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वापस आ रहे प्रवासी मजदूरों का गांव में विरोध पर चिंता, परसुडीह में हुई बैठक, बीडीओ ने कहा-दुर्व्यवहार बंद करें, मुखिया, माझी बाबा समेत ग्रामीण मिल कर करें समस्या का समाधान, कोरोना को हराना है

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जमशेदपुर : प्रवासी मजूदरों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार व गांवों में प्रवेश का विरोध के मुद्दे को लेकर परसुडीह स्थित गौरी भवन में गहन विचार-विमर्श किया गया. यह विशेष बैठक जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह की अगुवाई में हुई. इसमें बीडीओ मलय कुमार, सदर अस्पताल के उपाध्यक्ष राजेंद्र नाथ झा, परसुडीह थाना प्रभारी अजय तिवारी समेत परसुडीह व प्रमथनगर क्षेत्र के करीब 40 मुखिया व पंचायत समिति सदस्य शामिल हुए. बीडीओ मलय कुमार ने कहा कि पंचायत क्षेत्र में बाहर से आने वाले या प्रवासी मजदूरों का गांव में प्रवेश पर रोक लगाया जाना, उन्हें गांव के बाहर धूप या फिर पेड़ के नीचे बैठा दिया जाना अनुचित व गंभीर चिंता का विषय है.

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उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के इस दौर में रोजी-रोजगार छीन जाने की वजह से मजदूर मजबूरन अपने गांव लौट रहे हैं. बहुत ही मुश्किलों का सामना करते हुए किसी तरह अपने गांव तक पहुंचे हैं. गांव में पहुंचने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार करना उचित नहीं है. इस पर चिंतन-मंथन करने की जरूरत है. मानवता के लिहाज से यह बिल्कुल ही उचित नहीं है. आज उनके साथ समस्या है. कल को किसी के साथ भी हो सकती है. इसलिए पहले से उनके साथ दुर्व्यवहार को बंद करना चाहिए. मुखिया, माझी बाबा समेत ग्रामीणों को मिलकर समाधान का रास्ता निकालना चाहिए. बाहर से आये लोगों को क्वारंटाइन सेंटर या फिर सेल्टर हाउस में ठहराया जाना चाहिए. उसके बाद बीडीओ-सीओ या फिर स्वास्थ्य विभाग की टीम को सूचित किया जाना चाहिए, ताकि उनकी जांच हो सके. उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में स्थिति भयावह हो सकती है. मिलकर इस जंग को जीतना है. जो बाहर से आये हैं वे कोई गैर नहीं हमारे ही भाई-बंधु हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इस समय कोरोना महामारी के काल में वे बाहर से आ रहे हैं. जिला प्रशासन के पास संसाधन की कमी है. हाय-तौबा मचाने से कुछ नहीं होगा. सोच समझकर परस्पर एक-दूसरे का सहयोग लेते हुए कोरोना को भगाना है.

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सदर अस्पताल के उपाधीक्षक राजेंद्र नाथ झा ने कहा कि मुखिया को पंचायत प्रतिनिधि व पारंपरिक ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर समस्या का निदान ढूंढना होगा. बाहर से आने वाले हर व्यक्ति की जांच करना संभव नहीं है. अभी जांच वैसे लोगों की हो रही है जो रेड जोन से आये हैं या फिर जिनमें कुछ लक्षण दिखायी दे रहे हैं. संकट की इस घड़ी में धैर्य नहीं खोना है. यह परीक्षा की घड़ी है. इसमें अपनी बुद्धिमता का परिचय देना है और अपने लोगों को समस्या से उबारना है.

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जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कहा कि आनेवाले दिनों में स्थिति भयावह हो सकती है. इसलिए अब पंचायत ही नहीं गांव स्तर पर बैठक कर लोगों को सचेत करने की जरूरत है. मुखिया, माझी बाबा, जोग माझी, नायके बाबा, गोडेत, पारानिक, परगाना, तोरोफ परगना, घाट परगना, पीढ परगना सबों का सहयोग लेना है. गांव से लेकर जिला प्रशासन के अधिकारियों का सहयोग मिलेगा तो कोरोना महामारी की जंग को आसानी से जीता जा सकता है. विरोध करना समस्या का समाधान नहीं है. बल्कि समस्या का सामना करने से ही समाधान निकल सकता है.

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थाना प्रभारी अजय सिंह तिवारी ने कहा कि प्रशासन दिन-रात जनता की सेवा के लिए तत्पर है. मुखिया व पंचायत प्रतिनिधि को जब भी आवश्यकता महसूस हो. सूचित करें उन्हें पुलिस प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद किया जायेगा. नियम के विरूद्ध कार्य करने व्यक्तियों से सख्ती से निपटा जायेगा. बैठक में जिप सदस्य सुदिप्तो दे, सुनीता नाग, भीमसेन भूमिज, कंचन तिग्गा, खत्री सिरका, बसंती गुप्ता, सिनगो टुडू, सुमी केराई, राधारानी टुडू, पानो मुर्मू, कुमलेन हेरेंज, उमेश पुराण, नागी बोयपाई, पूर्णिमा हेंब्रम, विश्वजीत भगत, केनेडी सोय, भीम मार्डी, रोहित सिंह, मनोज महतो, बिरजू पात्रो, हेमंत खलको समेत काफी संख्या में मुखिया व पंसस उपस्थित थे.

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