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jamshedpur-anarchy-system-by-health-minister-जमशेदपुर में स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने खड़ी की प्रशासन से अलग हटकर सामानांतर व्यवस्था, जारी कर दिया स्वास्थ्य मंत्रालय का ”सपोर्ट स्टाफ” बताकर ”कार्यकर्ताओं” को ”घुमने” का ”पास”, जमशेदपुर में किसका पास असली, कौन नकली, मंत्री सरकार में तो प्रशासन क्या सरकार का हिस्सा नहीं?

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स्वास्थ्य मंत्री द्वारा जारी किया गया पास, जिसमें स्वास्थ्य मंत्रालय का सपोर्ट स्टाफ बताया गया है. इसमें तस्वीर भी कार्यकर्ता का है और नाम भी, जिसको सुरक्षा कारणों से छिपा दिया गया है.

जमशेदपुर : झारखंड में कोरोना वायरस ने अब पैर पसारना तेजी से शुरू कर दिया है. खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कह दिया है कि झारखंड में आने वाले समय में खतरा बढ़ने वाला है. लॉकडाउन काफी सख्ती से लागू करने का आदेश मुख्यमंत्री ने सभी जिले के अधिकारियों को जारी की है. लेकिन जमशेदपुर में जिला प्रशासन को लॉकडाउन को सख्ती से लागू करने में काफी परेशानी हो रही है. इसका बड़ा कारण खुद सरकार में शामिल राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता है. स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने जमशेदपुर में जिला प्रशासन से अलग हटकर एक सामानांतर व्यवस्था खड़ी कर दी है. एक ”पास” (आने जाने के लिए जरूरी दस्तावेज) अपने सारे कार्यकर्ताओं को जारी कर दिया है. इस पास में लिखा गया है कि जो व्यक्ति के पास यह पास है, वह स्वास्थ्य विभाग का सपोर्ट स्टाफ है. स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता का बकायदा स्टांप लगा हुआ है और बन्ना गुप्ता का हस्ताक्षर भी है. इस हस्ताक्षरयुक्त पास लेकर जो भी कार्यकर्ता घुम रहा है, उसको न तो प्रशासन रोकता है और न ही पुलिस ही उनको रोकती है. ट्रिपल राइड में घुमते हुए ऐसे तथाकथित स्वास्थ्य मंत्रालय का सपोर्ट स्टाफ घुमता रहता है और कोई रोकने वाला नहीं है. इनके द्वारा खाना तो बांटा जाता है, लेकिन इस पास ने एक नयी व्यवस्था जमशेदपुर जिले में खड़ी कर दी है, खास तौर पर जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में, जहां से खुद स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता चुनाव जीतकर आते है.

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जमशेदपुर प्रशासन की ओर से जारी किया गया पास.

जमशेदपुर में प्रशासन द्वारा खाना बांटने वालों के लिए पास निर्गत किया गया है. जमशेदपुर के डीसी व एसडीओ के हस्ताक्षर से यह पास निर्गत किये जा रहे है. जो पास लेकर नहीं चलता है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है. जमशेदपुर के डीसी हो या एसडीओ, ये लोग भी सरकार का ही हिस्सा है. सरकार के आदेश का ही पालन करते है और वे लोग ही सिस्टम को चलाते है, लेकिन मंत्री ने खुद अपना सिस्टम जमशेदपुर में बना दिया है, जिससे यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कौन सा पास सही है और कौन सा नकली. अगर मंत्री जी को खुद के कार्यकर्ताओं के लिए जरूरी पास बनाना था तो डीसी या एसडीओ के माध्यम से भी बनवा सकते थे, लेकिन उन्होंने अपनी व्यवस्था ही खड़ी कर दी. इसको लेकर कोई आवाज कैसे उठा सकता है. प्रशासन के लिए भी यह मुश्किल खड़ी कर रहा है, कोरोना वायरस फैलने का खतरा बना रहता है, लेकिन प्रशासन भी ”पावर” के आगे नतमस्तक होता है. अब पूछने वाले यह जरूर पूछ रहे है कि आखिर स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कोरोना वायरस के दौरान कितने सपोर्ट स्टाफ बहाल किये गये है और इस बहाली का पैमाना क्या है. इस बहाली की मंजूरी कहां से लिया गया और जमशेदपुर में किसकी मरजी से प्रशासन काम करेगा.

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