indian railway: रेलवे में पोस्ट सरेंडर से कर्मचारियों में बढ़ रहा कार्यभार, प्रमोशन पर भी लटकी तलवार, रेलवे में बढ़ रही निजीकरण की धार

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संतोष वर्मा
चाईबासा: एक ओर जहां लोग रोजगार की तलाश के लिए भटक रहे है वहीं भारतीय रेल में कर्मचारियों का पोस्ट सरेंडर कर निजीकरण करने की तैयारी चल रही है. जिसके कारण कर्मचारियों के विभागीय प्रमोशन जहां बंद कर दी गई. भारतीय रेलवे में ब्रैड एंड बटर के नाम प्रचलित बंगाल रेलवे (बीएनआर) दक्षिण -पूर्व रेलवे में करीब तीन हजार पोस्ट सरेंडर कर निजी हाथों में सौंपे जाने की तैयारी है. वहीं रेलवे के निजीकरण को लेकर अलग अलग यूनियन की ओर से लगातार विरोध किया जा रहा है क्योंकि रेलवे के साथ-साथ केंद्र सरकार ने हर बार दावा किया और भरोसा दिया कि रेलवे का निजीकरण नहीं होगा. लेकिन रेलवे में पोस्ट सरेंडर कर रेलवे को निजीकरण की ओर बढाने का धीमा जहर दिया जा रहा है.

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कोरोना संकट काल में आई नयी खबर के मुताबिक दक्षिण-पूर्व रेलवे मुख्यालय और चक्रधरपुर रेल मंडल समेत चार डिवीजन में 3 हजार से अधिक पोस्ट सरेंडर कर रही है. दक्षिण-पूर्व रेलवे के एजीएम अनुपम शर्मा ने संबंधित पदों की लिस्ट जारी करते हुए आदेश दिया है कि बिना देरी किए रेलवे बार्ड के आदेश पर सभी रेल डिवीजन अमल करें. इसके अलावा चक्रधरपुर रेल मंडल से 132, रांची रेल मंडल से 100, आद्रा मंडल से 870, खड़गपुर मंडल से 509, हेडक्वार्टर से 885 और वर्कशॉप-स्टोर से 725 पोस्ट को सरेंडर किया जा रहा है. जानकारी मिली है कि पोस्ट सरेंडर के कारण रेलकर्मियों के प्रमोशन पर भी तलवार लटक रही है. जनरल डिपार्टमेंट कम्पीटेटिव एक्जामिनेशन के तहत होने वाले प्रमोशन का ग्राफ पिछले कई सालों से बढ़ा ही नहीं है. इसके तहत प्रमोशन देने में रेलवे ने दिलचस्पी नहीं दिखाई. अब हालात यह हैं कि खाली पड़े पोस्ट सरेंडर हो जायेंगे और प्रमोशन की बाट जोह रहा रेलकर्मी ठगा महसूस करने के सिवाय कुछ नहीं कर पायेगा.

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रेलवे बोर्ड ने पहले ही आदेश जारी कर दिया है कि रेलवे में खाली पड़े 50 प्रतिशत पोस्ट को सरेंडर किया जाएगा. इधर चक्रधरपुर रेल मंडल के जनसंपर्क पदाधिकारी सह सीनियर डीसीएम मनीष कुमार पाठक ने कहा कि सुरक्षा और संरक्षा से जुड़े पदों को छोड़ कर जो भी पोस्ट रेलवे के विभिन्न विभागों में खाली पड़े थे उसे सरेंडर किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि रेलवे आउटसोर्स कर अपना कार्य करवा रही है इसलिए ऐसे पोस्ट की जरुरत अब रेलवे को नहीं रही. साथ ही उन्होंने बताया कि यह एक सतत प्रक्रिया है. जो भी पोस्ट लम्बे समय तक खाली रहता है उसे सरेंडर कर दिया जाता है. इधर दक्षिण पूर्व रेलवे मेंस कांग्रेस ने पोस्ट सरेंडर करने की प्रक्रिया का कड़ा विरोध किया है. मेंस कांग्रेस का कहना है कि रेलवे की लापरवाही और इच्छाशक्ति में कमी के कारण पोस्ट भरे नहीं जा रहे हैं. नतीजातन रेलकर्मियों पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ता जा रहा है और उनका प्रमोशन भी नहीं हो पा रहा है. लगातार पोस्ट सरेंडर होने से रेलवे में मैनपावर की घोर कमी हो गयी है. रेलवे के बड़े पदों पर आसीन अधिकारियों नाकामी और लापरवाही से रेलकर्मियों भारी नुकसान हो रहा है.

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ऐसे ही देश में बेरोजगारी है. वहीं रेलवे पोस्ट सरेंडर कर रोजगार के अवसर को भी ख़त्म कर रही है और रेलवे निजीकरण की ओर तेजी से बढ़ता जा रहा है. मेंस कांग्रेस के चक्रधरपुर मंडल संयोजक शशि मिश्रा ने कहा कि चक्रधरपुर रेल मंडल भारतीय रेल को सबसे ज्यादा राजस्व देता है लेकिन भारी संख्या में लगातार हो रहे पोस्ट सरेंडर से रेलकर्मियों को भारी नुकसान हो रहा है. रेलकर्मियों पर जहां अतिरिक्त कार्यभार बढ़ता जा रहा है. रेलवे के सुरक्षित रेल परिचालन पर भी ख़तरा मंडराने लगा है.

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