चाईबासा : जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने किया अर्ध विधिक स्वयंसेवकों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

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चाईबासा : झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार, रांची के निर्देश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार पश्चिमी सिंहभूम के अध्यक्ष मनोरंजन कवि के आदेश पर ऑनलाइन ट्रेनिंग की श्रृंखला में पश्चिमी सिंहभूम एवं सरायकेला-खरसावां न्यायमंडल के अर्ध विधिक स्वयंसेवकों के लिए गूगल मीट के माध्यम से एक ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार पश्चिमी सिंहभूम के द्वारा किया गया। इसमें प्रशिक्षक के रूप में प. सिंहभूम जिला की श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी श्रीमती सी. ए. लकड़ा ने न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, असंगठित मजदूर कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा कानून 2008 और झालसा के द्वारा के निर्देशित कार्यक्रम श्रमेव वंदते के अंतर्गत प्रवासी मजदूरों के वापस आने और उनका संरक्षण और पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए नियमों की व्याख्या सुलभ शब्दों में की तथा बाहर काम में जाने वाले मजदूरों को निबंधन कराने हेतु आवश्यक जानकारी भी दी, उन्होंने बताया कि मजदूरों के द्वारा राज्य के बाहर जाने पर इसकी सूचना व निबंधन होना आवश्यक है, जिससे कई लाभ तथा उनकी सुरक्षा की समुचित व्यवस्था होती हैं, उन्होंने वर्चुअल माध्यम से उपस्थित स्वयंसेवकों को आग्रह किया कि वह ऐसे मामलों को संज्ञान में लेकर त्वरित कार्रवाई हेतु विभाग को सूचित करें, उन्होंने एक टोल फ्री नंबर भी साझा किया।

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किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य सह पी एल वी विकास दोदराजका ने ‘किशोर न्याय प्रणाली’ और ‘अधिनियम’ की बारीकियों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए जिलों के स्वयंसेवकों को उनके कर्तव्य का बोध भी कराया तथा देखभाल एवं संरक्षण वाले बच्चों को संरक्षित करने के लिए चाइल्ड लाइन के टोल फ्री नंबर 1098 पर फोन करने का सुझाव दिया उन्होंने बताया कि परिवार की सुरक्षा चक्र से बाहर निकल गए बच्चे देखभाल एवं संरक्षण के दायरे में आ जाते हैं जहां पर इन संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है, इन परिस्थितियों से पीड़ित बालकों को संरक्षित करने के लिए प्रत्येक जिले में बाल संरक्षण इकाई का गठन किया गया है इस इकाई में कार्यरत विभिन्न पदों पर कार्यकर्ता बच्चों के सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, बच्चों के सर्वोत्तम हित के लिए निर्णय लेने हेतु राज्य के सभी जिलों में बाल कल्याण समिति कार्यरत है, बाल कल्याण समिति को प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी की शक्ति प्राप्त होती है और वह बच्चों को के बारे में निर्णय लेने के लिए एक सक्षम प्राधिकार होते हैं, समिति के आदेशों का अनुपालन करने के लिए इकाई और चाइल्ड लाइन सदैव अपनी सेवाएं प्रदान करती है।

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विधि के साथ संघर्षरत बच्चों को किशोर न्याय परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चों को संरक्षण के लिए बाल गृह या संप्रेक्षण गृह की व्यवस्था जिले में की गयी है, देखभाल एवं संरक्षण तथा विधि के साथ संघर्षरत बच्चों के संरक्षण हेतु जिले में विशेष बाल पुलिस इकाई का गठन हुआ है, जिले के सभी थानों में एक बाल पुलिस अधिकारी भी कार्यरत हैं, जिले की कई थाना बाल मित्र थाने के रूप में चिन्हित है, 06 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था है, शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए अनिवार्य रूप से शिक्षा ग्रहण करना है इसका उल्लंघन करने पर अभिभावक सहित जिम्मेदार व्यक्ति दोषी होते हैं।

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श्री दोदराजका ने आगे बताया कि बाल तस्करी और बाल विवाह भी क्षेत्र में एक बड़ी समस्या है जिसे रोकने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं, जिले के प्रखंडों में प्रखंड विकास पदाधिकारी बाल विवाह प्रतिषेध पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित हैं, उन्होंने स्वयंसेवकों को सचेत किया कि बाल श्रम, बाल तस्करी या बाल विवाह जैसे मामलों पर इसकी त्वरित जानकारी संबंधित पदाधिकारी को दें ताकि ऐसे मामलों पर रोक लगे और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके। समापन पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव कुमारी जीऊ ने सभी स्वयंसेवकों को धन्यवाद दिया और भविष्य में वर्चुअल माध्यम से और बैठकें आयोजित करने का संकेत भी दिया।

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