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सोमवार, जून 14, 2021
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Jamshedpur : जीएसटी और ई कॉमर्स को लेकर कैट ने की राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा, 5 मार्च से 5 अप्रैल तक होगा ‘आंदोलन मास’, चुनावों को देखते हुए सभी राज्य होंगे आंदोलन के केंद्र

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जमशेदपुर : कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा गत 26 फरवरी को आहूत भारत व्यापार बंद की सफलता के बाद कैट ने जीएसटी एवं ई-कॉमर्स के मुद्दों पर आगामी 5 मार्च से 5 अप्रैल तक देश के सभी राज्यों को अपने आंदोलन के अगले चरण में केंद्र में रख कर एक वृहद राष्ट्रीय अभियान चलाने की घोषणा की है। कैट ने कहा है की यह दोनों मुद्दे देश के 8 करोड़ व्यापारियों से सीधे रूप से सम्बन्ध रखते हैं और जब तक इन दोनों मुद्दों का तार्किक समाधान नहीं हो जाता तब तक देश भर में व्यापारियों का यह आंदोलन जारी रहेगा। वर्तमान में देश भर के व्यापारी जीएसटी के प्रावधानों और ई-कॉमर्स में विदेशी कंपनियों की लगातार मनमानी से बुरी तरह से त्रस्त हैं और अब या तो अपनी समस्याओं को हल करवाएंगे या फिर अपना व्यापार बंद करने पर मजबूर होंगे। कैट के राष्ट्रीय सचिव सुरेश सोन्थालिया ने बताया की आज आयोजित एक वीडीयो कॉन्फ़्रेन्स जिसमें देश के सभी राज्यों एवं संघशासित प्रदेशों के 275 से ज़्यादा प्रमुख नेताओं ने भाग लेकर सर्वसम्मति से यह निर्णय किया कि इन दोनों मुद्दों पर जहाँ केंद्र सरकार से सीधा सवाल जवाब किया जाएगा वहीं देश की सभी राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती हैं। कैट ने आरोप लगाते हुए कहा की राज्य सरकारों ने अपने हितों और अपनी हठधर्मिता के चलते जीएसटी के बेहद साधारण क़ानून एवं नियमों को विकृत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है इसलिए अब देश के सभी राज्यों को इन मुद्दों पर घेरने का व्यापक एवं आक्रामक अभियान चलाया जाएगा। (नीचे भी पढ़ें)

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इस सन्दर्भ में कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से आग्रह किया है कि वे जीएसटी काउन्सिल की अध्यक्ष हैं, इस नाते से उनको भी जीएसटी के विकृत स्वरूप को लेकर कैट से वार्ता तुरंत शुरू करनी चाहिए। दूसरी तरफ ई-कॉमर्स के मुद्दे पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल के प्रयासों की सराहना करते हुए कैट ने उनसे आग्रह किया है की जिस बड़े पैमाने पर अभी भी विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियां सरकार के नियम एवं कानूनों का खुले आम उल्लंघन कर रही हैं उस पर लगाम कसने के लिए एफडीआई पालिसी के प्रेस नोट 2 की खामियों को दूर करते हुए एक नया प्रेस नोट जारी किया जाए तथा ई-कॉमर्स पालिसी को भी अंतिम रूप देकर उसको भी जारी किया जाए। अगले कुछ महीनों में 5 राज्यों में चुनाव हो रहे हैं और सभी राज्यों में एक वोट बैंक के रूप में व्यापारी वर्ग अपनी संख्या के बल पर किसी भी दल की हार-जीत का कारण बन सकते हैं, इसलिए कैट का यह निर्णय सभी दलों के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे समय में व्यापारियों की नारागजी किसी के लिए महंगी साबित हो सकती है। (नीचे भी पढ़ें)

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श्री सोन्थालिया ने बताया की जीएसटी और ई-कॉमर्स को लेकर कैट के राष्ट्रीय आंदोलन के अगले चरण में 5 मार्च से 5 अप्रैल तक देश भर के व्यापारिक संगठन “आंदोलन मास” के रूप में मनाएंगे, जिसके तहत देश के 40 हजार से ज्यादा व्यापारी संगठन जीएसटी एवं ई कॉमर्स के मुद्दे पर सभी राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री, प्रधान सचिव (वित्त), जीएसटी आयुक्त तथा मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सभी जिलों में उपायुक्त/डीएम को देंगे। इसके साथ ही सभी राष्ट्रीय दलों और राज्यस्तरीय दलों के अध्यक्ष को भी अपना ज्ञापन देंगे। कैट ने यह बताया की 13 मार्च को देश के 600 से अधिक जिलों में व्यापारी संगठन अपनी मांगों को लेकर धरना करेंगे. वहीँ 20 मार्च को देश के सभी जिलों में व्यापारी रैलियां निकाली जाएंगी तथा 26 मार्च को लोकसभा एवं राज्यसभा के सभी सांसदों के घर पर स्थानीय व्यापारी संगठन धरना देंगे और उनका घेराव करेंगे। इस आंदोलन में कैट व्यापक रूप से सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग भी करेगा। उन्होंने यह भी बताया की मार्च के ही महीने में देश के सभी राज्यों में कैट राज्य स्तरीय सम्मेलन भी करेगा और इस तरह देश में पांच जोनल कांफ्रेंस भी किये जायेंगे। प्रत्येक जोन के अंतर्गत आने वाले राज्यों के व्यापारी नेता इस कांफ्रेंस में भाग लेंगे।

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