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Drought-In-Jharkhand : सुखाड़ की चपेट में झारखंड में, नौ प्रतिशत खेत में ही हुई धान की रोपनी

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रांची : झारखंड में किसान संकट में हैं. वजह इस अपेक्षाकृत बारिश नहीं हुई है. इस वजह से खासकर धान की खेती करने वाले किसान काफी परेशान व संकटपूर्ण स्थिति से गुजर रहे हैं. इस वर्ष अपेक्षाकृत 48 प्रतिशत कम बारिश हुई है. बता दें कि सुखाड़ की स्थिति की जानकारी लेने के लिए झारखंड सरकार ने 24 जिलों में एक्सपर्ट की एक टीम भेजी थी, जिनमें से पांच जिलों से ही रिपोर्ट कृषि विभाग को मिली है. 10 अगस्त को ही कमेटी को अपनी रिपोर्ट देनी थी. कोडरमा, हजारीबाग, लोहरदगा, गुमला और पश्चिमी सिंहभूम से मिली रिपोर्ट के मुताबिक धान की खेती करने वाले किसान मुश्किल में हैं. अपने आकलन में कमेटी ने पाया है कि धान के बिचड़े पीले पड़ गए हैं और 20 प्रतिशत से ज्यादा धान की खेती संभव नहीं है. (नीचे भी पढ़ें)

राज्य के सभी जिलों पर नजर डाली जाये, तो यहां 18 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है. पूरे राज्य में अगस्त महीने में कम बारिश ने धान की खेती को बुरी तरह प्रभावित किया है. रांची समेत राज्य के कई दूसरे जिलों में अबतक नौ प्रतिशत जमीन पर ही धान की रोपाई हो पाई है. सात अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में सुखाड़ की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार से राहत पैकेज की मांग की थी, जबकि राज्य सरकार ने सूखे के आकलन के लिए जो समिति बनाई है, उसकी अभी पूरी तरह से रिपोर्ट ही नहीं मिल पाई है. पिछले दिनों विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्षी दल भाजपा व अन्य ने भी राज्य में सुखाड़ की स्थिति पर चर्चा की मांग की थी.

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