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शुक्रवार, अप्रैल 23, 2021
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Jamshedpur : टाटानगर बासुकीनाथ मंडली धर्मशाला की कमेटी में तीन ट्रस्टियों के चयन को लेकर घमासान, सदस्य उठा रहे सवाल, कार्यकारी अध्यक्ष ने साधी चुप्पी

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जमशेदपुर : दुमका स्थित टाटानगर बासुकीनाथ मंडली धर्मशाला की कमेटी में एक ही महीने के अंदर एक ही परिवार से तीन ट्रस्टियों का चयन कर दिये जाने के बाद से घमासान की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. एक तो पहले से ही एक ही परिवार से तीन लोगों को ट्रस्टी बनाये जाने को लेकर विरोध हो रहा है, वही धर्मशाला की कमेटी भंग होने के बाद पुन: एक ही परिवार से तीन ट्रस्टियों के चयन को लेकर सदस्यों के द्वारा सवाल खड़े किये जा रहे हैं. इस पर धर्मशाला के कार्यकारी अध्यक्ष ने चुप्पी साध रखी है. सर्वविदित है कि पिछले 5 अगस्त 2020 को धर्मशाला की कमेटी भंग कर दी गयी थी. उसके बाद आगामी 6 अप्रैल को सदस्यों की आमसभा (एजीएम) कर नयी कार्यकारिणी कमेटी का चयन किया जाना था. लेकिन कोरोना को लेकर प्रशासनिक गाइडलाइन का हवाला देते हुए कार्यकारी अध्यक्ष के निर्देश से आमसभा को फिलहाल रद्द कर दिया गया है. हालांकि जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल इस तरह की गाइडलाइन जारी नहीं की गयी है. (नीचे भी पढ़ें)

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क्या है मामला
धर्मशाला के लिए जमीन दान देनेवाले लोगों के परिवार से एक-एक व्यक्ति को ट्रस्टी बनाया जाना है. धर्मशाला के लिए सात लोगों ने जमीन दान कर निर्माण कराया. अब पिछले अगस्त माह में कमेटी को भंग करने के बाद एक ही परिवार से तीन लोगों को ट्रस्टी बना दिया गया. इसके अलावा बताया जाता है कि एक परिवार से एक व्यक्ति को ट्रस्टी बनाने की तैयारी चल रही है, लेकिन बाकी के पांच दानदाताओं के परिवारों से एक भी व्यक्ति को ट्रस्टी नहीं बनाया गया है. इसे लेकर सदस्यों में खासी नाराजगी है. साथ ही कार्यकारी अध्यक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं. सदस्यों की ओर से इस संबंध में कार्यकारी अध्यक्ष से सवाल भी किया गया है, लेकिन इस संबंध में कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है. सदस्यों का कहना है कि बिना कमेटी के और बिना किसी को बताए अपने आप में नये ट्रस्टी को चुनाना कहां तक उचित है. उल्लेखनीय है कि बासुकीनाथ धर्मशाला की नींव रखने वाले जमीनदाता एवं ट्रस्टी में स्व बाबूलाल अग्रवाल, स्व द्वारकादास अग्रवाल, स्व जगदीश प्रसाद खेमका, स्व सागर मल चौधरी, स्व गौरीशंकर बजाज, स्व रामगोपाल रिंगसिया एवं स्व बनवारी लाल अग्रवाल का योगदान रहा था. समाज के इन लोगों ने बिना किसी स्वार्थ के अपना तन-मन-धन से बासुकीनाथ धर्मशाला का निर्माण करवाया, ताकि बासुकीनाथ आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की रहने की दिक्कत न हो.

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