, जैसे कि विश्व के बड़े-बड़े विद्वानों एवं राजनेताओं के साथ. राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर व्याप्त सामाजिक एवं आर्थिक असमानता को पाटने के लिए आज हमें ऐसे ही आचरण एवं सोच की जरूरत है. वे सांस्कृतिक आंदोलन को राजनीतिक आंदोलन से भी महत्वपूर्ण मानते थे. विदेश में शिक्षा ग्रहण एवं अध्यापन कार्य करने के बावजूद डॉ मुण्डा अपनी सहजता एवं आडम्बर विहीन होने के कारण आमलोगों में लोकप्रिय थे एवं उन्होंने जनमानस में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई.

Advertisement

उन्होंने कहा कि राज्य की संस्कृति, संगीत व लोक कला के उत्थान के लिए उन्होंने अपना समस्त जीवन समर्पित कर दिया. वे जानते थे कि युवा ही संस्कृति के संवाहक हैं, अत: उन्होंने युवाओं को इस समृद्ध संस्कृति से जोड़े रहने का व्यापक कार्य किया. इस अ‍वसर पर इंद्र मोहन शांडिल, मो असलम, राजेन्द्र कच्छप, सुशील कुमार दास, बीर सिंह दास, नीरज कुमार झा समेत अन्य लोग उपस्थित थे ।

Advertisement
[metaslider id=15963 cssclass=””]

Advertisement
WhatsApp Image 2020-06-13 at 7.45.22 PM
IMG-20200108-WA0007-808x566
WhatsApp Image 2020-06-13 at 7.45.22 PM (1)
WhatsApp_Image_2020-03-18_at_12.03.14_PM_1024x512
previous arrow
next arrow

Leave a Reply

spot_img

Must Read

Related Articles

Don`t copy text!