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पांच मजदूरों को गोदावरी से बलिया पहुंचने में लग गये 24 दिन, तीन दिनों के सफर को रास्ता भटक जाने के कारण लगे इतने दिन

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  • सांसद गीता कोड़ा और एन्थोनी फरनांडो के अथक प्रयास से मजदूरों को मिली मंजिल
  • बलिया के विधायक से अपील भी नहीं आयी काम
  • मजदूर और मजदूरों के परिवार वालों की बेचौनी व परेशानी में कटे दिन

चाईबासा / चक्रधरपुर : आंध्र प्रदेश के पवित्र स्थल गोदावरी से उत्तर प्रदेश के बलिया तक का सफर पांच मजदूरों के लिए बहुत अधिक कष्टदायक रहा. जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश के बलिया अंतर्गत बिनका छपरा गांव के पांच मजदूर आंध्र प्रदेश के गोदावरी में मजदूरी करते थे. देश में लॉकडाउन होने और काम के लाले पड़ जाने के बाद पांचों मजदूर भरत प्रसाद, उमा शंकर बिंद, वीरेंद्र बिंद, वशिष्ट बिंद एवं जितेंद्र बिंद ने साईकिल से बलिया लौटना शुरू किया. लेकिन बदकिस्मती उनकी राह देख रही थी, वे रास्ता भटक गये. 17 अप्रैल को यात्रा शुरू की और ओड़िशा के रास्ते से वे सभी 21 अप्रैल को चक्रधरपुर पहुंचे. रात हो जाने के कारण वे सभी त्रिशूल चौक पर आराम कर रहे थे. जहां उनकी मुलाकात रेड क्रॉस सोसाइटी के पेट्रॉन एन्थोनी फरनांडो से हुई. उन्होंने मजदूरों की मदद करना चाहा. लेकिन मजदूरों की बदनसीबी यह रही कि उसी दिन शाम में एक बस मजदूरों को लेकर उत्तर प्रदेश रवाना हो चुकी थी. बीडीओ चक्रधरपुर के परामर्श से पांचों मजदूरों को रैन बसेरा में रखा गया. इंतजार के आज-कल करते-करते चक्रधरपुर में ही 11 दिन लग गये, लेकिन दूसरी बस रवानगी का वक्त नहीं आया. रैन बसेरा में उनके खाने-पीने का इंतजाम सेक्रेड हार्ट स्कूल, जन नायक समिति और चक्रधरपुर के विधायक सुखराम उरांव के सौजन्य से होता रहा. पांचों मजदूर परेशान थे. बलिया में उनके परिवार वालों की बेचौनी अलग थी. लेकिन मजदूरों की वापसी का कोई मार्ग नहीं दिख रहा था. 11वें दिन पांचों मजदूरों को चाईबासा स्थित संत विवेका ट्रांजिट कैंप ले जाया गया. जहां और 8 दिनों तक उन्हें रखा गया. इस जिले में ही उनके 19 दिन हो गये. इस दौरान एन्थोनी मजदूरों को वापस भेजने के लिए चक्रधरपुर एसडीएम, चाईबासा एसडीओ, डीडीसी, बीडीओ चाईबासा व चक्रधरपुर आदि से संपर्क साधते रहे. लेकिन मजदूरों के वापस लौटने के लिए अगले वाहन का इंतजार होता रहा. उत्तर प्रदेश में मजदूरों के विधानसभा क्षेत्र के विधायक को भी सूचना दी गई. लेकिन मजदूरों की वापसी की राह नहीं निकली. अंतत: सांसद गीता कोड़ा से एन्थोनी ने मजदूरों की परेशानी बतायी. पीरे मामले को संज्ञान में लेने के बाद सांसद गीता कोड़ा ने उपायुक्त अरवा राजकमल से बात की. उपायुक्त ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को हिदायत दी. सांसद गीता कोड़ा ने त्रिशानु राय को मजदूरों की हिमायत के लिए जिम्मेदारी सौंपी. उसके बाद एन्थोनी फरनांडो के तीन दिनों के अथक प्रयास के बाद जिला प्रशासन की ओर से एक विशेष बस प्रदान की गयी. जिससे पांचों मजदूरों को झारखंड सीमा गढ़वा जिला के नगर ऊंटारी तक भेजा गया. झारखंड सीमा तक बस से मजदूरों को छोड़ने के बाद मजदूर 10 जून को साईकिल से अपने घर पहुंचेंगे. मजदूरों को रवाना करते वक्त सदर एसडीओ पारितोष कुमार ठाकुर, मोटरयान नियंत्रक अरुण कुमार झा, एन्थोनी फरनांडो, त्रिशानु राय, इरशाद अली, बेनिडिक्ट धरवा, प्रेम राय और प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी हरिश्चंद्र सामड उपस्थित थे.

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हमें विलंब से सूचना मिली : सांसद गीता कोड़ा
सांसद गीता कोड़ा ने कहा कि हजारों मजदूरों को लॉक डाउन के दौरान कांग्रेस परिवार ने सहयोग पहुंचाया है. इन पांचों मजदूरों की सूचना हमें काफी विलंब से मिली. सूचना मिलते ही उनकी पूरी मदद की गयी. एन्थोनी ने काफी बेहतर प्रयास किये. उपायुक्त व जिला के अन्य अधिकारियों ने भी सहयोग देकर परेशान मजदूरों को उनके घर तक भेजवाया है.

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