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Composite-of-Guru-Shukra : कल (1 अगस्त) को सुबह 5.09 बजे शुक्र के मिथुन राशि में प्रवेश करते ही बन जायेगा गुरु के साथ समसप्तक योग, एक माह तक रहेगा गुरु-शुक्र का समसप्तक योग, जीवनसाथी के साथ तालमेल बना कर चलें

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जमशेदपुर : गुरु और शुक्र अपने आप में दोनों शुभ ग्रह हैं, लेकिन आपस में दोनों की शत्रुता है। गुरु वैवाहिक सुख (विवाह होगा या नहीं) का प्रतिनिधि ग्रह है तो शुक्र दांपत्य सुख (विवाह के बाद सेक्स लाइफ) का प्रतिनिधित्व करता है। इन दोनों ग्रहों के समसप्तक में आ जाने के कारण अनेक लोगों के वैवाहिक सुख और दांपत्य सुख पर विपरीत असर पड़ सकता है। शुक्र 1 सितंबर 2020 तक मिथुन राशि में रहेगा, इसके बाद कर्क राशि में प्रवेश कर जाएगा। अर्थात् इस एक माह के समय में सभी राशि के जातकों को अपने जीवनसाथी के साथ तालमेल बनाकर चलना जरूरी होगा। समसप्तक योग दो या दो से अधिक ग्रहों के योग से मिलकर बनता है।

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क्या होता है समसप्तक योग

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  • समसप्तक योग दो या दो से अधिक ग्रहों के योग से मिलकर बनता है।
  • जब भी कोई दो ग्रह एक दूसरे से सातवें स्थान पर होते हैं, तब उन ग्रहों के बीच समसप्तक योग बन जाता है।
  • दूसरे शब्दों में कहें तो जब ग्रह आपस में अपनी सातवीं पूर्ण दृष्टि से एक-दूसरे को देखते हैं तब समसप्तक योग बनता है।
  • यह वैसे तो एक शुभ योग होता है, लेकिन शुभ-अशुभ ग्रहों की युति के कारण इसके शुभाशुभ फल में भी बदलाव आता है।
  • इस योग का फल इस बात पर निर्भर करता है कि यह किन ग्रहों की युतियों, किन लग्न और किन-किन ग्रह योगों से बन रहा है।
  • इस योग में ग्रहों की मैत्री, शत्रुता, समस्थिति, मारक, भावेश, कारक, कारक भाव जैसी शुभ-अशुभ योग स्थिति मायने रखती है।
  • यह स्थिति जातक की कुंडली में बनने वाले समसप्तक योग की स्थिति पर निर्भर करेगी कि किस तरह की स्थिति से यह योग बन रहा है।
  • केंद्र त्रिकोण के ग्रहों के संबंध से यह योग बनने पर शुभ फल देने वाला होता है।
  • केंद्रेश त्रिकोणेश की युति में ग्रहों का आपसी नैसर्गिक रूप से संबंध भी शुभ होना जरूरी होता है।
  • इस योग की जैसी स्थिति कुंडली, लग्न आदि के द्वारा बनेगी वैसे ही इस योग के शुभ-अशुभ फल होंगे।
  • यहां गुरु और शुक्र के बीच समसप्तक योग बन रहा है, ये दोनों ग्रह आपस में शत्रु हैं इसलिए इसका शुभ फल कम, अशुभ फल ज्यादा मिलेगा।

क्या होगा गुरु-शुक्र समसप्तक का फल

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  • गुरु को वैवाहिक सुख का प्रतिनिधि ग्रह माना जाता है, तो शुक्र दांपत्य सुख का। दोनों ग्रहों की शत्रुता होने के कारण दोनों ही प्रकार के सुख प्रभावित होंगे।
  • जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही है, विवाह नहीं हो पा रहा है, उन्हें अभी एक माह और इंतजार करना पड़ेगा। 1 सितंबर के बाद विवाह की बात बनेगी।
  • जिन लोगों का विवाह हो गया है, लेकिन पति-पत्नी के बीच अनबन बनी रहती है, वह अभी और बनी रहेगी। उसमें राहत नहीं मिलने वाली।
  • जिन लोगों की सेक्सुअल लाइफ खराब चल रही है, उसमें अभी एक माह सुधार नहीं आएगा।
  • प्रेम संबंधों में टकराहट आने की स्थिति बनेगी। प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे की परवाह नहीं करेंगे।
  • गुरु आध्यात्मिकता, सात्विकता का ग्रह है, जबकि शुक्र भोग विलास का, तो जो लोग आध्यात्मिक राह पर चलना चाहते हैं, उनकी साधना में रूकावट आ सकती है।

क्या उपाय करें

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  • गुरु और शुक्र दोनों की प्रसन्न्ता के उपाय इस दौरान किए जाना चाहिए।
  • गुरुवार को केले के पेड़ में शुद्ध जल अर्पित करके उसकी पूजा करें। केले का दान करें।
  • शुक्रवार के दिन मिश्री और दूध का दान करना शुभ रहेगा।

प्रस्तुति : आचार्य राजेश पाठक
सम्पर्क : 9431339858

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